
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सरकारी स्कूलों को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा लक्ष्य देते हुए कहा है कि राजधानी के सभी स्कूलों को मार्च 2027 तक “जीरो वेस्ट कैंपस” में बदलने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने स्कूलों से कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग), कम्पोस्टिंग और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग जैसी टिकाऊ व्यवस्थाओं को अपनाने का आह्वान किया।
यह बात उन्होंने शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान कही, जिसमें सरकारी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रमुखों के साथ शिक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय पहलों पर विस्तृत चर्चा की गई।
422 स्कूलों के प्रमुखों से सीधा संवाद
जनकपुरी स्थित पोसंगीपुर के सीएम श्री स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने हाइब्रिड मोड के माध्यम से विद्यालय प्रमुखों से संवाद किया। कार्यक्रम में पांच जिलों और 11 शिक्षा जोन के 422 सरकारी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं स्कूल प्रमुखों ने हिस्सा लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने, आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा करना था।
स्कूलों की सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था की हुई समीक्षा
संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और शिक्षण वातावरण की समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने जिला उप शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए कि कक्षाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, खेल सुविधाओं, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों और डिजिटल शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जो उनके सर्वांगीण विकास में मदद करे।
स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल संसाधनों पर विशेष जोर
आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए आशीष सूद ने स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल पुस्तकालय, आईसीटी लैब, भाषा प्रयोगशालाओं और व्यावसायिक शिक्षा प्रयोगशालाओं के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाओं का पूरा लाभ छात्रों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उन्हें बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा मिल सके।
विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष अभियान
शिक्षा मंत्री ने सभी स्कूलों से 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस उत्साह के साथ मनाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को पूरे मानसून सीजन के दौरान जारी रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में छात्रों को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव सिखाना समय की जरूरत है।
स्कूल प्रमुखों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम के दौरान एसबीवी मोती नगर, सीएम श्री स्कूल राजौरी गार्डन, सर्वोदय विद्यालय सेक्टर-8 रोहिणी और सीएम श्री स्कूल हिरण कुदना के स्कूल प्रमुखों ने विभिन्न शैक्षिक पहलों और नवाचारों से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। इन अनुभवों के माध्यम से विद्यालयों में बेहतर प्रबंधन, छात्र सहभागिता और शिक्षण गुणवत्ता सुधार के सफल मॉडल प्रस्तुत किए गए।
पर्यावरण और शिक्षा को साथ लेकर आगे बढ़ने की पहल
दिल्ली सरकार की यह पहल स्कूलों को केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार परिसरों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार सभी स्कूल मार्च 2027 तक जीरो वेस्ट कैंपस बनने में सफल होते हैं, तो इससे न केवल कचरा प्रबंधन में सुधार होगा बल्कि लाखों छात्रों में पर्यावरण संरक्षण की आदतें भी विकसित होंगी।




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