
जलवायु परिवर्तन आज दुनिया के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। बढ़ता वैश्विक तापमान, अनियमित मौसम, प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं और पर्यावरणीय असंतुलन न केवल प्रकृति बल्कि अर्थव्यवस्था और मानव जीवन को भी प्रभावित कर रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) में मास्टर ऑफ साइंस (MSc) कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।
इग्नू का दावा है कि यह भारत का पहला विश्वविद्यालय है जिसने जलवायु परिवर्तन विषय में समर्पित एमएससी प्रोग्राम शुरू किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह कार्यक्रम ऐसे पेशेवरों और शोधकर्ताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जो भविष्य में जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान खोजने में भूमिका निभा सकें।
जलवायु परिवर्तन की गहरी समझ देगा कोर्स
विश्वविद्यालय के मुताबिक, दो वर्षीय यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को जलवायु विज्ञान, जलवायु जोखिमों, अनुकूलन (Adaptation) और शमन (Mitigation) रणनीतियों, पर्यावरणीय प्रशासन तथा सतत विकास से जुड़े विषयों की व्यापक जानकारी प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य छात्रों को वैज्ञानिक, सामाजिक और नीतिगत दृष्टिकोण से जलवायु परिवर्तन को समझने और उससे जुड़े समाधान विकसित करने के लिए तैयार करना है।
इन विषयों को किया गया शामिल
एमएससी क्लाइमेट चेंज कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण और समकालीन विषयों को शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को जलवायु विज्ञान, जल संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा प्रणालियां, कृषि और जलवायु, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जैव विविधता संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), सार्वजनिक स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन और पर्यावरण कानून जैसे विषयों का अध्ययन कराया जाएगा।
इन विषयों का चयन इस तरह किया गया है ताकि छात्र जलवायु परिवर्तन के विभिन्न आयामों को समझ सकें और व्यावहारिक समाधान विकसित करने की क्षमता हासिल कर सकें।
अनुभवी शिक्षकों के नेतृत्व में होगा संचालन
इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. वी. वेंकटरामनन और प्रो. शची शाह के नेतृत्व में किया जाएगा। दोनों शिक्षकों को पर्यावरण अध्ययन, सस्टेनेबिलिटी और जलवायु परिवर्तन से जुड़े क्षेत्रों में शिक्षण और शोध का लंबा अनुभव है। विश्वविद्यालय का मानना है कि उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को विषय की गहरी और व्यावहारिक समझ प्राप्त होगी।
कौन ले सकता है प्रवेश?
इस पाठ्यक्रम में किसी भी विषय से स्नातक (Graduation) कर चुके अभ्यर्थी प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। कार्यक्रम कुल 80 क्रेडिट का है। विशेष बात यह है कि पहले वर्ष की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन क्लाइमेट चेंज प्राप्त करने का विकल्प भी मिलेगा।
फीस और अन्य जानकारी
इग्नू द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम की वार्षिक फीस 8,000 रुपये निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त नामांकन और विकास शुल्क अलग से देना होगा। पाठ्यक्रम का माध्यम अंग्रेजी रखा गया है।
विश्वविद्यालय ने विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के स्नातकों, शिक्षकों, नीति निर्माताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों और पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों से इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने की अपील की है।
बढ़ रही है क्लाइमेट प्रोफेशनल्स की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जलवायु परिवर्तन से जुड़े शोध, नीति निर्माण, पर्यावरण प्रबंधन, कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इग्नू का यह नया कार्यक्रम उन छात्रों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जो पर्यावरण और सतत विकास के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच यह कोर्स न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




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