
अशोका यूनिवर्सिटी को भारत में जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों के जनस्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए ब्रिटेन की प्रतिष्ठित संस्था वेलकम ट्रस्ट (Wellcome Trust) से 1.94 मिलियन पाउंड (करीब 22 करोड़ रुपये) का अनुदान प्राप्त हुआ है। यह चार वर्षीय शोध परियोजना भारत के जलवायु शमन (Climate Mitigation) उपायों और उनसे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों का व्यापक अध्ययन करेगी।
इस परियोजना का नेतृत्व अशोका यूनिवर्सिटी के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस—अशोका सेंटर फॉर ए पीपल-सेंट्रिक एनर्जी ट्रांजिशन (ACPET) और सेंटर फॉर हेल्थ एनालिटिक्स रिसर्च एंड ट्रेंड्स (CHART) द्वारा किया जाएगा। परियोजना की शुरुआत मार्च 2026 में हुई थी और 8 जून को मुंबई में इसकी पहली प्रत्यक्ष बैठक आयोजित की गई।
शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि भारत के जलवायु परिवर्तन नियंत्रण से जुड़े कदम राष्ट्रीय, शहरी, सामुदायिक और घरेलू स्तर पर लोगों के स्वास्थ्य को किस प्रकार लाभ पहुंचा सकते हैं। अध्ययन के दौरान वायु प्रदूषण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वच्छ खाना पकाने की तकनीकें, व्यवहारिक बदलाव और जनस्वास्थ्य मॉडलिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अशोका यूनिवर्सिटी में ACPET के निदेशक प्रोफेसर वैभव चौधरी और CHART की निदेशक प्रोफेसर पूर्णिमा प्रभाकरण इस परियोजना का संयुक्त नेतृत्व कर रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय शोध समूह में C40 Cities के हेड ऑफ मिटिगेशन रिसर्च मार्कस बेरेंसन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के सहायक प्रोफेसर डॉ. गौरब बसु भी शामिल हैं।
इस परियोजना को नीति निर्माताओं और क्षेत्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें नीति आयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। परियोजना के तहत विकसित किए जाने वाले शोध उपकरणों को नीति आयोग के India Energy Security Scenarios (IESS) 2070 जैसे सरकारी ढांचों में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि जलवायु और जनस्वास्थ्य से जुड़ी नीतियों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मजबूत बनाया जा सके।
प्रोफेसर वैभव चौधरी के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य जलवायु और स्वास्थ्य संबंधी शोध को एक साथ जोड़ना है, ताकि ऐसे प्रमाण जुटाए जा सकें जो कमजोर और संवेदनशील समुदायों की सुरक्षा करते हुए कम-कार्बन और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दें। वहीं प्रोफेसर पूर्णिमा प्रभाकरण ने कहा कि यह सहयोग भारत की ऊर्जा परिवर्तन प्रक्रिया से जुड़े स्वास्थ्य और आर्थिक लाभों का राष्ट्रीय, शहरी और सामुदायिक स्तर पर अध्ययन करेगा।
अशोका यूनिवर्सिटी, दिल्ली-एनसीआर के कुलपति प्रोफेसर सोमक रायचौधुरी ने कहा कि वेलकम ट्रस्ट से मिला यह अनुदान विश्वविद्यालय की उस शोध संस्कृति को मान्यता देता है, जो विज्ञान, नीति और सामाजिक प्रभाव को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।
यह परियोजना ऐसे समय में शुरू की गई है जब भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इस शोध के निष्कर्ष जलवायु नीति, शहरी प्रशासन, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। साथ ही यह भारत में जलवायु कार्रवाई और जनस्वास्थ्य के बीच संबंधों को समझने वाले शोध को भी नई दिशा देगा।




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