
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के शोधकर्ताओं ने एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) तकनीकों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को सेवा-आधारित विकास मॉडल से आगे बढ़कर नवाचार-आधारित विकास रणनीति अपनानी चाहिए, जिससे वर्ष 2030 तक करीब 20 लाख उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां सृजित की जा सकती हैं।
ये सिफारिशें IIT मद्रास के एक्सपीरिएंशियल टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर (XTIC) की मेटावर्स इंडिया पॉलिसी एंड स्टैंडर्ड्स (MIPS) समिति द्वारा जारी रिपोर्ट ‘Bolstering India’s XR Startup and Innovation Ecosystem: A Case Study of the TN AVGC-XR Policy 2026’ में दी गई हैं।
रिपोर्ट में तमिलनाडु सरकार की हाल ही में शुरू की गई AVGC-XR पॉलिसी 2026 का विश्लेषण किया गया है और राज्य तथा केंद्र सरकारों के लिए भारत के XR इकोसिस्टम को मजबूत करने का खाका प्रस्तुत किया गया है। XR के अंतर्गत वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) जैसी तकनीकें शामिल हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में भारत में XR क्षेत्र से जुड़े 1,000 से अधिक स्टार्टअप और लगभग 1,000 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (SMEs) कार्यरत हैं। तमिलनाडु की नीति का लक्ष्य भारत के XR बाजार में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना और 2 लाख सेवा-आधारित रोजगार सृजित करना है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि केवल सेवा प्रदाता मॉडल पर निर्भर रहने से दीर्घकालिक मूल्य सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सीमित हो सकती है।
डीप-टेक नवाचार पर जोर
रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशों में “50-50 वर्कफोर्स डिजाइन सिद्धांत” शामिल है। इसके तहत वर्ष 2030 तक अनुमानित 20 लाख XR नौकरियों में से कम से कम आधी नौकरियां उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में होनी चाहिए। इनमें मौलिक बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण, गेम इंजन विकास, एआई-संचालित इमर्सिव तकनीकें और उन्नत अनुसंधान एवं विकास शामिल हैं।
रिपोर्ट में XR हार्डवेयर निर्माण को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में मान्यता देने की भी सिफारिश की गई है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि तमिलनाडु के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नेटवर्क का उपयोग करते हुए हेड-माउंटेड डिस्प्ले, ट्रैकर्स और हैप्टिक इंटरफेस जैसी तकनीकों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक XR आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
AI और XR का होगा अगला बड़ा संगम
XTIC, IIT मद्रास के फैकल्टी हेड प्रोफेसर एम. मणिवन्नन ने कहा कि तकनीकी परिवर्तन की अगली बड़ी लहर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और XR तकनीकों के मेल से आएगी। उनके अनुसार, वर्तमान AI क्रांति का स्वाभाविक विस्तार XR होगा, जिसे फिजिकल AI और एम्बॉडीड AI के नाम से भी जाना जाता है।
रिपोर्ट में क्षेत्र के भीतर कौशल और शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों की भी पहचान की गई है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि XR नवाचार के केंद्र में शैक्षणिक संस्थानों को रखा जाए। इसके लिए राज्य स्तर पर AI के साथ एकीकृत XR पाठ्यक्रम ढांचा विकसित करने और हैप्टिक्स, स्पैशियल कंप्यूटिंग तथा सेंसर इंटीग्रेशन जैसे विशेष क्षेत्रों में कार्यरत मास्टर्स और पीएचडी शोधार्थियों के लिए ‘TN XR Fellowship’ शुरू करने की सिफारिश की गई है।
स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के लिए नई सुविधाओं का प्रस्ताव
रिपोर्ट में राज्य स्तर की कंप्यूटिंग अवसंरचना विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत ‘TN-XR Cloud’ जैसी सुविधा बनाई जा सकती है, जिससे स्टार्टअप, शोधकर्ता और शैक्षणिक संस्थान एआई एवं XR अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक उच्च-प्रदर्शन ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) तक रियायती पहुंच प्राप्त कर सकें।
छात्रों के लिए उभर रहे नए अवसर
रिपोर्ट के अनुसार, इमर्सिव तकनीकों के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों और पेशेवरों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल एप्लिकेशन डेवलपमेंट कौशल ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि छात्रों को XR की मूलभूत अवधारणाओं की भी गहरी समझ विकसित करनी होगी।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए IIT मद्रास ने अपने NPTEL पाठ्यक्रम ‘Foundations of Virtual Reality’ का उल्लेख किया है, जिसमें वर्तमान में नामांकन जारी है। यह दुनिया में उपलब्ध चुनिंदा आधारभूत XR पाठ्यक्रमों में से एक माना जाता है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और रक्षा क्षेत्रों में व्यापक उपयोग
रिपोर्ट में बताया गया है कि XR, AI और हैप्टिक्स तकनीकों का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रक्षा और विनिर्माण जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए रिमोट डायग्नोस्टिक्स, शिक्षा में इमर्सिव लर्निंग अनुभव, रक्षा प्रशिक्षण के लिए सिमुलेशन तकनीकें और विनिर्माण क्षेत्र में डिजिटल ट्विन्स जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय प्रोत्साहन, उन्नत कंप्यूटिंग अवसंरचना तक पहुंच और तेजी से बढ़ते XR बाजार में भागीदारी भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति दे सकती है।
नीति संबंधी चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी
हालांकि रिपोर्ट में XR क्षेत्र की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया गया है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण नीति संबंधी कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। इनमें एआई-निर्मित XR एसेट्स, जेनरेटिव इमर्सिव वातावरण, मेटावर्स गवर्नेंस और बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष नियामक ढांचे की कमी शामिल है।
शोधकर्ताओं ने एक एकीकृत XR कॉरिडोर या XR सुपरहाइवे विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य नवाचार केंद्रों, कौशल विकास संस्थानों और विनिर्माण हब्स को एक समन्वित नेटवर्क में जोड़ना है, ताकि दीर्घकालिक विकास और तकनीकी नेतृत्व सुनिश्चित किया जा सके।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल करने के लिए भारत को केवल स्टार्टअप वृद्धि पर ही नहीं, बल्कि अनुसंधान, प्रतिभा विकास, आधुनिक अवसंरचना और स्वदेशी नवाचार में रणनीतिक निवेश पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। XR क्षेत्र में सफलता भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य को नई दिशा दे सकती है।




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