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JEE Advanced 2026: 16-Year-Old Cyber ​​Researcher Exposes Major Security Flaw; IIT Roorkee Promptly Rectifies Issue

JEE Advanced 2026: 16 वर्षीय साइबर रिसर्चर ने उजागर की बड़ी सुरक्षा खामी, IIT रुड़की ने तुरंत किया सुधार

JEE Advanced 2026: 16-Year-Old Cyber ​​Researcher Exposes Major Security Flaw; IIT Roorkee Promptly Rectifies Issue

देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल जेईई एडवांस्ड 2026 के परिणाम पोर्टल से जुड़ी एक गंभीर तकनीकी खामी सामने आई है। इस खामी का खुलासा किसी बड़ी साइबर सुरक्षा कंपनी ने नहीं, बल्कि 16 वर्षीय एक युवा साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर ने किया। मामले की जानकारी मिलने के बाद परीक्षा आयोजन संस्था IIT रुड़की ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा खामी को दूर कर दिया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा एजेंसियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लाखों छात्रों की संवेदनशील जानकारी से जुड़े सिस्टम में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना बेहद जरूरी है।

बिना लॉग-इन के एक्सेस हो रहा था संवेदनशील डेटा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय युवा साइबर रिसर्चर राइलेन अनिल ने दावा किया कि JEE Advanced 2026 के रिजल्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक पब्लिक क्लाउड स्टोरेज की कॉन्फिगरेशन में गंभीर तकनीकी त्रुटि थी। इस वजह से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड बिना किसी ऑथेंटिकेशन या लॉग-इन प्रक्रिया के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो रहे थे।

बताया गया कि इस खामी के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़े दस्तावेजों तक पहुंच संभव थी। इनमें परीक्षा परिणामों के रिकॉर्ड और एडमिट कार्ड की पीडीएफ फाइलें शामिल थीं। इन दस्तावेजों में उम्मीदवारों के नाम, जन्म तिथि और पंजीकृत मोबाइल नंबर जैसी व्यक्तिगत जानकारियां दर्ज थीं, जिन्हें संवेदनशील डेटा माना जाता है।

लाखों अभ्यर्थियों की जानकारी हो सकती थी प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1.79 लाख छात्रों के रिजल्ट रिकॉर्ड और करीब 1.87 लाख अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड इस तकनीकी खामी की वजह से एक्सेस किए जा सकते थे। हालांकि अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है कि इस डेटा का दुरुपयोग हुआ हो या किसी ने उसमें बदलाव किया हो।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि केवल डेटा को सुरक्षित रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्लाउड स्टोरेज और सर्वर कॉन्फिगरेशन की नियमित जांच भी जरूरी है। अक्सर तकनीकी सेटिंग्स में छोटी सी चूक भी बड़े डेटा एक्सपोजर का कारण बन सकती है।

IIT रुड़की ने स्वीकार की तकनीकी चूक

मामले की जानकारी मिलने के बाद IIT रुड़की ने सुरक्षा खामी को स्वीकार करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए। संस्थान ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रिसर्चर को धन्यवाद भी दिया।

अपने आधिकारिक बयान में IIT रुड़की ने कहा कि क्लाउड स्टोरेज डिवाइस की कॉन्फिगरेशन से जुड़ी त्रुटि की जानकारी देने के लिए रिसर्चर का आभार। संस्थान ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध डेटा केवल “रीड-ओनली” मोड में था, इसलिए उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन या छेड़छाड़ संभव नहीं थी। साथ ही संस्थान ने जिम्मेदार और नैतिक साइबर सुरक्षा शोध की सराहना की।

एथिकल हैकिंग की भूमिका फिर आई चर्चा में

इस घटना ने एक बार फिर एथिकल हैकिंग और जिम्मेदार सुरक्षा शोध के महत्व को उजागर किया है। दुनिया भर में कई संस्थान और कंपनियां ऐसे शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करती हैं, जो सुरक्षा खामियों की जानकारी जिम्मेदारी के साथ संबंधित संगठन तक पहुंचाते हैं ताकि संभावित साइबर खतरों को समय रहते रोका जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन परीक्षा प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के बीच छात्रों के डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। JEE Advanced जैसे बड़े राष्ट्रीय स्तर के परीक्षा प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत बनाए रखना समय की मांग है।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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