
इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों के बीच कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) हमेशा से सबसे लोकप्रिय शाखाओं में रही है। खासकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में CSE सीटों की मांग हर साल सबसे अधिक रहती है। ऐसे में IIT में कंप्यूटर साइंस में प्रवेश पाने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छी खबर है। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (JoSAA) द्वारा जारी सीट मैट्रिक्स के अनुसार, वर्ष 2026 के लिए देशभर के IITs में CSE सीटों की संख्या बढ़ाई गई है।
नए आंकड़ों के मुताबिक देश के 23 IIT संस्थानों में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की कुल 2,183 सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले वर्ष यह संख्या 2,129 थी। यानी इस बार कुल 54 नई सीटें जोड़ी गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में हुई यह बढ़ोतरी उन छात्रों के लिए राहत लेकर आई है जो JEE Advanced के माध्यम से IIT में CSE शाखा में दाखिला पाने का लक्ष्य रखते हैं।
किन IITs में बढ़ी कंप्यूटर साइंस की सीटें?
JoSAA के सीट आंकड़ों के अनुसार कई IITs ने इस वर्ष CSE सीटों में इजाफा किया है। इनमें प्रमुख रूप से Indian Institute of Technology Bhubaneswar, Indian Institute of Technology Bombay, Indian Institute of Technology Mandi, Indian Institute of Technology Hyderabad, Indian Institute of Technology Jodhpur, Indian Institute of Technology (ISM) Dhanbad, Indian Institute of Technology Palakkad और Indian Institute of Technology Jammu शामिल हैं।
सबसे अधिक वृद्धि IIT मंडी, IIT जोधपुर, IIT पल्लक्कड़ और IIT जम्मू में दर्ज की गई है, जहां 10-10 नई सीटें जोड़ी गई हैं। वहीं IIT हैदराबाद में 5, IIT धनबाद में 6, IIT भुवनेश्वर में 2 और IIT बॉम्बे में 1 अतिरिक्त सीट बढ़ाई गई है।
IIT बॉम्बे और IIT वाराणसी में सबसे ज्यादा सीटें
CSE सीटों के लिहाज से इस वर्ष भी IIT बॉम्बे शीर्ष संस्थानों में शामिल है, जहां 199 सीटें उपलब्ध हैं। इसके अलावा IIT वाराणसी (BHU) में 155, IIT धनबाद में 145 और IIT खड़गपुर में 140 सीटें हैं। IIT कानपुर, IIT रुड़की और IIT गुवाहाटी जैसे प्रमुख संस्थानों में भी कंप्यूटर साइंस सीटों की संख्या 100 से अधिक है।
आखिर CSE की मांग इतनी ज्यादा क्यों है?
पिछले कुछ वर्षों में तकनीक आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में बढ़ती नौकरियों ने कंप्यूटर साइंस को छात्रों की पहली पसंद बना दिया है।
यही वजह है कि JoSAA काउंसलिंग के शुरुआती राउंड में ही अधिकांश IITs की CSE सीटें भर जाती हैं। इस शाखा में प्रवेश के लिए आमतौर पर सबसे ऊंची रैंक की आवश्यकता होती है और बाद के राउंड में सीट आवंटन में बहुत कम बदलाव देखने को मिलता है।
JoSAA काउंसलिंग में चॉइस फिलिंग का रखें विशेष ध्यान
IIT में प्रवेश JoSAA काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। सीट आवंटन छात्रों की JEE Advanced रैंक, आरक्षण श्रेणी, उपलब्ध सीटों और उनके द्वारा भरे गए विकल्पों के आधार पर तय होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान चॉइस फिलिंग सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। कई बार छात्र अपनी रैंक के अनुसार सही प्राथमिकताएं नहीं भरते, जिससे उन्हें बेहतर संस्थान या पसंदीदा शाखा नहीं मिल पाती। इसलिए छात्रों को सीट मैट्रिक्स, पिछले वर्षों के कटऑफ और अपनी रैंक का विश्लेषण कर सोच-समझकर विकल्प भरने चाहिए।
छात्रों के लिए क्या मायने रखती है सीटों में बढ़ोतरी?
हालांकि 54 सीटों की वृद्धि कुल संख्या के मुकाबले बहुत बड़ी नहीं मानी जा सकती, लेकिन देश के सबसे प्रतिस्पर्धी इंजीनियरिंग कार्यक्रमों में हर अतिरिक्त सीट महत्वपूर्ण होती है। इससे उच्च रैंक वाले छात्रों को अधिक विकल्प मिलेंगे और कुछ संस्थानों में कटऑफ पर भी मामूली प्रभाव देखने को मिल सकता है।
IITs में कंप्यूटर साइंस की बढ़ती सीटें यह भी दिखाती हैं कि तकनीकी शिक्षा संस्थान उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप अपनी क्षमता का विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए CSE की मांग और अधिक बढ़ने की संभावना है।




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