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भारत में पहली नौकरी पाना हुआ और मुश्किल, 70% युवाओं ने जताई चिंता: रिपोर्ट

भारत में पहली नौकरी पाना हुआ और मुश्किल, 70% युवाओं ने जताई चिंता: रिपोर्ट

भारत में पहली नौकरी पाना हुआ और मुश्किल, 70% युवाओं ने जताई चिंता: रिपोर्ट

भारत में नौकरी की तलाश कर रहे 10 में से 7 युवा मानते हैं कि पहली नौकरी हासिल करना अब तीन से पांच साल पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है। जॉब प्लेटफॉर्म Indeed की एक नई रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट बताती है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा वाले श्रम बाजार में नए ग्रेजुएट्स को करियर की शुरुआत करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

देशभर के 2,633 नौकरी तलाशने वालों और कर्मचारियों पर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, एंट्री-लेवल नौकरियों में अब पहले की तुलना में अनुभव को अधिक महत्व दिया जा रहा है। वहीं, इंटर्नशिप, इंडस्ट्री एक्सपोजर और प्लेसमेंट सहायता तक पहुंच अभी भी सभी छात्रों के लिए समान नहीं है।

रिपोर्ट में शामिल 70 प्रतिशत लोगों का कहना है कि आज पहली नौकरी ढूंढ़ना कुछ साल पहले की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो गया है। वहीं, 72 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि एंट्री-लेवल पदों के लिए भी अक्सर पहले से कार्य अनुभव की मांग की जाती है।

Indeed के टैलेंट स्ट्रेटेजी एडवाइजर रोहन सिल्वेस्टर ने कहा, “कई युवाओं के लिए पहली नौकरी अब कॉलेज से करियर तक का सीधा सफर नहीं रह गई है। यह एक लंबा और अनिश्चित दौर बनता जा रहा है, जिसमें लगातार आवेदन करना, जवाब मिलने में देरी और समझौता करने का बढ़ता दबाव शामिल है।”

अनुभव का विरोधाभास बढ़ा

रिपोर्ट में उस स्थिति को उजागर किया गया है जिसे Indeed ने “एक्सपीरियंस पैराडॉक्स” यानी अनुभव का विरोधाभास कहा है। एक ओर नियोक्ता ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनके पास व्यावहारिक अनुभव हो, वहीं दूसरी ओर कई छात्रों को ऐसे अवसर ही नहीं मिल पा रहे हैं जिनसे वे कार्यस्थल का अनुभव हासिल कर सकें।

सर्वे में केवल 20 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें पढ़ाई के दौरान पेड इंटर्नशिप का अवसर मिला। वहीं, 18 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स, प्लेसमेंट सहायता या फ्रीलांस अवसरों में से किसी तक भी पहुंच नहीं मिली।

रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि कई युवा प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत में ही अपनी अपेक्षाओं में बदलाव करने को मजबूर हैं। केवल 14 प्रतिशत लोगों को उम्मीद है कि उनकी पहली नौकरी उनकी पसंदीदा भूमिका, कंपनी और स्थान से मेल खाएगी। जबकि 43 प्रतिशत ने बताया कि आर्थिक दबाव और सीमित अवसर उनके रोजगार संबंधी फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।

नौकरी के लिए शॉर्टलिस्ट होना भी बड़ी चुनौती

सिर्फ नौकरी के अवसर ढूंढ़ना ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में आगे बढ़ना भी नौकरी तलाशने वालों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।

करीब 49 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि नौकरी के लिए आवेदन करने के बाद शॉर्टलिस्ट होना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, 61 प्रतिशत लोगों ने बताया कि आवेदन जमा करने के बाद उन्हें नियोक्ताओं की ओर से बहुत कम या लगभग कभी जवाब नहीं मिलता।

लंबे समय तक नौकरी की तलाश का असर युवाओं के आत्मविश्वास पर भी पड़ रहा है। लगभग 64 प्रतिशत लोगों ने कहा कि बार-बार आवेदन करने और अस्वीकृति मिलने से उनकी प्रेरणा और आत्मविश्वास में कमी आई है। वहीं, केवल 20 प्रतिशत उत्तरदाताओं को लगता है कि वे अपने तय किए गए करियर लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।

रोहन सिल्वेस्टर के अनुसार, यह स्थिति नियोक्ताओं के लिए शुरुआती करियर वाले उम्मीदवारों के लिए बेहतर अवसर और स्पष्ट रास्ते तैयार करने की आवश्यकता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट याद दिलाती है कि शुरुआती स्तर की भर्ती को केवल अनुभव के आधार पर नहीं देखा जा सकता। जो कंपनियां नए उम्मीदवारों के लिए स्पष्ट अवसर उपलब्ध कराएंगी, उनकी क्षमता पर भरोसा करेंगी और काम के दौरान सीखने का मौका देंगी, वे लंबे समय में मजबूत टैलेंट पाइपलाइन तैयार कर सकेंगी।”

शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका भी अहम

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि छात्रों और नए ग्रेजुएट्स के बेहतर रोजगार परिणामों के लिए संगठित सहायता तंत्र बेहद महत्वपूर्ण है।

निष्कर्षों के अनुसार, प्लेसमेंट सेल, इंटर्नशिप, रिज्यूमे तैयार करने में सहायता और इंटरव्यू की तैयारी से जुड़े कार्यक्रम छात्रों को शिक्षा से रोजगार की दुनिया में सफलतापूर्वक प्रवेश दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह सर्वे अप्रैल और मई 2026 के दौरान Valuvox द्वारा Indeed की ओर से किया गया था। इसमें STEM, गैर-STEM, व्यावसायिक शिक्षा और स्नातकोत्तर पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागियों को शामिल किया गया। सर्वे में टियर-1, टियर-2, टियर-3 शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के उत्तरदाताओं की भी भागीदारी रही।

Asmita Sarkar

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