
CBSE कक्षा 12वीं इम्प्रूवमेंट परीक्षा 2026 का परिणाम जारी न होने से परेशान एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। छात्र का कहना है कि पश्चिम एशियाई देशों में सुरक्षा कारणों से कुछ परीक्षाएं रद्द होने के बाद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने प्रभावित विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना लागू की थी, लेकिन इसके बावजूद उसका परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता प्रांशु जिगरकुमार पटेल, जिन्होंने सऊदी अरब के अल जुबैल से निजी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा दी थी, का दावा है कि परिणाम लंबित रहने के कारण उनकी आगे की पढ़ाई और विश्वविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए राहत की मांग की है।
पश्चिम एशिया में परीक्षा रद्द होने के बाद बनाई गई थी विशेष योजना
याचिका के अनुसार, प्रांशु पटेल ने CBSE कक्षा 12वीं इम्प्रूवमेंट परीक्षा 2026 में भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस विषयों की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। इसी दौरान पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने और युद्ध जैसे हालात पैदा होने के कारण CBSE ने गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस सहित कुछ परीक्षाओं को रद्द कर दिया था।
प्रभावित छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए CBSE ने 27 मार्च को एक विशेष मूल्यांकन नीति जारी की थी। इस योजना के तहत त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के अंकों के आधार पर परिणाम तैयार करने का प्रावधान किया गया था। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर विशेष परीक्षा आयोजित करने का विकल्प भी रखा गया था।
हालांकि, जब बोर्ड ने 13 मई 2026 को कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित किए, तब प्रांशु पटेल का रिजल्ट जारी नहीं किया गया। बोर्ड की वेबसाइट पर उनकी स्थिति “RL (Result Later)” यानी परिणाम बाद में घोषित किया जाएगा, के रूप में दिखाई गई।
कई बार अनुरोध के बावजूद नहीं मिला जवाब
याचिका में कहा गया है कि छात्र ने 17 मई, 21 मई और 30 मई को CBSE से संपर्क कर विशेष मूल्यांकन योजना के तहत परिणाम जारी करने या वैकल्पिक रूप से विशेष परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। लेकिन अब तक बोर्ड की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
छात्र का आरोप है कि लगातार अनुरोध के बावजूद परिणाम लंबित रखा गया है, जिससे उसके शैक्षणिक भविष्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है कि यदि विशेष मूल्यांकन योजना प्रभावित छात्रों के लिए बनाई गई थी, तो उसका लाभ सभी पात्र विद्यार्थियों को समान रूप से मिलना चाहिए।
विश्वविद्यालय में प्रवेश पर पड़ा असर
रिजल्ट लंबित रहने का सबसे बड़ा प्रभाव छात्र की उच्च शिक्षा योजनाओं पर पड़ा है। याचिका के अनुसार, प्रांशु पटेल ने कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीटेक पाठ्यक्रम के लिए एक विश्वविद्यालय में आवेदन किया था और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यक फीस भी जमा कर दी थी।
विश्वविद्यालय ने छात्र से 1 जून तक कक्षा 12वीं के परिणाम की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। लेकिन परिणाम जारी न होने के कारण वह प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। याचिका में दावा किया गया है कि इसी वजह से छात्र अन्य शैक्षणिक संस्थानों में आवेदन करने और प्रवेश के अवसरों का लाभ उठाने से भी वंचित हो रहा है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
छात्र ने अपनी याचिका में कहा है कि अधिकारियों की निष्क्रियता और परिणाम जारी न करने का फैसला मनमाना, अनुचित और भेदभावपूर्ण है। उसका कहना है कि इस स्थिति से संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मिले उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हैं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि छात्र ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। हालांकि, अदालत की छुट्टियों के दौरान मामले को अत्यावश्यक श्रेणी में शामिल नहीं किया गया और इसे अवकाश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?
अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए छात्र ने मांग की है कि CBSE को पश्चिम एशियाई देशों के लिए घोषित विशेष मूल्यांकन योजना के अनुसार उसका परिणाम जारी करने का निर्देश दिया जाए।
वैकल्पिक रूप से, यदि मूल्यांकन योजना के तहत परिणाम जारी करना संभव नहीं है, तो बोर्ड को उन विषयों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया जाए जिनकी परीक्षाएं सुरक्षा कारणों से रद्द कर दी गई थीं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश और विदेश में पढ़ रहे हजारों छात्र बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों के आधार पर उच्च शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। ऐसे में परिणाम में देरी छात्रों के शैक्षणिक और करियर संबंधी निर्णयों को सीधे प्रभावित कर सकती है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं, जो प्रभावित छात्रों के लिए महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।




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