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NEET विवाद के बीच चीन का तंज: गाओकाओ परीक्षा का जिक्र कर भारत की परीक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना

NEET विवाद के बीच चीन का तंज: गाओकाओ परीक्षा का जिक्र कर भारत की परीक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना

NEET विवाद के बीच चीन का तंज: गाओकाओ परीक्षा का जिक्र कर भारत की परीक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना

देश में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों को लेकर जारी बहस के बीच चीन की एक राजनयिक टिप्पणी ने नई चर्चा को जन्म दे दिया। जब लाखों छात्र परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर चिंतित थे और संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी थी, उसी दौरान भारत में चीन दूतावास की अधिकारी यू जिंग की एक सोशल मीडिया पोस्ट सुर्खियों में आ गई।

यू जिंग ने अपने पोस्ट में चीन की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ का उल्लेख किया, जिसे चीन की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है। इसे अक्सर भारत की JEE और NEET जैसी परीक्षाओं के समकक्ष माना जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चीन में करोड़ों छात्रों की परीक्षा बड़े पैमाने पर और बिना किसी बड़े व्यवधान के आयोजित की गई।

गाओकाओ का उदाहरण और भारत का संदर्भ

चीन की राजनयिक ने अपने पोस्ट में सीधे तौर पर किसी भारतीय संस्था या व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन पोस्ट में इस्तेमाल किए गए हैशटैग और संदर्भों ने इसे भारत की परीक्षा व्यवस्था से जोड़ दिया। यही कारण है कि यह पोस्ट सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की तुलना अक्सर देशों की सॉफ्ट पावर और प्रशासनिक क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए की जाती है। ऐसे में किसी विदेशी अधिकारी द्वारा परीक्षा प्रबंधन को लेकर की गई टिप्पणी को केवल एक सामान्य सोशल मीडिया पोस्ट के रूप में नहीं देखा गया।

संसदीय चर्चा के बाद बढ़ी बहस

इस मुद्दे को और अधिक महत्व इसलिए मिला क्योंकि उस समय भारत में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चर्चा चल रही थी। विभिन्न संसदीय समितियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया था कि दुनिया के विभिन्न देशों की परीक्षा प्रणालियों का अध्ययन कर बेहतर व्यवस्थाओं से सीख ली जा सकती है। इसी पृष्ठभूमि में चीन के गाओकाओ मॉडल का भी उल्लेख हुआ था।

क्या गाओकाओ पूरी तरह विवादों से मुक्त है?

हालांकि चीन की परीक्षा व्यवस्था को अक्सर कड़े अनुशासन और व्यापक प्रशासनिक तैयारी के लिए जाना जाता है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि गाओकाओ पूरी तरह विवादों से मुक्त रही है।

वर्षों के दौरान चीन में भी नकल, प्रॉक्सी उम्मीदवारों, तकनीकी उपकरणों के दुरुपयोग और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े कई मामले सामने आते रहे हैं। अंतर यह है कि विभिन्न देशों में ऐसी घटनाओं की रिपोर्टिंग, जांच और सार्वजनिक चर्चा का स्वरूप अलग-अलग होता है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़ी परीक्षा प्रणाली में चुनौतियां मौजूद रहती हैं। महत्वपूर्ण यह है कि उन चुनौतियों का समाधान किस तरह किया जाता है और संस्थागत पारदर्शिता कितनी मजबूत होती है।

भारत के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?

NEET विवाद ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। भारत में हर वर्ष लाखों छात्र मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए इन परीक्षाओं पर निर्भर रहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, पारदर्शी जांच प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत बनाना समय की मांग है। साथ ही शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर व्यापक सुधारों पर सहमति बनाना भी आवश्यक है।

परीक्षा सुधार पर फोकस जरूरी

चीन की टिप्पणी से उत्पन्न राजनीतिक बहस से इतर, असली मुद्दा भारत की परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि मेहनत के आधार पर अवसर मिलें और परीक्षा प्रक्रिया पर उनका भरोसा कायम रहे।

आने वाले समय में परीक्षा सुधारों को लेकर उठाए जाने वाले कदम ही तय करेंगे कि भारत अपनी विशाल और जटिल परीक्षा व्यवस्था को किस तरह और अधिक मजबूत बना पाता है।

Asmita Sarkar

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