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NEET की जगह 12वीं के अंकों के आधार पर हो MBBS में प्रवेश, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने की मांग

NEET की जगह 12वीं के अंकों के आधार पर हो MBBS में प्रवेश, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने की मांग

NEET की जगह 12वीं के अंकों के आधार पर हो MBBS में प्रवेश, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने की मांग

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर लंबे समय से जारी बहस के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक बार फिर इस परीक्षा का विरोध किया है। नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में उन्होंने मेडिकल शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य का पक्ष मजबूती से रखा और सुझाव दिया कि एमबीबीएस, बीडीएस तथा आयुष पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर दिया जाए।

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि NEET जैसी एकल राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा ग्रामीण और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करती है। उनका तर्क है कि ऐसे छात्र अक्सर महंगी कोचिंग और संसाधनों तक पहुंच नहीं बना पाते, जिससे मेडिकल शिक्षा में अवसरों की समानता प्रभावित होती है।

राज्य कोटे की सीटों के लिए अलग व्यवस्था की मांग

बैठक के दौरान तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया कि राज्य कोटे के अंतर्गत आने वाली MBBS, BDS और AYUSH सीटों को भरने के लिए 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों को ही आधार बनाने की अनुमति दी जाए। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा तक अधिक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करना बताया गया।

तमिलनाडु लंबे समय से NEET का विरोध करता रहा है और राज्य सरकार का कहना है कि बोर्ड परीक्षा आधारित प्रवेश प्रणाली से विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।

पहले भी उठा चुके हैं NEET समाप्त करने की मांग

यह पहली बार नहीं है जब तमिलनाडु की ओर से NEET को लेकर सवाल उठाए गए हैं। राज्य में कई वर्षों से इस परीक्षा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों का तर्क रहा है कि मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा के प्रदर्शन को अधिक महत्व मिलना चाहिए।

हालांकि, NEET समर्थकों का मानना है कि देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक समान परीक्षा पारदर्शिता और समान मानदंड सुनिश्चित करती है। यही वजह है कि इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है।

युवाओं के लिए कौशल और रोजगार पर भी दिया जोर

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि रोजगार और कौशल विकास से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित युवा कौशल एवं रोजगार मिशन के तहत हर वर्ष लगभग पांच लाख युवाओं को स्टाइपेंड के साथ इंटर्नशिप और उद्योग आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले में उभरती तकनीकों पर केंद्रित स्किल सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इन केंद्रों में युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शिक्षा और रोजगार पर केंद्रित रही बैठक

नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक का मुख्य विषय “विकसित भारत 2047 के लिए समावेशी मानव विकास” था। बैठक में भविष्य के कौशल, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि NEET को लेकर तमिलनाडु की मांग एक बार फिर मेडिकल प्रवेश प्रणाली पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर सकती है। वहीं, कौशल विकास और नई तकनीकों में प्रशिक्षण से जुड़े प्रस्ताव युवाओं को भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

Asmita Sarkar

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