
भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के विशेषज्ञ प्रोफेसर देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षकों को उभरती तकनीकों का प्रशिक्षण देंगे। इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को नई तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि वे छात्रों को अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान कर सकें।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इसके लिए एक विशेष AICTE-QIP PG Certificate Programme शुरू करने की घोषणा की है। यह 18-क्रेडिट का छह महीने का हाइब्रिड कार्यक्रम होगा, जिसकी शुरुआत जुलाई 2026 सत्र से की जाएगी।
शिक्षकों को मिलेगा नई तकनीकों का प्रशिक्षण
AICTE के अध्यक्ष प्रोफेसर योगेश सिंह के अनुसार, इंजीनियरिंग शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू होने के बाद इंजीनियरिंग और तकनीकी पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव किए गए हैं। ऐसे में शिक्षकों का लगातार कौशल उन्नयन आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक विषयों का ज्ञान अब पर्याप्त नहीं है। शिक्षकों को उन तकनीकों की समझ भी होनी चाहिए जो उद्योगों और रोजगार बाजार की वर्तमान मांग का हिस्सा हैं। इसी उद्देश्य से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
IIT, IISc, NIT और IIIT करेंगे संचालन
यह कार्यक्रम देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों के सहयोग से संचालित किया जाएगा। इसमें भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान शामिल होंगे।
कार्यक्रम विशेष रूप से AICTE से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग और डिप्लोमा संस्थानों में कार्यरत नियमित और स्थायी शिक्षकों के लिए तैयार किया गया है। इच्छुक शिक्षक 5 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उद्योग की जरूरतों के अनुरूप होगी तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आज का उद्योग जगत तेजी से डिजिटल और तकनीक-आधारित हो रहा है। ऐसे में इंजीनियरिंग छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक समझ भी जरूरी है।
AICTE की सदस्य सचिव प्रोफेसर श्यामा रथ ने बताया कि इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में अब कई नई तकनीकों को शामिल किया जा चुका है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर-फिजिकल सिस्टम्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ड्रोन टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स, रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि छात्रों को वैश्विक रोजगार बाजार के लिए तैयार करने के लिए शिक्षकों का इन क्षेत्रों में दक्ष होना बेहद जरूरी है।
हाइब्रिड मोड में होगा प्रशिक्षण
छह महीने के इस कार्यक्रम को हाइब्रिड मोड में संचालित किया जाएगा। यानी शिक्षकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से प्रशिक्षण मिलेगा। इस दौरान उन्हें नई तकनीकों से जुड़े सिद्धांत, उद्योग में उनके उपयोग, शोध के अवसर और नवीनतम विकास की जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण का फोकस केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षण पद्धति और आधुनिक शिक्षा मॉडल पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि शिक्षक कक्षा में अधिक प्रभावी तरीके से पढ़ा सकें।
इंजीनियरिंग शिक्षा में सुधार की दिशा में अहम कदम
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बड़ी है, लेकिन सभी संस्थानों में शिक्षण गुणवत्ता एक समान नहीं है। ऐसे में शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की यह पहल इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
नई तकनीकों में प्रशिक्षित शिक्षक न केवल छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे पाएंगे, बल्कि उन्हें उद्योग की वास्तविक जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार कर सकेंगे।
भविष्य की तकनीकों पर रहेगा फोकस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, ऑटोमेशन, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में रोजगार और नवाचार के प्रमुख केंद्र बनने वाले हैं। ऐसे में AICTE का यह कार्यक्रम शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षा को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




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