
NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध और मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद करने के फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे परीक्षा में होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ “कामचलाऊ समाधान” और “जरूरत से ज्यादा सख्त प्रतिक्रिया” बताया है।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में IFF ने कहा कि किसी एक प्लेटफॉर्म पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय परीक्षा सुरक्षा से जुड़ी मूल समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। संगठन का मानना है कि ऐसे कदमों का असर लाखों सामान्य उपयोगकर्ताओं पर भी पड़ता है, जो टेलीग्राम का इस्तेमाल पढ़ाई, कारोबार और संचार जैसे वैध उद्देश्यों के लिए करते हैं।
यह विवाद उस समय सामने आया है जब राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई विशेष उपायों की जानकारी दी है। NTA की सिफारिश पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत भारत में टेलीग्राम की पहुंच को 22 जून 2026 तक सीमित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म को 30 जून तक भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए मैसेज एडिटिंग फीचर निष्क्रिय करने का निर्देश भी दिया गया है।
सरकार और NTA का क्या है तर्क?
NTA का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ संगठित नेटवर्क और फर्जी चैनल टेलीग्राम का इस्तेमाल कथित प्रश्नपत्र लीक, भ्रामक दावों और छात्रों से धोखाधड़ी के लिए कर रहे थे। एजेंसी के अनुसार, केवल व्यक्तिगत चैनलों या समूहों पर कार्रवाई पर्याप्त साबित नहीं हुई, जिसके बाद यह अस्थायी और समयबद्ध कदम उठाया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, मैसेज एडिटिंग फीचर को लेकर भी चिंता जताई गई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस सुविधा का दुरुपयोग कर कुछ मामलों में संदेशों को बाद में बदलकर प्रश्नपत्र लीक से जुड़े भ्रामक दावे पेश किए गए, जिससे भ्रम और अविश्वास की स्थिति पैदा हुई।
डिजिटल अधिकार बनाम परीक्षा सुरक्षा
IFF का तर्क है कि परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए ऐसे उपाय अपनाए जाने चाहिए जो आनुपातिक और लक्षित हों। संगठन का कहना है कि पूरे प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करने से उन लाखों लोगों को भी असुविधा होती है जिनका परीक्षा से कोई संबंध नहीं है।
दूसरी ओर, सरकार और NTA का कहना है कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है और केवल NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा की अवधि तक लागू रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना और छात्रों को फर्जी दावों तथा साइबर धोखाधड़ी से बचाना है।
परीक्षा सुरक्षा पर जारी है बहस
NEET-UG 2026 से जुड़े घटनाक्रमों के बीच यह मामला केवल परीक्षा सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के नियमन, ऑनलाइन अभिव्यक्ति और उपयोगकर्ताओं के अधिकारों पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा सुरक्षा को कितना प्रभावी बनाता है और क्या भविष्य में ऐसी परिस्थितियों के लिए अधिक संतुलित समाधान सामने आते हैं।




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