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छात्र-नेतृत्व वाली रिसर्च परियोजना ‘दृष्टि न्यूज़’ भारतीय मीडिया कवरेज के पैटर्न का कर रही विश्लेषण

छात्र-नेतृत्व वाली रिसर्च परियोजना ‘दृष्टि न्यूज़’ भारतीय मीडिया कवरेज के पैटर्न का कर रही विश्लेषण

छात्र-नेतृत्व वाली रिसर्च परियोजना ‘दृष्टि न्यूज़’ भारतीय मीडिया कवरेज के पैटर्न का कर रही विश्लेषण

भारतीय मीडिया संस्थानों में समाचार कवरेज के पैटर्न को समझने के लिए एक छात्र-नेतृत्व वाली शोध परियोजना कंप्यूटेशनल तरीकों का उपयोग कर रही है। ‘दृष्टि न्यूज़’ (Drishti News) नामक इस परियोजना को निर्वाण मल्होत्रा ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य यह अध्ययन करना है कि अलग-अलग समाचार संस्थान एक ही घटना को किस तरह कवर करते हैं और डेटा-आधारित विश्लेषण के माध्यम से कवरेज में मौजूद विभिन्नताओं की पहचान करना है।

यह पहल पत्रकारिता, डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते मेल को भी दर्शाती है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो उच्च शिक्षा और शोध समुदायों के बीच लगातार अधिक रुचि का विषय बन रहे हैं।

फिलहाल यह प्लेटफॉर्म भारत के 30 समाचार संगठनों की सामग्री को ट्रैक करता है। इनमें राष्ट्रीय समाचार पत्र, डिजिटल प्रकाशन, टेलीविजन नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियां शामिल हैं। ये संस्थान विभिन्न संपादकीय दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

परियोजना का उद्देश्य किसी समाचार संस्थान के संपादकीय रुख का मूल्यांकन करना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि मीडिया इकोसिस्टम में खबरें किस प्रकार प्रसारित होती हैं और क्या कुछ घटनाओं को अन्य घटनाओं की तुलना में अलग स्तर का ध्यान मिलता है।

इसके लिए समाचार लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आरएसएस (RSS) फीड्स के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं और समय-समय पर अपडेट किए जाते हैं, जिससे चल रही समाचार कवरेज की तस्वीर तैयार होती है। सक्रिय समाचार चक्र के दौरान यह प्रणाली तीन से सात दिनों की अवधि में सैकड़ों लेखों का विश्लेषण कर सकती है।

इस परियोजना के केंद्र में नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) आधारित एक फ्रेमवर्क है, जो एक ही घटना से संबंधित रिपोर्टों को एक साथ समूहित करता है। सेंटेंस-एम्बेडिंग मॉडल की मदद से लेखों की हेडलाइन और सारांश को अर्थ-आधारित डिजिटल प्रतिनिधित्व में बदला जाता है। इससे प्रणाली अलग-अलग शब्दों में लिखी गई समान खबरों के बीच भी समानता पहचान सकती है। इसके बाद संबंधित लेखों को स्वचालित प्रक्रिया के जरिए अलग-अलग समूहों में व्यवस्थित किया जाता है।

जब घटनाओं को समूहों में वर्गीकृत कर लिया जाता है, तब प्लेटफॉर्म विभिन्न श्रेणियों के प्रकाशनों में कवरेज के वितरण को मापता है। यदि किसी विशेष खबर को एक श्रेणी के समाचार संस्थानों द्वारा अन्य श्रेणियों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक महत्व दिया जाता है, तो प्रणाली उसे आगे के अध्ययन के लिए चिह्नित करती है।

परियोजना के दस्तावेजों के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य कवरेज के केंद्रीकरण या वितरण के पैटर्न को समझना है, न कि किसी समाचार की निष्पक्षता, पक्षपात या सटीकता पर निर्णय देना।

परियोजना अपनी कुछ पद्धतिगत सीमाओं को भी स्वीकार करती है। उदाहरण के लिए, आरएसएस फीड किसी प्रकाशन की पूरी सामग्री का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। इसी तरह, स्वचालित क्लस्टरिंग प्रणाली कभी-कभी समान शब्दावली वाली लेकिन असंबंधित खबरों को एक ही समूह में रख सकती है। समाचार संस्थानों को व्यापक संपादकीय श्रेणियों में वर्गीकृत करना भी केवल विश्लेषणात्मक उद्देश्य के लिए है, न कि कोई अंतिम निष्कर्ष।

मीडिया अध्ययन के क्षेत्र में काम कर रहे शोधकर्ता और छात्र अब सूचना के प्रवाह, दर्शकों के व्यवहार और समाचार उत्पादन को समझने के लिए तेजी से कंप्यूटेशनल तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। ‘दृष्टि न्यूज़’ जैसी परियोजनाएं दिखाती हैं कि मशीन लर्निंग तकनीकों का इस्तेमाल उन सवालों के अध्ययन में भी किया जा सकता है, जिन्हें परंपरागत रूप से गुणात्मक मीडिया शोध के माध्यम से समझा जाता रहा है।

भविष्य में इस प्लेटफॉर्म को और अधिक उन्नत बनाने की योजना है। प्रस्तावित सुधारों में समाचार लेखों की प्रस्तुति शैली (फ्रेमिंग) में अंतर का अध्ययन, समय के साथ कवरेज में होने वाले बदलावों का विश्लेषण और विशिष्ट घटनाओं को ट्रैक करने के लिए बेहतर सर्च सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्रोतों की विश्वसनीयता का मूल्यांकन करने और मीडिया के ध्यान में आने वाले महत्वपूर्ण बदलावों के लिए स्वचालित अलर्ट विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।

पत्रकारिता और डेटा साइंस के बीच बढ़ते सहयोग के दौर में इस तरह की पहल छात्रों को वास्तविक सामाजिक और संचार संबंधी चुनौतियों पर अपनी तकनीकी क्षमताओं का उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं। साथ ही, ये परियोजनाएं यह भी दर्शाती हैं कि उभरती तकनीकें आधुनिक मीडिया परिवेश में सूचना के निर्माण, वितरण और उपभोग को समझने के लिए अकादमिक शोध को किस प्रकार नई दिशा दे सकती हैं।

Asmita Sarkar

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