
कक्षा 6 की कन्नड़ भाषा की R3 पाठ्यपुस्तक को लेकर हाल के दिनों में मीडिया और सोशल मीडिया पर उठी चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। परिषद ने कहा है कि पुस्तक के नामकरण और उसमें शामिल खानपान संबंधी सामग्री को लेकर जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
एनसीईआरटी के अनुसार, पाठ्यपुस्तकों को तैयार करते समय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के सिद्धांतों का पालन किया गया है। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, स्थानीय संदर्भों और विविधता से जोड़ना है।
नदियों के नाम पर रखे गए हैं भाषा की पुस्तकों के नाम
परिषद ने स्पष्ट किया कि R3 श्रृंखला की भाषा पुस्तकों के नाम भारत की प्रमुख नदियों से प्रेरित हैं। इसी क्रम में कन्नड़ भाषा की पुस्तक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है, जो कर्नाटक की महत्वपूर्ण नदियों में से एक कृष्णा नदी से जुड़ा है।
एनसीईआरटी ने बताया कि अन्य भाषाओं की पुस्तकों का नामकरण भी इसी अवधारणा पर आधारित है। हिंदी की पुस्तक का नाम ‘गंगा’, अंग्रेजी की पुस्तक का नाम ‘कावेरी’ और उर्दू की पुस्तक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। परिषद का कहना है कि यह पहल विद्यार्थियों को उनकी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई है।
संतुलित आहार पर आधारित है अध्याय
पाठ्यपुस्तक में खानपान से संबंधित सामग्री को लेकर उठे सवालों पर एनसीईआरटी ने कहा कि संबंधित अध्याय का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक करना है।
परिषद के अनुसार, कक्षा 6 की पुस्तक के ‘Health is Wealth’ अध्याय में शुरुआत से ही यह बताया गया है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और स्वच्छता आवश्यक हैं। अध्याय में विद्यार्थियों को विभिन्न खाद्य समूहों और उनके पोषण संबंधी महत्व के बारे में जानकारी दी गई है।
शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन का उल्लेख
एनसीईआरटी ने यह भी स्पष्ट किया कि पुस्तक में केवल किसी एक प्रकार के भोजन को प्राथमिकता नहीं दी गई है। अध्याय में दिए गए चित्रों और उदाहरणों में शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों को शामिल किया गया है।
इसके अलावा छात्रों को भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन से परिचित कराने का प्रयास किया गया है, ताकि वे देश की खाद्य विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को समझ सकें।
किसी विशेष खानपान पद्धति का समर्थन या विरोध नहीं
परिषद ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाठ्यपुस्तक में कहीं भी शाकाहार को बढ़ावा देने या मांसाहारी भोजन का विरोध करने जैसी कोई बात नहीं कही गई है। अध्याय का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य, पोषण और संतुलित आहार की अवधारणा को समझाना है।
एनसीईआरटी के अनुसार, गतिविधियों, चित्रों और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि शरीर के समुचित विकास के लिए विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर भोजन जरूरी है।
सुझावों का स्वागत करेगी NCERT
परिषद ने कहा कि वह गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही पाठ्यपुस्तकों को और बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों, अभिभावकों, शिक्षा विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से मिलने वाले रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है।
एनसीईआरटी का कहना है कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार की जा रही पुस्तकों का उद्देश्य केवल विषय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक विविधता से भी परिचित कराना है।




Add comment