
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया और विभिन्न मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की जिस पुस्तक को एनसीईआरटी की नई आधिकारिक पुस्तक बताकर साझा किया जा रहा है, वह अधिकृत संस्करण नहीं है। ऐसे में छात्रों से अपील की गई है कि वे किसी भी वायरल अध्ययन सामग्री पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।
एनसीईआरटी का कहना है कि आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले कोई भी नई पाठ्यपुस्तक न तो प्रकाशित की जाती है और न ही सार्वजनिक रूप से जारी की जाती है। इसलिए सोशल मीडिया पर उपलब्ध किसी भी तथाकथित नई या अप्रकाशित एनसीईआरटी पुस्तक को प्रमाणिक नहीं माना जाना चाहिए।
फर्जी या अधूरी हो सकती है वायरल सामग्री
परिषद ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन प्रसारित की जा रही ऐसी सामग्री में बदलाव किया गया हो सकता है, वह अधूरी हो सकती है या पूरी तरह से फर्जी भी हो सकती है। यदि छात्र ऐसी पुस्तकों या नोट्स के आधार पर पढ़ाई करते हैं, तो उन्हें गलत जानकारी मिल सकती है, जिसका सीधा असर उनकी परीक्षा की तैयारी और परिणामों पर पड़ सकता है।
एनसीईआरटी ने कहा कि सही और प्रमाणिक अध्ययन सामग्री का उपयोग ही छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर परीक्षा तैयारी में मदद कर सकता है।
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सतर्क रहने की अपील
परिषद ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से अनुरोध किया है कि किसी भी पुस्तक, पीडीएफ, नोट्स या डिजिटल अध्ययन सामग्री का उपयोग करने से पहले उसकी प्रामाणिकता अवश्य जांच लें। केवल एनसीईआरटी के अधिकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री पर ही भरोसा करना चाहिए।
विशेष रूप से परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही सामग्री के बजाय आधिकारिक स्रोतों से उपलब्ध पुस्तकों का ही उपयोग करें।
केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से डाउनलोड करें किताबें
एनसीईआरटी ने याद दिलाया कि उसकी सभी पाठ्यपुस्तकें और शैक्षणिक सामग्री कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत संरक्षित हैं। बिना अनुमति के इनकी कॉपी करना, प्रिंट निकालना, बिक्री करना, वितरण करना या ऑनलाइन साझा करना कानून का उल्लंघन है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
परिषद ने बताया कि उसकी सभी आधिकारिक डिजिटल पुस्तकें एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट और ई-पाठशाला (ePathshala) पोर्टल एवं मोबाइल ऐप पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। छात्रों को केवल इन्हीं माध्यमों से पुस्तकें डाउनलोड करने की सलाह दी गई है।
फर्जी सामग्री फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
एनसीईआरटी ने कहा कि वह इंटरनेट और सोशल मीडिया पर पायरेटेड तथा फर्जी शैक्षणिक सामग्री फैलाने वालों पर लगातार नजर रख रही है और ऐसे मामलों में आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
परिषद ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी को कोई संदिग्ध पुस्तक, वेबसाइट, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया चैनल या डाउनलोड लिंक दिखाई देता है, तो इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से एनसीईआरटी को दी जा सकती है, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
छात्रों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों पर अध्ययन सामग्री तेजी से साझा होने के दौर में छात्रों को केवल प्रमाणिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए। गलत या अधूरी जानकारी न केवल परीक्षा की तैयारी को प्रभावित कर सकती है, बल्कि विषय की समझ भी कमजोर कर सकती है। इसलिए किसी भी नई एनसीईआरटी पुस्तक या अध्ययन सामग्री को डाउनलोड करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना सबसे सुरक्षित और सही तरीका है।




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