
कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से संविधान की प्रस्तावना (Preamble) हटाए जाने की खबरों के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस तरह के दावे भ्रामक हैं। परिषद के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि संविधान की प्रस्तावना को पाठ्यक्रम से नहीं हटाया गया है, बल्कि नए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे (NCF) के तहत विषयों का पुनर्गठन किया गया है।
एनसीईआरटी के अनुसार, नई शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप पाठ्यक्रम को इस तरह व्यवस्थित किया गया है कि अलग-अलग विषयों और अवधारणाओं को छात्रों की उम्र और सीखने की क्षमता के अनुसार विभिन्न कक्षाओं में पढ़ाया जा सके। इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी महत्वपूर्ण विषय या संवैधानिक मूल्य को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
संविधान की प्रस्तावना अब भी नई पुस्तकों का हिस्सा
परिषद ने स्पष्ट किया कि संविधान की प्रस्तावना अब भी सभी नई एनसीईआरटी पुस्तकों के शुरुआती पन्नों में प्रकाशित की जा रही है। इसमें नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तकें भी शामिल हैं। इसके अलावा, कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में भी संविधान की प्रस्तावना और उससे जुड़े विषय पहले की तरह शामिल रहेंगे।
एनसीईआरटी का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि कक्षा 9 की नई पुस्तक से प्रस्तावना हटा दी गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि पाठ्यक्रम का केवल पुनर्संगठन किया गया है।
कक्षा 6 से ही पढ़ाए जाते हैं संवैधानिक मूल्य
परिषद के अनुसार, छात्रों को संविधान से जुड़े मूलभूत सिद्धांतों और संवैधानिक मूल्यों से परिचित कराने की शुरुआत कक्षा 6 से ही हो जाती है। धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और समाजवाद जैसे विषयों को कक्षा 6 से 8 के दौरान क्रमबद्ध तरीके से पढ़ाया जाता है। विशेष रूप से कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इन मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
इसके बाद कक्षा 10 में संविधान की प्रस्तावना और संवैधानिक मूल्यों का अधिक व्यापक और गहन अध्ययन कराया जाता है, ताकि छात्र भारतीय संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकें।
एनसीईआरटी ने क्या कहा?
एनसीईआरटी का कहना है कि नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के तहत पाठ्यक्रम को अधिक सुव्यवस्थित और चरणबद्ध बनाया गया है। विषयों को अलग-अलग कक्षाओं में इस तरह विभाजित किया गया है कि विद्यार्थियों की समझ के स्तर के अनुसार उन्हें पढ़ाया जा सके। इसलिए यह कहना गलत होगा कि संविधान की प्रस्तावना या उससे जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
परिषद ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे पाठ्यक्रम से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और भ्रामक दावों से बचें।




Add comment