
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के बीच केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (Central Sanskrit University) ने तकनीकी शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को साथ लेकर एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपने नासिक परिसर में बीटेक (BTech) इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।
यह कोर्स छात्रों को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाने के साथ-साथ संस्कृत, भारतीय भाषाओं और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण में AI के उपयोग की व्यावहारिक समझ भी देगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे युवाओं को भविष्य की तकनीकी नौकरियों के लिए तैयार करने के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
AICTE से मिली मंजूरी
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस बीटेक कार्यक्रम को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की मंजूरी मिल चुकी है। यह किसी संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए जा रहे शुरुआती इंजीनियरिंग कार्यक्रमों में शामिल है और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
AI की मदद से होगा प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण
भारत में संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय भाषाओं की लाखों पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अभी भी डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध नहीं है।
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पुरानी पांडुलिपियों और दस्तावेजों को कैसे पढ़ा जाए, उनका अनुवाद कैसे किया जाए, डिजिटल संग्रह कैसे तैयार किया जाए और उनमें मौजूद महत्वपूर्ण जानकारी को सुरक्षित कैसे रखा जाए। इससे भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और शोध कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
66 सीटों पर मिलेगा दाखिला
इस बीटेक कार्यक्रम में कुल 66 सीटें होंगी। इनमें 60 नियमित सीटें और 6 अतिरिक्त सीटें शामिल हैं।
पाठ्यक्रम को उद्योग की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, पायथन प्रोग्रामिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, डीप लर्निंग और सांख्यिकी जैसे प्रमुख विषय पढ़ाए जाएंगे।
इसके अलावा नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), स्पीच रिकग्निशन, संवादात्मक AI (Conversational AI), कम्प्यूटेशनल भाषाविज्ञान और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी आधुनिक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा से भी होगा जुड़ाव
इस कोर्स की खास बात यह है कि इसमें AI को केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं रखा गया है। पाठ्यक्रम में आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु और न्यायशास्त्र जैसे भारतीय ज्ञान क्षेत्रों के साथ AI के उपयोग और संभावनाओं पर भी अध्ययन कराया जाएगा।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करने वाले विशेषज्ञ तैयार करना है, जो भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध करा सकें।
करियर के लिहाज से भी बेहतर अवसर
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस से जुड़े विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। आईटी कंपनियों, रिसर्च संस्थानों, स्टार्टअप्स, हेल्थकेयर, फिनटेक, भाषा प्रौद्योगिकी और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
ऐसे में यह नया बीटेक कार्यक्रम छात्रों को आधुनिक तकनीकी कौशल के साथ एक विशिष्ट विशेषज्ञता भी देगा, जहां वे भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में AI का उपयोग करना सीख सकेंगे।
शिक्षा और परंपरा का नया मॉडल
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में अन्य उच्च शिक्षण संस्थान भी तकनीकी शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने वाले ऐसे कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं।
यह कार्यक्रम उन छात्रों के लिए खास अवसर लेकर आया है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में करियर बनाना चाहते हैं और साथ ही भारतीय भाषाओं, संस्कृति तथा प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पहचान दिलाने में योगदान देना चाहते हैं।




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