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MP नर्सिंग स्कैम की जांच कर रहे CBI अधिकारी ही ले रहे थे 10 लाख की रिश्वत

एक कहावत है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो ऐसे में लोगों की स्थिति आसानी से समझी जा सकती है। कुछ ऐसा ही मध्य प्रदेश (MP) में नर्सिंग महाविद्यालय घोटाले की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) के अधिकारियों ने सरअंजाम दिया। उन्हें जिन कॉलेजों के खिलाफ जांच का जिम्मा दिया गया, वे उन्हीं कॉलेजों से वसूली में लग गए। CBI के अधिकारी जांच के बाद कॉलेज के मुताबिक रिपोर्ट देने के लिए हर कॉलेज से दो से 10 लाख रुपए की रिश्वत ले रहे थे। इसकी परवाह न करते हुए कि यह न सिर्फ उनके संगठन के मूल मूल्यों के विपरीत है बल्कि लाखों लाख आम लोगों के साथ भी विश्वासघात है। बहरहाल, राहत की बात है कि इस पूरे खेल का खुलासा भी CBI ने ही किया और मामले में अपने डीएसपी समेत 22 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए एफआईआर दर्ज करने के साथ एक इंस्पेक्टर को बर्खास्त भी कर दिया है।

दरअसल, नर्सिंग कॉलेज घोटाले की जांच एमपी हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी। जांच के लिए उसने सीबीआई को टीम गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सीबीआई ने जांच के लिए अलग-अलग टीम बनाई थी और घोटाले की जांच शुरू की थी। इस टीम में उनके अधिकारियों के अलावा भारतीय नर्सिंग परिषद द्वारा नामित कर्मी और राज्य के पटवारी भी शामिल थे। एक तरफ इनकी जांच चल रही थी, दूसरी तरफ CBI को यह सूचना मिल रही थी कि जांच में लगे उसके अधिकारी भारी-भरकम रिश्वत लेकर इन अपात्र संस्थानों को अनुकूल रिपोर्ट प्रदान कर रहे हैं। हर नर्सिंग संस्थान से दो लाख से 10 लाख रुपये तक की रिश्वत वसूली जा रही है और यह राशि सीबीआई अधिकारियों एवं बिचौलियों के बीच बांटी जा रही है। 

दरअसल, वसूली के लिए मामले की जांच कर रहे सीबीआई अफसरों ने एक गैंग बनाया हुआ था। इसमें सीबीआई के डीएसपी से लेकर इंस्पेक्टर तक शामिल थे। साथ ही बिचौलिए का काम करने के लिए नीचे के लोग और नर्सिंग ऑफिसर थे। सभी मिलकर उगाही रैकेट को चला रहे थे। सीबीआई ने इन आरोपों का सत्यापन करने की पहल की और गोपनीय ढंग से अधिकारियों पर नजर रखी गयी। पूरे मामले की जांच दिल्ली से की जा रही थी। जब सब कुछ शीशे की तरह साफ़ हो गया और शिकायतें सही पाई गयीं, तब अंततः 22 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने, गिरफ्तारी और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की गयी। 

इस मामले में सीबीआई के पुलिस उपाधीक्षक आशीष प्रसाद, निरीक्षक राहुल राज एवं सुशील कुमार मजोका तथा ऋषिकांत असाथे समेत 22 लोगों क आरोपी बनाया गया है। राहुल राज और सुशील कुमार मजोका सीबीआई में मध्य प्रदेश पुलिस से संबद्ध थे। राज समेत दो इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें से एक को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस वसूली रैकेट का मास्टर माइंड सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज था। उसके पास 60 कॉलेजों की जांच का जिम्मा था। छापेमारी के दौरान उसके घर से सोने के बिस्किट भी मिले हैं। गिरफ्तारी के बाद राहुल राज को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।

CBI की FIR में नर्सिंग पाठ्यक्रम चला रहे आठ महाविद्यालयों के निदेशकों, अध्यक्षों, कर्मियों एवं बिचौलियों के भी नाम हैं जिन्होंने निरीक्षण दलों की ओर से रिश्वत ली थी और उन तक रकम पहुंचाई थी। सीबीआई निरीक्षण दल में शामिल हर नर्सिंग अधिकारी को 25000-50000 रुपये तथा हर पटवारी को 5000-20000 रुपये बतौर रिश्वत दिये गये। प्राथमिकी में कहा गया है, “नर्सिंग अधिकारी, विशेषज्ञ और पटवारी के लिए रिश्वत की राशि इन व्यक्तियों (बिचौलियों) ने निरीक्षण के दिन ही या उसके अगले दिन उन तक पहुंचा दी।” प्राथमिकी में सीबीआई ने ‘मलय कॉलेज ऑफ नर्सिंग’ के अध्यक्ष अनिल भाष्करण तथा ‘आर डी मेमोरियल ऑफ नर्सिंग एंड फार्मेसी’ के अध्यक्ष रवि भदोरिया को नामजद किया है। 

Asmita Sarkar

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