
कर्नाटक के मांड्या जिले में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला। बड़ी संख्या में छात्रों ने डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय के पास विरोध प्रदर्शन करते हुए कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मेडिकल प्रवेश के लिए NEET की जगह राज्य सरकार की कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।
यह प्रदर्शन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) की ओर से आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और ऐसी स्थिति में मौजूदा व्यवस्था पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।
‘हमें NEET नहीं, CET चाहिए’ के लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “हमें NEET नहीं, CET चाहिए” के नारे लगाए। उनका आरोप था कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों से ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।
छात्रों ने यह भी मांग की कि मेडिकल और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षा के आधार पर चयन करने की अनुमति दी जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाई जा सकती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। उनका कहना था कि परीक्षा से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक के मामलों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को सुरक्षित ढंग से आयोजित नहीं किया जा सकता, तो इससे छात्रों का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करने और छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की।
कई छात्र संगठनों और कांग्रेस नेताओं ने लिया हिस्सा
विरोध प्रदर्शन में NSUI के जिला अध्यक्ष मंजूनाथ, मांड्या जिला कांग्रेस कमेटी (MDCC) के कार्यकारी अध्यक्ष चिदंबर एमएस, राज्य उपाध्यक्ष रफीक अली, सथनूर महेश समेत बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
NEET-UG 2026 विवाद क्या है?
NEET-UG 2026 परीक्षा मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद कई राज्यों से कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को दोबारा परीक्षा कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद 21 जून 2026 को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा NEET-UG परीक्षा पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की गई। हालांकि, कथित पेपर लीक और उससे जुड़े मामलों की जांच अभी भी जारी है।
संसदीय समिति ने दिया कई चरणों में परीक्षा कराने का सुझाव
इस बीच, शिक्षा पर संसद की स्थायी समिति ने भी NEET-UG परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। समिति के सदस्यों ने सुझाव दिया कि देशभर में एक ही दिन परीक्षा आयोजित करने के बजाय इसे कई चरणों में कराया जा सकता है। उनका मानना है कि इससे परीक्षा आयोजन का लॉजिस्टिक दबाव कम होगा और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
समिति के अध्यक्ष मुकुल वासनिक और अन्य सदस्यों ने 21 जून को आयोजित दोबारा परीक्षा की व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे सुरक्षित और बेहतर तरीके से आयोजित परीक्षा बताया। साथ ही उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
छात्रों में भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती
NEET-UG 2026 से जुड़े विवादों ने देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पारदर्शिता, सुरक्षा और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। आने वाले समय में केंद्र सरकार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और संबंधित संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना होगी।




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