
देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं जैसे NEET और JEE के एडमिशन सिस्टम में बड़े बदलाव की संभावना बन रही है। केंद्र सरकार ऐसे मॉडल पर विचार कर रही है, जिसमें मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बोर्ड परीक्षा के अंकों को भी 50 प्रतिशत तक वेटेज दिया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य केवल एक प्रवेश परीक्षा पर निर्भरता कम करना और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को संतुलित करना है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति विभिन्न सुधारों पर विचार कर रही है और उसकी सिफारिशों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
क्यों हो रहा है इस बदलाव पर विचार?
पिछले कुछ वर्षों में कई राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन से जुड़े विवादों के कारण चर्चा में रही हैं। खासकर NEET-UG 2024 और उसके बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों ने पूरे प्रवेश तंत्र की विश्वसनीयता पर बहस तेज कर दी। इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और छात्र हितैषी बनाने के लिए सुधारों की प्रक्रिया शुरू की।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक परीक्षा का परिणाम ही छात्र के पूरे करियर का आधार न बने। यदि बोर्ड परीक्षा और प्रवेश परीक्षा दोनों के अंकों को महत्व दिया जाता है, तो छात्रों का मूल्यांकन अधिक संतुलित तरीके से किया जा सकेगा।
सिर्फ बोर्ड वेटेज ही नहीं, कई और बदलावों पर भी मंथन
विशेषज्ञ समिति केवल बोर्ड परीक्षा को वेटेज देने के प्रस्ताव तक सीमित नहीं है। कई अन्य महत्वपूर्ण सुझावों पर भी चर्चा चल रही है। इनमें प्रवेश परीक्षाओं को स्कूल के पाठ्यक्रम से बेहतर तरीके से जोड़ना शामिल है, ताकि छात्रों की महंगी कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम हो सके।
इसके अलावा, छात्रों को एक से अधिक बार परीक्षा देने का अवसर देने और भविष्य में चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर आधारित एडैप्टिव (Adaptive) ऑन-डिमांड टेस्टिंग सिस्टम लागू करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इस व्यवस्था में छात्र निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा दे सकेंगे और प्रश्नों का स्तर उनके प्रदर्शन के आधार पर तय होगा।
अभी क्या है एडमिशन का नियम?
वर्तमान व्यवस्था में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश NEET-UG और इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश मुख्य रूप से JEE Main तथा JEE Advanced के स्कोर के आधार पर होता है। बोर्ड परीक्षा के अंक पात्रता (Eligibility) तय करने के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में मेरिट सूची प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।
यदि भविष्य में बोर्ड परीक्षा को 50 प्रतिशत वेटेज देने का प्रस्ताव लागू होता है, तो एडमिशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, इसकी रूपरेखा और लागू होने की समय-सीमा पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
शिक्षा मंत्रालय की समिति क्या कर रही है?
शिक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष नौ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। समिति का मुख्य उद्देश्य देश की प्रवेश परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करना और ऐसे सुधार सुझाना है, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सके।
समिति को छात्रों की कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता, तथाकथित “डमी स्कूलों” के बढ़ते चलन, प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता और स्कूल शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट अगले कुछ सप्ताह में सरकार को सौंप सकती है। इसके बाद सरकार सिफारिशों की समीक्षा करेगी और आवश्यक होने पर नई प्रवेश नीति या परीक्षा सुधारों पर निर्णय लिया जा सकता है।
छात्रों के लिए क्या मायने रखता है यह प्रस्ताव?
यदि बोर्ड परीक्षा को प्रवेश प्रक्रिया में अधिक महत्व मिलता है, तो छात्रों को पूरे शैक्षणिक वर्ष के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे केवल एक दिन की प्रवेश परीक्षा पर निर्भरता कम हो सकती है और स्कूल शिक्षा की भूमिका भी मजबूत होगी।
हालांकि, अभी यह केवल विचाराधीन प्रस्ताव है। इसलिए NEET, JEE या अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को फिलहाल मौजूदा नियमों के अनुसार ही अपनी तैयारी जारी रखनी चाहिए। किसी भी बदलाव की स्थिति में शिक्षा मंत्रालय और संबंधित परीक्षा एजेंसियां आधिकारिक अधिसूचना जारी करेंगी।




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