
देश के प्रमुख प्रबंधन संस्थानों में शामिल भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) नागपुर ने आने वाले पांच वर्षों के लिए अपनी विकास योजना का खाका तैयार किया है। संस्थान अब केवल प्रबंधन शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक साझेदारी और नए शैक्षणिक कार्यक्रमों के जरिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
IIM नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराया मेत्री, जिन्हें हाल ही में दूसरे कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया है, ने संस्थान का रणनीतिक रोडमैप 2026-31 पेश किया। इस रोडमैप में नए कैंपस की स्थापना, उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन जैसे कई लक्ष्य शामिल हैं।
पुणे में बनेगा 70 एकड़ का नया कैंपस
इस विस्तार योजना का सबसे बड़ा हिस्सा पुणे के मोशी क्षेत्र में नया कैंपस स्थापित करना है। महाराष्ट्र सरकार ने IIM नागपुर को 70 एकड़ भूमि प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये की लीज पर आवंटित की है। रिपोर्टों के अनुसार, इस जमीन का बाजार मूल्य 180 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है।
संस्थान का कहना है कि यह किसी भी IIM का सबसे बड़े सेकेंडरी कैंपस में से एक होगा। नए परिसर को भविष्य की उद्योग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जाएगा।
AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री 4.0 पर रहेगा जोर
नए कैंपस में ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है, जो बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप हों। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंडस्ट्री 4.0, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आईटी मैनेजमेंट और मैन्युफैक्चरिंग मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा।
पुणे देश के प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों में शामिल है। ऐसे में संस्थान का मानना है कि यहां उद्योगों के साथ बेहतर सहयोग और छात्रों को अधिक व्यावहारिक अवसर मिल सकेंगे।
BBA-MBA और BTech-MBA जैसे नए प्रोग्राम पर विचार
IIM नागपुर भविष्य में छात्रों के लिए नए इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू करने की भी तैयारी कर रहा है। संस्थान पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड BBA-MBA कार्यक्रम शुरू करने की संभावना पर काम कर रहा है।
इसके अलावा, प्रमुख भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के सहयोग से पांच वर्षीय BTech-MBA प्रोग्राम शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इन कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले आवश्यक मंजूरियां और शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
यदि ये कोर्स शुरू होते हैं, तो छात्रों को तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा का संयुक्त लाभ मिलेगा, जिससे रोजगार और नेतृत्व के नए अवसर खुल सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का होगा विस्तार
IIM नागपुर अपनी वैश्विक उपस्थिति भी मजबूत करना चाहता है। वर्तमान में संस्थान फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ लिली के साथ छात्र विनिमय (Student Exchange) कार्यक्रम संचालित कर रहा है।
अब अगले पांच वर्षों में दुनिया की 20 प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक साझेदारी स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन साझेदारियों के माध्यम से छात्र विनिमय, संयुक्त शोध परियोजनाएं, ड्यूल डिग्री कार्यक्रम और फैकल्टी एक्सचेंज जैसी पहल को बढ़ावा दिया जाएगा।
वैश्विक रैंकिंग में जगह बनाने का लक्ष्य
संस्थान ने अपने लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किए हैं। IIM नागपुर आने वाले वर्षों में दुनिया के शीर्ष 100 बिजनेस स्कूलों में स्थान बनाने और एशिया के शीर्ष 10 प्रबंधन संस्थानों में शामिल होने का प्रयास करेगा।
इसके साथ ही, संस्थान एग्जीक्यूटिव एजुकेशन के क्षेत्र में भारत के शीर्ष तीन संस्थानों में जगह बनाने की दिशा में भी काम करेगा। इसके लिए उद्योगों के साथ सहयोग, रिसर्च, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और आधुनिक पाठ्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
छात्रों के लिए क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि IIM नागपुर की यह विस्तार योजना छात्रों के लिए नए अवसर लेकर आ सकती है। नए कैंपस, तकनीक आधारित पाठ्यक्रम, उद्योगों के साथ मजबूत जुड़ाव और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और बेहतर करियर विकल्प मिलने की संभावना बढ़ेगी।
अगर प्रस्तावित नए कोर्स और वैश्विक साझेदारियां तय समय पर शुरू होती हैं, तो IIM नागपुर आने वाले वर्षों में देश के तेजी से उभरते प्रबंधन संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।




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