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Rapid rise of private universities in India; 149% increase in 10 years—major revelation in AISHE report

भारत में तेजी से बढ़ रहे निजी विश्वविद्यालय, 10 साल में 149% का इजाफा; AISHE रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Rapid rise of private universities in India; 149% increase in 10 years—major revelation in AISHE report

भारत में उच्च शिक्षा का परिदृश्य पिछले एक दशक में तेजी से बदला है। विश्वविद्यालयों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव निजी विश्वविद्यालयों के विस्तार के रूप में सामने आया है। शिक्षा मंत्रालय के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 2013-14 से 2023-24 के बीच देश में 550 से अधिक नए विश्वविद्यालय जुड़े, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी निजी विश्वविद्यालयों की रही। हालांकि, छात्र नामांकन के मामले में सरकारी विश्वविद्यालय अब भी सबसे आगे हैं।

भारत में 10 साल में 77% बढ़े विश्वविद्यालय, निजी संस्थानों का सबसे तेज विस्तार

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पिछले दस वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शिक्षा मंत्रालय के AISHE 2023-24 के अनुसार, वर्ष 2013-14 में भारत में कुल 723 विश्वविद्यालय थे, जिनकी संख्या 2023-24 तक बढ़कर 1,279 हो गई। यानी एक दशक में विश्वविद्यालयों की कुल संख्या में करीब 77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

हालांकि, इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह निजी विश्वविद्यालयों का तेजी से विस्तार रहा। आंकड़े बताते हैं कि जहां सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या सीमित गति से बढ़ी, वहीं निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना कहीं अधिक तेज रही।

निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में 149 प्रतिशत का इजाफा

AISHE के अनुसार, वर्ष 2013-14 में देश में 219 निजी विश्वविद्यालय थे। 2023-24 तक इनकी संख्या बढ़कर 546 हो गई। यानी दस वर्षों में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में करीब 149 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं, सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या इसी अवधि में 504 से बढ़कर 733 हुई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे साफ है कि निजी विश्वविद्यालयों का विस्तार सरकारी विश्वविद्यालयों की तुलना में तीन गुना से अधिक तेज रहा।

गुजरात बना निजी विश्वविद्यालयों का सबसे बड़ा केंद्र

राज्यों के स्तर पर देखें तो निजी विश्वविद्यालयों के विस्तार में गुजरात सबसे आगे निकलकर सामने आया है। वर्ष 2013-14 में राज्य में केवल 16 निजी विश्वविद्यालय थे, लेकिन 2023-24 तक इनकी संख्या बढ़कर 67 हो गई। यानी दस साल में गुजरात में 51 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित हुए, जो देश में सबसे अधिक है।

इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां इस अवधि में 41 नए निजी विश्वविद्यालय शुरू हुए।

एक समय निजी विश्वविद्यालयों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में पहले स्थान पर था। वर्ष 2013-14 में यहां 39 निजी विश्वविद्यालय थे, लेकिन अब गुजरात ने उसे पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या के लिहाज से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।

सरकारी विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश अब भी सबसे आगे

सरकारी विश्वविद्यालयों के मामले में तस्वीर अपेक्षाकृत स्थिर रही है। उत्तर प्रदेश पहले भी इस सूची में शीर्ष पर था और अब भी अपनी स्थिति बनाए हुए है। राज्य में सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 35 से बढ़कर 58 हो गई है।

इसके अलावा कर्नाटक ने दूसरा स्थान बरकरार रखा, जबकि पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश भी सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या के आधार पर प्रमुख राज्यों में शामिल हैं।

छात्र अब भी सरकारी विश्वविद्यालयों को दे रहे प्राथमिकता

विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों का नामांकन भी उसी अनुपात में बढ़ा हो। AISHE 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि देश में आज भी सबसे अधिक छात्र सरकारी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।

वर्ष 2013-14 में सरकारी विश्वविद्यालयों में 51.9 लाख छात्र नामांकित थे, जो कुल विश्वविद्यालयी नामांकन का 81.3 प्रतिशत था। वर्ष 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 73.9 लाख हो गई। हालांकि, कुल नामांकन में इनकी हिस्सेदारी घटकर 68.1 प्रतिशत रह गई है।

निजी विश्वविद्यालयों में तीन गुना बढ़ा नामांकन

दूसरी ओर निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में निजी विश्वविद्यालयों में 11.9 लाख छात्र पढ़ रहे थे। 2023-24 तक यह संख्या बढ़कर 34.6 लाख पहुंच गई।

यानी एक दशक में निजी विश्वविद्यालयों में नामांकन लगभग तीन गुना बढ़ गया। अब देश के कुल विश्वविद्यालयी छात्रों में निजी विश्वविद्यालयों की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत हो चुकी है। यह संकेत देता है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, नए प्रोफेशनल कोर्स, उद्योगों के साथ साझेदारी और रोजगार-केंद्रित शिक्षा के कारण निजी विश्वविद्यालयों की ओर छात्रों का रुझान लगातार बढ़ रहा है।

उच्च शिक्षा का बदलता परिदृश्य

AISHE 2023-24 के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था तेजी से विस्तार के दौर से गुजर रही है। निजी विश्वविद्यालयों की संख्या और उनमें बढ़ते नामांकन से यह संकेत मिलता है कि उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। वहीं, सरकारी विश्वविद्यालय अब भी सबसे अधिक छात्रों को शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे उनकी केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगार क्षमता और डिजिटल शिक्षा जैसे पहलुओं पर ध्यान देना इस विस्तार को अधिक प्रभावी बना सकता है।

 

 

Asmita Sarkar

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