
दिल्ली सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए जुलाई महीने को POCSO Awareness Month के रूप में मनाने का फैसला किया है। इस पहल के तहत राजधानी के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ की जानकारी देने के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सभी स्कूलों में चाइल्ड सेफ्टी से जुड़े अनिवार्य प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे और स्कूलों को 15 दिनों के भीतर इनके पालन की रिपोर्ट भी सरकार को सौंपनी होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह अभियान केवल एक महीने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा को स्कूल शिक्षा व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनाना है। सरकार चाहती है कि हर छात्र सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई कर सके और बच्चों से जुड़े सुरक्षा मानकों का सभी स्कूलों में नियमित रूप से पालन हो।
सभी स्कूलों में बनेगी चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी
दिल्ली सरकार के अनुसार जुलाई के अंत तक राजधानी के 5,633 स्कूलों में चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षकों, प्राचार्यों और अन्य स्कूल कर्मचारियों को POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) के प्रावधानों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR), दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) और POCSO कानून के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक स्टूडेंट सेफ्टी चेकलिस्ट भी लागू की है, ताकि सभी स्कूल एक समान सुरक्षा मानकों का पालन करें।
किन स्कूलों में लागू होंगे नए सुरक्षा नियम?
यह व्यवस्था राजधानी के सभी प्रमुख स्कूलों में लागू की जाएगी। इनमें दिल्ली सरकार के 1,077 स्कूल, 198 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, 2,612 एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के स्कूल तथा 1,746 निजी स्कूल शामिल हैं। यानी दिल्ली के लगभग सभी स्कूली छात्रों को इस अभियान का लाभ मिलेगा।
छात्रों को मिलेगी सुरक्षा और जागरूकता की ट्रेनिंग
अभियान के तहत स्कूलों में तैनात Educational and Vocational Guidance Counsellors (EVGCs) छात्रों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श (Safe Touch-Unsafe Touch), जेंडर संवेदनशीलता, व्यक्तिगत सीमाओं और ऑनलाइन सुरक्षा जैसे विषयों पर जानकारी देंगे। इसके अलावा बच्चों को आत्मविश्वास बढ़ाने और आपात स्थिति से निपटने के लिए सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
अभिभावकों और पुलिस की भी होगी भागीदारी
दिल्ली सरकार ने इस अभियान को केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रखा है। इसमें अभिभावकों, शिक्षकों, दिल्ली पुलिस, जिला प्रशासन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा तभी प्रभावी होगी, जब स्कूल और परिवार मिलकर इस विषय पर खुलकर संवाद करेंगे।
आंगनवाड़ी केंद्रों में भी चलेगा जागरूकता अभियान
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनवाड़ी-कम-पलना केंद्रों और बाल देखभाल संस्थानों में भी POCSO कानून और बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जाएगी।
क्या है इस अभियान का उद्देश्य?
दिल्ली सरकार का कहना है कि POCSO Awareness Month का मकसद बच्चों को यौन शोषण से बचाव के बारे में जागरूक करना, उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी देना और स्कूलों में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना है। सरकार चाहती है कि चाइल्ड सेफ्टी से जुड़े प्रोटोकॉल केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि हर स्कूल की दैनिक व्यवस्था का हिस्सा बनें। इससे बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और किसी भी तरह की संवेदनशील स्थिति में समय रहते उचित कार्रवाई की जा सकेगी।




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