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क्यों छात्रों के बीच बढ़ रही है Delhi University की Science of Happiness कोर्स की लोकप्रियता?

Why is the popularity of Delhi University's 'Science of Happiness' course growing among students?

Delhi University Science of Happiness Course: आज के समय में छात्र सिर्फ डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहते। मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और बेहतर जीवनशैली को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने शुरू किया ‘साइंस ऑफ हैप्पीनेस’ (Science of Happiness) कोर्स अब छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

कोर्स शुरू होने के केवल दो वर्षों के भीतर 2,000 से अधिक छात्र इसमें दाखिला ले चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि छात्रों के बीच पॉजिटिव साइकोलॉजी, भावनात्मक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास से जुड़े विषयों में रुचि लगातार बढ़ रही है।

दो साल में 2,000 से अधिक छात्रों ने चुना यह कोर्स

दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसार, मार्च 2024 में शुरू किए गए इस वैल्यू-एडेड कोर्स को अब तक 2,000 से ज्यादा छात्र चुन चुके हैं। हाल ही में कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कोर्स की प्रगति और छात्रों की प्रतिक्रिया पर चर्चा की गई।

बैठक में उन कॉलेजों के प्राचार्य और प्रतिनिधि भी शामिल हुए जहां यह कोर्स पढ़ाया जा रहा है। सभी ने बताया कि छात्रों की ओर से इस कोर्स को लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसकी मांग बढ़ रही है।

कैसे शुरू हुआ ‘Science of Happiness’ कोर्स?

दिल्ली विश्वविद्यालय ने मार्च 2024 में रेखी फाउंडेशन फॉर हैप्पीनेस के साथ एक समझौता (MoU) किया था। इसके तहत रेखी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर द साइंस ऑफ हैप्पीनेस की स्थापना की गई।

इसके बाद विश्वविद्यालय ने स्नातक (UG) छात्रों के लिए एक सेमेस्टर का यह वैल्यू-एडेड कोर्स (VAC) शुरू किया, जिसका उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और जीवन कौशल को मजबूत बनाना है।

किन छात्रों के लिए उपलब्ध है यह कोर्स?

विश्वविद्यालय की डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर के. रत्नाबली के अनुसार, फिलहाल यह कोर्स स्नातक के पहले चार सेमेस्टर के छात्रों के लिए उपलब्ध है।

उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में इसे पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड पेपर के रूप में शुरू करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

आखिर क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता?

समीक्षा बैठक के दौरान कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि खुश रहना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इसे सकारात्मक सोच, अच्छे व्यवहार और सार्थक कार्यों के माध्यम से हासिल किया जा सकता है।

उनके अनुसार, पहले विश्वविद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और खुशहाल जीवन जैसे विषयों पर आधारित पाठ्यक्रम बहुत कम देखने को मिलते थे। लेकिन बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और छात्रों की नई जरूरतों को देखते हुए ऐसे कोर्स अब उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं।

यही वजह है कि छात्र अब ऐसे विषयों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं, जो उन्हें केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन को बेहतर ढंग से समझने और संभालने की क्षमता भी प्रदान करते हैं।

किन कॉलेजों में पढ़ाया जा रहा है यह कोर्स?

फिलहाल दिल्ली विश्वविद्यालय के 17 कॉलेजों और मनोविज्ञान विभाग (Department of Psychology) में यह कोर्स संचालित किया जा रहा है।

इसमें प्रमुख रूप से मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR), हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), गार्गी कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज और आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज शामिल हैं।

माइंड लैब पर भी दिया जा रहा है जोर

कोर्स को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई कॉलेज नई पहल कर रहे हैं। मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज ने विश्वविद्यालय को बताया है कि उन्होंने इस कोर्स से जुड़ी गतिविधियों और शोध को बढ़ावा देने के लिए माइंड लैब (Mind Lab) की स्थापना की है।

विश्वविद्यालय के अनुसार, अन्य कॉलेज भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और व्यवहारिक सीख से जुड़े विषयों पर अधिक व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।

बदलती शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की प्राथमिकताओं को देखते हुए ‘साइंस ऑफ हैप्पीनेस’ जैसे कोर्स यह संकेत देते हैं कि अब विश्वविद्यालय केवल रोजगार नहीं, बल्कि बेहतर और संतुलित जीवन के लिए भी छात्रों को तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।

 

 

 

Asmita Sarkar

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