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Comprehensive sex education may soon be introduced in schools; Centre informs Supreme Court

स्कूलों में जल्द शुरू हो सकती है कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया- तैयारी जारी

Comprehensive sex education may soon be introduced in schools; Centre informs Supreme Court

देश के स्कूलों में कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन (Comprehensive Sexuality Education-CSE) लागू करने की दिशा में जल्द बड़ा कदम उठाया जा सकता है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इस संबंध में तैयारी चल रही है। यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अदालत किशोरों के अधिकार, निजता और पॉक्सो (POCSO) कानून के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल कानून के जरिए हर समस्या का समाधान संभव नहीं है। किशोरों को सही उम्र में वैज्ञानिक और तथ्य आधारित जानकारी देकर कई कानूनी और सामाजिक समस्याओं को रोका जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जताई चिंता?

यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर शुरू किया था। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ इसकी सुनवाई कर रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि 15 से 18 वर्ष की उम्र बच्चों के जीवन का सबसे संवेदनशील दौर होती है। इस समय वे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरते हैं। यदि उन्हें सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन नहीं मिलता, तो कई बार वे ऐसे फैसले ले लेते हैं जिनका असर उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

पॉक्सो कानून के इस्तेमाल पर भी अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पॉक्सो अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences Act) बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल किशोरों के आपसी सहमति वाले रिश्तों में भी होने लगा है।

अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में अक्सर परिवार की शिकायत पर नाबालिग लड़कों के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दर्ज हो जाता है। इससे उनके भविष्य और शिक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने माना कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सही समय पर उचित शिक्षा भी जरूरी है।

केंद्र सरकार ने बनाई 26 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 26 सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ने की।

समिति में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के विशेषज्ञ, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, शिक्षा विशेषज्ञ और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। समिति को किशोरों में जागरूकता बढ़ाने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया है।

क्या है कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन (CSE)?

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉम्प्रिहेंसिव सेक्स एजुकेशन (CSE) केवल यौन संबंधों की जानकारी देने वाला पाठ्यक्रम नहीं है। यह एक वैज्ञानिक और आयु-उपयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को उनके शरीर, स्वास्थ्य, भावनाओं, रिश्तों, सुरक्षा और अधिकारों के बारे में सही जानकारी देना है।

इसका मकसद युवाओं को जिम्मेदार निर्णय लेने, गलत धारणाओं से बचने और स्वस्थ एवं सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए तैयार करना है।

छात्रों को क्या सिखाया जा सकता है?

रिपोर्ट के अनुसार, CSE के तहत किशोरों को उम्र के अनुसार वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी। इसमें किशोरावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव, प्यूबर्टी, मासिक धर्म, प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भावस्था, गर्भनिरोधक उपाय और यौन संचारित संक्रमण (STI) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

इसके अलावा छात्रों को स्वस्थ रिश्तों, भावनात्मक समझ, संवाद कौशल और पारस्परिक सम्मान के बारे में भी बताया जाएगा। पाठ्यक्रम में ‘सहमति’ (Consent) की अवधारणा को भी समझाया जाएगा, ताकि बच्चे और किशोर किसी भी रिश्ते में अपनी और दूसरे व्यक्ति की इच्छा और अधिकारों का सम्मान करना सीख सकें।

विशेषज्ञ क्यों मानते हैं इसे जरूरी?

शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही उम्र में वैज्ञानिक और प्रमाणिक जानकारी मिलने से किशोर अफवाहों, इंटरनेट पर उपलब्ध भ्रामक जानकारी और सामाजिक मिथकों से बच सकते हैं।

ऐसी शिक्षा उन्हें अपने स्वास्थ्य, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है। साथ ही, यह लैंगिक सम्मान, जिम्मेदार व्यवहार और सुरक्षित सामाजिक वातावरण बनाने में भी मदद कर सकती है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि CSE को किस कक्षा से और किस प्रारूप में लागू किया जाएगा। इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार की नीति और आगे की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

 

 

Asmita Sarkar

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