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School Education Report Card 2024-25: Education Ministry Releases State and District-Wise School Performance Report 

School Education Report Card 2024-25: शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में खुली स्कूलों की असली तस्वीर

School Education Report Card 2024-25: Education Ministry Releases State and District-Wise School Performance Report 

देश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और जिलों का नया School Education Report Card 2024-25 जारी किया है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल स्कूलों की संख्या बताना नहीं, बल्कि यह आकलन करना है कि बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही है, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं कितनी बेहतर हैं और शिक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी तरीके से काम कर रही है।

रिपोर्ट के जरिए राज्यों और जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन अलग-अलग मानकों पर किया गया है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में सुधार हुआ है और किन पहलुओं पर अभी और काम करने की जरूरत है।

क्या है School Education Report Card?

यह रिपोर्ट राज्यों और जिलों की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का एक विस्तृत मूल्यांकन है। जिस तरह छात्रों को परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर अंक और ग्रेड मिलते हैं, उसी तरह इस रिपोर्ट में भी राज्यों और जिलों को उनके प्रदर्शन के अनुसार अंक और ग्रेड दिए गए हैं।

इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने लाना और उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां सुधार की सबसे अधिक आवश्यकता है।

किन पहलुओं पर किया गया मूल्यांकन?

रिपोर्ट केवल स्कूलों की संख्या तक सीमित नहीं है। इसमें यह भी देखा गया कि बच्चे कितना सीख रहे हैं, स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं और छात्रों को आवश्यक सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।

साथ ही बिजली, पेयजल, शौचालय, सरकारी योजनाओं का लाभ, डिजिटल शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था के संचालन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया।

इन छह प्रमुख मानकों पर हुई ग्रेडिंग

रिपोर्ट के अनुसार जिलों का मूल्यांकन छह प्रमुख श्रेणियों में किया गया है। इनमें सीखने के परिणाम (Learning Outcomes), कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता (Effective Classroom Interactions), स्कूलों का बुनियादी ढांचा एवं छात्र सुविधाएं (Infrastructure and Student Entitlements), स्कूल सुरक्षा एवं बाल संरक्षण (School Safety and Child Protection), डिजिटल लर्निंग (Digital Learning) और शिक्षा व्यवस्था का संचालन (Governance Process) शामिल हैं।

इन सभी मानकों के आधार पर प्रत्येक जिले का समग्र प्रदर्शन तय किया गया।

ऐसे दिए गए ग्रेड

रिपोर्ट में प्रदर्शन के आधार पर जिलों और राज्यों को अलग-अलग ग्रेड दिए गए हैं।

  • उत्कर्ष: 91 से 100 प्रतिशत
  • उत्तम-1: 81 से 90 प्रतिशत
  • उत्तम-2: 71 से 80 प्रतिशत
  • उत्तम-3: 61 से 70 प्रतिशत
  • प्रचेष्टा-1: 51 से 60 प्रतिशत
  • प्रचेष्टा-2: 41 से 50 प्रतिशत
  • प्रचेष्टा-3: 31 से 40 प्रतिशत
  • आकांशी-1: 21 से 30 प्रतिशत
  • आकांशी-2: 11 से 20 प्रतिशत
  • आकांशी-3: 10 प्रतिशत तक

राष्ट्रीय स्तर पर क्या सामने आया?

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में देश का कोई भी जिला सबसे ऊंचे ‘उत्कर्ष’ (91-100%) या ‘उत्तम-1’ (81-90%) ग्रेड तक नहीं पहुंच सका।

सबसे अधिक जिले ‘प्रचेष्टा-1’ (51-60%) और ‘प्रचेष्टा-2’ (41-50%) श्रेणी में रहे। वहीं ‘आकांशी’ श्रेणियों में जिलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2023-24 की तुलना में ‘उत्तम-3’ और ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणियों में जिलों की संख्या बढ़ी है, जबकि ‘प्रचेष्टा-2’ और ‘प्रचेष्टा-3’ श्रेणियों में कमी आई है। इससे संकेत मिलता है कि कई जिलों के प्रदर्शन में धीरे-धीरे सुधार हुआ है, हालांकि शीर्ष ग्रेड तक पहुंचने की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

दिल्ली का प्रदर्शन कैसा रहा?

दिल्ली के जिलों का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर रहा। रिपोर्ट के अनुसार राजधानी के 13 शैक्षिक जिलों में अधिकांश जिले बेहतर ग्रेड श्रेणियों में शामिल हैं।

वर्ष 2024-25 में 9 जिले ‘उत्तम-3’ (61-70%), 4 जिले ‘उत्तम-2’ (71-80%) और 3 जिले ‘प्रचेष्टा-1’ (51-60%) श्रेणी में रहे। हालांकि दिल्ली का कोई भी जिला ‘उत्कर्ष’ या ‘उत्तम-1’ ग्रेड हासिल नहीं कर पाया, लेकिन एक भी जिला ‘आकांशी’ श्रेणी में नहीं है। इससे स्पष्ट होता है कि राजधानी के अधिकांश जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक स्तर पर बना हुआ है।

डिजिटल लर्निंग में दक्षिण जिला सबसे आगे

रिपोर्ट में विभिन्न श्रेणियों के आधार पर जिलों की अलग-अलग रैंकिंग भी जारी की गई है।

डिजिटल लर्निंग श्रेणी में दक्षिण (South) जिला 39 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद नई दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम-बी (South West B-I) को 36-36 अंक मिले। वहीं नॉर्थ वेस्ट-ए (North West A) को इस श्रेणी में 33 अंक प्राप्त हुए।

दूसरे राज्यों की स्थिति

रिपोर्ट में राज्यों के भीतर जिला स्तर पर भी तुलना की गई है। उदाहरण के तौर पर गोवा के दोनों जिले ‘प्रचेष्टा’ श्रेणी में हैं, जबकि हरियाणा के अधिकांश जिले ‘प्रचेष्टा-2’ और ‘प्रचेष्टा-3’ ग्रेड में शामिल हैं।

इससे संकेत मिलता है कि लगभग सभी राज्यों में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की अभी पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।

रिपोर्ट का उद्देश्य क्या है?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार इस रिपोर्ट का मकसद केवल राज्यों और जिलों की रैंकिंग जारी करना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों की पहचान करना, राज्यों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करना और स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार सुनिश्चित करना है।

यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, शिक्षा विभागों और जिला प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में काम करेगी, जिससे वे उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे सकें जहां सुधार की सबसे अधिक जरूरत है। इससे भविष्य में छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्कूल शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

 

 

Asmita Sarkar

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