
Delhi Air Pollution Awareness Programme: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अब पूरे वर्ष छात्रों को वायु प्रदूषण के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे इस महीने से ही वायु प्रदूषण जागरूकता कार्यक्रम शुरू करें और पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान अलग-अलग विषयों पर छात्रों को पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की जानकारी दें।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को वायु प्रदूषण के कारणों, इसके स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों तथा प्रदूषण कम करने के उपायों के बारे में जागरूक बनाना है। विभाग का मानना है कि यदि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी, तो इसका सकारात्मक प्रभाव समाज और शहर की वायु गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।
स्कूलों में होंगी कई रचनात्मक गतिविधियां
शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, स्कूलों में पोस्टर निर्माण, स्लोगन लेखन, निबंध लेखन, भाषण प्रतियोगिता और नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वाहनों से निकलने वाले धुएं, सड़क की धूल, निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण और अन्य प्रमुख प्रदूषण स्रोतों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
अधिकांश गतिविधियों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्र भाग लेंगे, जबकि कुछ कार्यक्रमों में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा।
हर महीने अलग विषय पर चलेगा अभियान
शिक्षा विभाग ने सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) एक्शन प्लान के तहत पूरे वर्ष के लिए विषयवार कार्यक्रम तय किए हैं।
योजना के अनुसार, जुलाई से हर महीने वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जुलाई से सितंबर तक सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण पर गतिविधियां आयोजित होंगी। सितंबर से नवंबर तक निर्माण कार्य से उत्पन्न धूल पर विशेष कार्यक्रम होंगे।
इसके बाद नवंबर और दिसंबर में नगर निगम के ठोस कचरे और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जनवरी में औद्योगिक उत्सर्जन, फरवरी में थर्मल पावर प्लांट और मार्च में डीजल जनरेटर सेट से होने वाले प्रदूषण पर छात्रों को जानकारी दी जाएगी।
मांझे पर प्रतिबंध की भी दी जाएगी जानकारी
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रमुखों (HoS) को निर्देश दिया है कि वे छात्रों और अभिभावकों के बीच प्रतिबंधित तेज धार वाले मांझे के उपयोग को लेकर भी जागरूकता फैलाएं। विभाग का कहना है कि इस तरह का मांझा पक्षियों और लोगों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
CAQM और DPCC के निर्देशों पर आधारित है योजना
यह एक्शन प्लान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा तैयार रूपरेखा और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के दिशा-निर्देशों के आधार पर तैयार किया गया है। शिक्षा विभाग ने इसे इसी महीने से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने को कहा गया है।
हर महीने देनी होगी रिपोर्ट
सर्कुलर के अनुसार, स्कूलों को प्रत्येक निर्धारित गतिविधि के बाद उसकी Action Taken Report (ATR) तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट के साथ कार्यक्रमों की तस्वीरें भी संलग्न करनी होंगी और संबंधित महीने की 25 तारीख तक शिक्षा निदेशालय की विज्ञान शाखा को भेजनी होंगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूल स्तर पर लगातार चलने वाले ऐसे अभियान छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करेंगे।




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