
देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। 20 जुलाई से सभी 23 आईआईटी में बीटेक प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बीच एक बड़ी चुनौती सामने है। देशभर के आईआईटी में 4,300 से अधिक फैकल्टी पद अभी भी खाली हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा और शोध कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आईआईटी में कुल लगभग 12,500 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं। मार्च 2026 तक के आंकड़ों से पता चलता है कि इनमें करीब 32 से 35 प्रतिशत पद रिक्त हैं। लंबे समय से इन पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रियाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण कई पद अब भी खाली हैं।
जेईई एडवांस पास करने वाले छात्रों के सामने बड़ी चुनौती
हर साल लाखों छात्र जेईई एडवांस जैसी कठिन परीक्षा पास कर आईआईटी में दाखिला लेते हैं। छात्रों की उम्मीद होती है कि उन्हें विश्वस्तरीय शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ने और शोध करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, फैकल्टी की कमी का असर पढ़ाई, शोध परियोजनाओं, लैब गतिविधियों और छात्रों को मिलने वाले अकादमिक मार्गदर्शन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित नहीं रहेगा तो आईआईटी की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और रिसर्च आउटपुट पर भी असर पड़ सकता है।
कई प्रमुख IIT में बड़ी संख्या में पद खाली
मार्च 2026 तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख आईआईटी में फैकल्टी के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। आईआईटी पटना में लगभग 52 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी धनबाद और आईआईटी गोवा में भी 45 से 51 प्रतिशत तक रिक्तियां दर्ज की गई हैं।
इसके अलावा आईआईटी मंडी में करीब 43 प्रतिशत, आईआईटी गुवाहाटी में 42 प्रतिशत, आईआईटी कानपुर और आईआईटी बॉम्बे में लगभग 32 प्रतिशत तथा आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में करीब 30 प्रतिशत पद खाली हैं। वहीं आईआईटी रोपड़ में लगभग 14 प्रतिशत फैकल्टी पद रिक्त बताए गए हैं।
पुराने IIT भी समस्या से अछूते नहीं
फैकल्टी की कमी केवल नए संस्थानों तक सीमित नहीं है। देश के पुराने और प्रतिष्ठित आईआईटी जैसे आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की और आईआईटी गुवाहाटी भी इस चुनौती का सामना कर रहे हैं।
इन संस्थानों में लंबे समय से रिक्त पद बने रहने के कारण शोध परियोजनाओं, पीएचडी मार्गदर्शन, नए पाठ्यक्रमों के संचालन और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
नए IIT में सीटें बढ़ीं, लेकिन फैकल्टी की जरूरत भी बढ़ी
केंद्र सरकार ने उच्च तकनीकी शिक्षा के विस्तार के तहत नए आईआईटी में सीटें बढ़ाने की योजना पर काम शुरू किया है। केंद्रीय बजट 2025-26 में पांच नए आईआईटी में सीटें बढ़ाने की घोषणा की गई थी। इसके बाद मई 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईआईटी जम्मू, पलक्कड़, भिलाई, तिरुपति और धारवाड़ में चरणबद्ध तरीके से लगभग 6,500 अतिरिक्त छात्र सीटें और 130 नए फैकल्टी पद सृजित करने को मंजूरी दी थी।
इन अतिरिक्त सीटों का लाभ बीटेक, एमटेक और पीएचडी कार्यक्रमों में मिलेगा। हालांकि, जिन संस्थानों में पहले से फैकल्टी की कमी है, वहां नई सीटों के साथ पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति भी बड़ी आवश्यकता बन गई है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नए आईआईटी में भी कई पद खाली हैं। आईआईटी पलक्कड़ में करीब 14 प्रतिशत, आईआईटी तिरुपति और आईआईटी भिलाई में लगभग 12-12 प्रतिशत तथा आईआईटी धारवाड़ में भी कुछ फैकल्टी पद अभी रिक्त हैं।
योग्य फैकल्टी की उपलब्धता बनी सबसे बड़ी चुनौती
आईआईटी प्रशासन कई वर्षों से देश और विदेश के योग्य शिक्षकों को आकर्षित करने के लिए भर्ती अभियान चला रहा है। इसके बावजूद उच्च स्तर के शोध अनुभव, अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों और विशेष विशेषज्ञता वाले उम्मीदवारों की सीमित उपलब्धता के कारण नियुक्तियां अपेक्षित गति से नहीं हो पा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आईआईटी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखना है, तो केवल छात्र सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ उच्च गुणवत्ता वाली फैकल्टी की समय पर नियुक्ति, बेहतर शोध सुविधाएं और आकर्षक अकादमिक वातावरण सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।




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