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Advisory on IIT Roorkee's political activities goes viral, sparking a social media debate; institute issues clarification

IIT Roorkee की राजनीतिक गतिविधियों पर एडवाइजरी वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस; संस्थान ने दी सफाई

Advisory on IIT Roorkee's political activities goes viral, sparking a social media debate; institute issues clarification

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की की एक आंतरिक एडवाइजरी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा का विषय बन गई है। इस एडवाइजरी में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को संस्थान की पूर्व अनुमति के बिना राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने और राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचने की सलाह दी गई है। दस्तावेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई, जबकि IIT रुड़की ने इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए किसी नई नीति से इनकार किया है।

20 जुलाई की एडवाइजरी वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद

20 जुलाई 2026 की तारीख वाली इस एडवाइजरी के वायरल होने का समय भी चर्चा का कारण बना। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में परीक्षा संबंधी विवादों को लेकर छात्र प्रदर्शन हो रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है। ऐसे माहौल में इस दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

एडवाइजरी में क्या कहा गया है?

एडवाइजरी के अनुसार, संस्थान ने देखा कि कुछ छात्र और कर्मचारी इंस्टाग्राम, फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूदा राजनीतिक आंदोलनों और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय और समर्थन साझा कर रहे हैं।

इसी संदर्भ में संस्थान ने अपनी Conduct Rules (आचरण नियमावली) का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना पूर्व अनुमति कोई छात्र या कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों या राजनीतिक चर्चाओं में शामिल न हो। साथ ही सोशल मीडिया, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या प्रसारण माध्यमों में ऐसा कोई सार्वजनिक बयान या राय व्यक्त न की जाए, जिससे संस्थान, केंद्र सरकार, किसी संगठन या आम जनता के साथ संबंध प्रभावित हों।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि संस्थान की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई भी व्यक्ति संस्थान की ओर से सार्वजनिक मंच पर आधिकारिक बयान जारी न करे।

सोशल मीडिया पर क्यों उठे सवाल?

एडवाइजरी के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसकी आलोचना की। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक बताते हुए “गैग ऑर्डर” करार दिया। वहीं कुछ लोगों का कहना था कि यह निर्देश छात्रों की राजनीतिक भागीदारी और व्यक्तिगत विचार व्यक्त करने के अधिकार को सीमित कर सकता है।

हालांकि, कई लोगों ने यह भी कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में कर्मचारियों और छात्रों के लिए आचरण संबंधी दिशा-निर्देश पहले से मौजूद होते हैं और उन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

IIT रुड़की ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद IIT रुड़की ने स्पष्ट किया कि वायरल हुई एडवाइजरी कोई नई नीति या नया आदेश नहीं है। संस्थान के अनुसार, यह एक आंतरिक एडवाइजरी है, जिसे प्रत्येक शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच नियमित रूप से साझा किया जाता है।

संस्थान ने कहा कि यह लंबे समय से लागू आचरण नियमावली का हिस्सा है और इसका उद्देश्य केवल संबंधित नियमों की जानकारी देना है। IIT रुड़की ने यह भी कहा कि इस दस्तावेज को संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए और इसकी गलत व्याख्या से बचना चाहिए।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर छात्रों और शिक्षकों की सार्वजनिक भागीदारी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत आचरण नियमों को लेकर लगातार बहस हो रही है। IIT रुड़की की सफाई के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि संस्थान इसे नई पाबंदी नहीं, बल्कि पहले से लागू नियमों की याद दिलाने वाली नियमित एडवाइजरी मानता है।

फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है और कई लोग संस्थानों में लागू आचरण नियमों तथा व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की सीमाओं पर अलग-अलग राय रख रहे हैं।

 

 

Asmita Sarkar

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