
अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा से जुड़ी प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। आवेदन प्रक्रिया में बदलाव, वीजा लॉटरी के नए नियम, इंटरव्यू में लंबा इंतजार और वीजा नवीनीकरण (Renewal) से जुड़ी दिक्कतों ने कई उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल के महीनों में H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े नियमों और अनिश्चितता का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
H-1B वीजा क्या है?
H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी (Non-Immigrant) वर्क वीजा है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करती हैं। इसका सबसे अधिक उपयोग सूचना प्रौद्योगिकी (IT), इंजीनियरिंग, डेटा साइंस, स्वास्थ्य सेवाओं और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। भारतीय पेशेवर इस वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं।
आवेदन संख्या में आई बड़ी गिरावट
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के अनुसार, FY 2027 H-1B कैप सीजन के लिए लगभग 2.12 लाख वैध पंजीकरण (Eligible Registrations) प्राप्त हुए, जबकि FY 2026 में यह संख्या करीब 3.44 लाख थी। यानी एक साल में लगभग 1.32 लाख कम आवेदन दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कड़े नियम, बढ़ी हुई जांच और वैश्विक रोजगार बाजार में बदलती परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं।
अब केवल एक बार होगी H-1B लॉटरी
USCIS ने स्पष्ट किया है कि FY 2027 के लिए चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इस समय नए पंजीकरण स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। यदि निर्धारित H-1B कैप पूरी हो जाती है, तो सामान्य स्थिति में अतिरिक्त चयन (Second Lottery) की आवश्यकता नहीं होती।
हाल के वर्षों में USCIS ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए Beneficiary-Centric Selection System लागू किया है, जिसमें एक व्यक्ति के नाम पर केवल एक वैध चयन माना जाता है, भले ही उसके लिए कई नियोक्ता आवेदन करें।
इंटरव्यू और वीजा नवीनीकरण बना चिंता का कारण
कई भारतीय पेशेवरों को वीजा इंटरव्यू के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं कुछ मामलों में वीजा नवीनीकरण में देरी के कारण नौकरी और कार्य अनुमति प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
हालांकि वीजा रिन्यूअल के लिए कोई निश्चित “जुलाई” समयसीमा नहीं होती। H-1B वीजा का विस्तार (Extension) संबंधित कर्मचारी और नियोक्ता की स्थिति के अनुसार अलग-अलग समय पर किया जाता है।
क्या H-1B वीजा फीस 100 गुना बढ़ गई है?
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि H-1B वीजा की फीस 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर कर दी गई है। लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह दावा सही नहीं है।
अमेरिका में H-1B आवेदन से जुड़ी विभिन्न सरकारी फीस समय-समय पर संशोधित होती रहती हैं और इनका भुगतान मुख्य रूप से नियोक्ता (Employer) करता है। अब तक H-1B वीजा की आधिकारिक सरकारी फीस 1,00,000 अमेरिकी डॉलर किए जाने की पुष्टि अमेरिकी सरकार या USCIS ने नहीं की है। इसलिए इस दावे को तथ्यात्मक रूप से सही नहीं माना जा सकता।
भारतीय अब भी सबसे बड़े लाभार्थी
USCIS के पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही है। पिछले पांच वर्षों में लगभग 70 से 74 प्रतिशत H-1B वीजा भारतीय नागरिकों को मिले हैं। हालांकि प्रतिशत में हल्की गिरावट आई है, लेकिन भारतीय पेशेवर अब भी इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा हिस्सा बने हुए हैं।
किन कंपनियों में सबसे ज्यादा भारतीयों को मिलता है H-1B?
हर साल बड़ी टेक कंपनियां H-1B कार्यक्रम के जरिए हजारों विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करती हैं। इनमें सबसे आगे Amazon रही है। इसके अलावा Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft, Meta, Apple और Google जैसी कंपनियां भी बड़ी संख्या में H-1B वीजा का उपयोग करती हैं। इन कंपनियों में भारतीय आईटी इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत मौजूदगी है।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में अवसर अब भी मौजूद हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा पहले से अधिक बढ़ गई है। उम्मीदवारों को मजबूत तकनीकी कौशल, बेहतर प्रोफाइल, समय पर आवेदन और सही दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। साथ ही, H-1B नियमों में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखना भी जरूरी होगा।
अमेरिका आज भी भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए सबसे बड़ा रोजगार बाजार बना हुआ है, लेकिन बदलते नियमों के बीच वहां तक पहुंचने की राह पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होती जा रही है।




Add comment