
असम में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पिछले नौ वर्षों में लगातार घटी है, जबकि निजी स्कूलों की ओर छात्रों का रुझान तेजी से बढ़ा है। यह जानकारी राज्य सरकार ने विधानसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के जरिए दी। आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 से 2025-26 के बीच सरकारी और प्रांतीयकृत स्कूलों में लाखों छात्रों का नामांकन कम हुआ, जबकि इसी अवधि में निजी स्कूलों में दाखिलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
राज्य के शिक्षा मंत्री रणोज पेगू ने विधायक अखिल गोगोई के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की।
सरकारी स्कूलों में 7.35 लाख छात्रों की कमी
सरकार के अनुसार, प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक के सरकारी और प्रांतीयकृत स्कूलों में पिछले नौ वर्षों के दौरान 7,35,446 छात्रों का नामांकन घटा है। इसके विपरीत, इसी अवधि में निजी स्कूलों में 9,40,566 नए छात्रों ने प्रवेश लिया।
ये आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में अभिभावक अब निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी सुविधाएं, अंग्रेजी माध्यम, डिजिटल शिक्षण और परिणामों को लेकर बढ़ती अपेक्षाएं इस बदलाव के प्रमुख कारणों में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में इस बदलाव के कारणों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
नौ वर्षों में 8,591 सरकारी स्कूल कम हुए
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवधि में राज्य में 8,591 सरकारी स्कूलों की संख्या भी कम हुई है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘प्रांतीयकरण (Provincialisation)’ वह प्रक्रिया है, जिसके तहत गैर-सरकारी स्कूलों को सरकार अपने नियंत्रण में लेती है और वहां कार्यरत शिक्षकों के वेतन तथा अन्य सेवा लाभों का भुगतान करती है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षक घटे, निजी स्कूलों में बढ़े
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले नौ वर्षों में सरकारी स्कूलों में 15,326 शिक्षकों की संख्या कम हुई है। दूसरी ओर, निजी स्कूलों में 51,214 नए शिक्षक जुड़े हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि निजी शिक्षा क्षेत्र में विस्तार के साथ शिक्षकों की मांग भी बढ़ी है।
कई सरकारी स्कूल अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित
विधानसभा में पेश आंकड़ों से यह भी सामने आया कि असम के कई सरकारी स्कूल अभी भी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
राज्य में 3,031 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इसके अलावा 15,270 स्कूलों में दो शिक्षक और 8,115 स्कूलों में केवल तीन शिक्षक हैं।
बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार के अनुसार, 676 सरकारी स्कूलों में अब तक बिजली की सुविधा नहीं है, 730 स्कूल इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित हैं, जबकि 12,353 सरकारी स्कूलों की कक्षाओं में पंखों की व्यवस्था नहीं है।
शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती
विधानसभा में पेश किए गए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि असम की सरकारी शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर सरकारी स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों में दाखिले और शिक्षकों की संख्या दोनों बढ़ रही हैं। साथ ही, अनेक सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर ध्यान देने से छात्रों का भरोसा फिर से बढ़ाया जा सकता है।




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