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Sonam Wangchuk Ends 26-Day Hunger Strike After Written Assurance from Government, Parliament to Discuss Exam Reforms

26 दिन बाद खत्म हुआ सोनम वांगचुक का अनशन, सरकार के लिखित आश्वासन के बाद लिया बड़ा फैसला 

Sonam Wangchuk Ends 26-Day Hunger Strike After Written Assurance from Government, Parliament to Discuss Exam Reforms

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार की मांग उठा रहे सोनम वांगचुक ने 26 दिनों से जारी अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने देर रात करीब 12:30 बजे अपना उपवास तोड़ा। वांगचुक ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया।

वांगचुक के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह सहित लद्दाख की एपेक्स बॉडी के प्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचे थे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने संयुक्त पत्र लिखकर उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। सांसदों और मंत्रियों ने परीक्षा प्रणाली, विशेष रूप से NEET पेपर लीक जैसे मामलों पर संसद में चर्चा कराने का भरोसा भी दिया।

दो दिनों तक चली बातचीत, फिर मिला लिखित भरोसा

सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार और उनके प्रतिनिधियों के बीच पिछले दो दिनों से लगातार बातचीत चल रही थी। उन्होंने साफ किया कि केवल मौखिक आश्वासन उनके लिए पर्याप्त नहीं था और वे सभी प्रमुख मांगों पर लिखित प्रतिबद्धता चाहते थे। इसी कारण उन्होंने अपना अनशन दो दिन और जारी रखा। आखिरकार सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने आंदोलन के इस चरण को समाप्त करने का निर्णय लिया।

सरकार ने किन बातों पर दिया लिखित आश्वासन?

वांगचुक ने बताया कि सरकार ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर लिखित सहमति दी है।

पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और 20 जुलाई को आयोजित “संसद चलो” मार्च में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई एफआईआर या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दूसरा, पेपर लीक विवाद से जुड़े उन परिवारों को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है, जिनके बच्चों की मौत इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हुई थी।

तीसरा, संसद में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या बोले सोनम वांगचुक?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर वांगचुक ने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई लिखित या समयबद्ध आश्वासन नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चित समय तक भूख हड़ताल जारी रखते, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बढ़ता, या फिर आंदोलन को अगले चरण में ले जाने के लिए अनशन समाप्त करते।

उन्होंने कहा कि पिछले कई सप्ताह से देशभर के हजारों लोग उनसे लगातार आग्रह कर रहे थे कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनका स्वस्थ और जीवित रहना अधिक जरूरी है।

“इस्तीफा नहीं देना सरकार के लिए भी नुकसानदायक”

सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दे देते तो सरकार को राजनीतिक नुकसान कम होता। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा छात्रों की सुरक्षा थी। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र पर एफआईआर दर्ज नहीं होना उनकी प्राथमिक मांग थी, क्योंकि ऐसी कानूनी कार्रवाई युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

समर्थकों का जताया आभार

अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने देशभर के छात्रों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा जताया कि अब सरकार संसद में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करेगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.

 

Asmita Sarkar

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