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CJP raises questions regarding the amended bill passed in Parliament concerning paper leaks

Paper Leak को लेकर संसद में पास संशोधित विधेयक पर CJP ने उठाए सवाल, NTA सुधार और पारदर्शिता की मांग

CJP raises questions regarding the amended bill passed in Parliament concerning paper leaks

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर लगातार बहस जारी है। हाल के वर्षों में कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं पेपर लीक विवादों में घिरी हैं, जिसके चलते लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी बीच संसद में पारित संशोधित विधेयक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है।

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा है कि केवल सख्त सजा, जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं से पेपर लीक की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि सरकार को उन कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

संशोधित विधेयक पर उठाए सवाल

आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो में कहा कि संसद में पारित विधेयक मुख्य रूप से पेपर लीक होने के बाद की कार्रवाई पर केंद्रित दिखाई देता है। उनके अनुसार, कानून में दोषियों के खिलाफ सख्त सजा, जुर्माना और त्वरित न्याय की व्यवस्था पर जोर दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने सवाल किया कि क्या देश वास्तव में परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रहा है या फिर केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई तक सीमित रह गया है।

परीक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुधार की जरूरत

रांका का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली की बुनियादी खामियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक पेपर लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। उन्होंने तर्क दिया कि समस्या केवल अपराधियों को सजा देने की नहीं है, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाने की है जहां से परीक्षा प्रक्रिया शुरू होती है।

उनके अनुसार, परीक्षा आयोजन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

पांच प्रमुख मांगों पर जोर

CJP ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए पांच प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, परीक्षा कैलेंडर और कार्यक्रम में पारदर्शिता, पाठ्यक्रम से जुड़ी स्पष्टता, कोचिंग संस्थानों की भूमिका की समीक्षा और डिजिटल जांच तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

इसके अलावा, रांका ने पूरे परीक्षा तंत्र की शुरुआत से लेकर परिणाम घोषित होने तक स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की। उनका मानना है कि जब तक पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन कर कमजोर कड़ियों की पहचान नहीं की जाएगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं होगा।

विशेषज्ञों और छात्रों से संवाद की अपील

आशुतोष रांका ने सरकार से अपील की कि परीक्षा सुधारों पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले छात्रों, शिक्षाविदों, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े पेशेवरों से व्यापक चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है।

उन्होंने सरकार को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सभी संबंधित पक्षों की राय को शामिल करना आवश्यक है।

छात्रों के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा

देश में पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। कई परीक्षाओं के रद्द होने या दोबारा आयोजित किए जाने से छात्रों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में परीक्षा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक दलों, शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों की मांगें लगातार बढ़ रही हैं।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार संशोधित कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कौन से अतिरिक्त कदम उठाती है और क्या भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक संस्थागत बदलाव किए जाते हैं।

 

 

 

Asmita Sarkar

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