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US Student Visa 2025: F-1 Visas for Indian Students Drop Sharply, Report Highlights 62% Decline

अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों को झटका! 2025 में F-1 स्टूडेंट वीजा जारी होने में 62% तक की गिरावट 

US Student Visa 2025: F-1 Visas for Indian Students Drop Sharply, Report Highlights 62% Decline

अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारतीय और चीनी नागरिकों को जारी किए गए F-1 स्टूडेंट वीजा की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव अमेरिकी विश्वविद्यालयों, श्रम बाजार और आव्रजन नीतियों पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एजुकेशन (IIE) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों में 11.77 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र नामांकित थे। इनमें भारत के 3.63 लाख और चीन के 2.65 लाख छात्र शामिल थे। दोनों देशों के छात्र मिलकर अमेरिका में पढ़ रहे कुल विदेशी छात्रों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यही कारण है कि इन दोनों देशों से आने वाले छात्रों की संख्या में कोई भी बड़ा बदलाव अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारतीय छात्रों के F-1 वीजा में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, मई से अगस्त 2025 के बीच भारतीय नागरिकों को केवल 22,149 F-1 स्टूडेंट वीजा जारी किए गए। यह संख्या 2017-19 और 2021-24 के दौरान इसी अवधि के औसत 55,717 वीजा की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम है।

यदि केवल पिछले वर्ष से तुलना की जाए तो गिरावट और अधिक स्पष्ट दिखाई देती है। मई-अगस्त 2024 के दौरान भारतीय छात्रों को 58,694 F-1 वीजा जारी किए गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर 22,149 रह गई। इसका अर्थ है कि एक वर्ष में लगभग 62 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।

चीनी छात्रों के वीजा में भी आई कमी

रिपोर्ट बताती है कि मई से अगस्त 2025 के बीच चीनी छात्रों को 40,034 F-1 वीजा जारी किए गए। यह संख्या पिछले वर्षों के औसत 73,853 की तुलना में करीब 46 प्रतिशत कम है। वहीं 2024 में इसी अवधि के दौरान 61,075 वीजा जारी किए गए थे। इस आधार पर देखा जाए तो चीनी छात्रों के वीजा में भी लगभग 34 प्रतिशत की गिरावट आई है।

मई से अगस्त की अवधि क्यों मानी जाती है अहम?

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में अधिकांश विश्वविद्यालयों का नया शैक्षणिक सत्र अगस्त या सितंबर से शुरू होता है। इसलिए मई से अगस्त के बीच सबसे अधिक छात्र वीजा जारी किए जाते हैं। 2024 में भारतीय छात्रों को जारी कुल F-1 वीजा का लगभग 77 प्रतिशत और चीनी छात्रों को जारी कुल वीजा का करीब 76 प्रतिशत इसी अवधि में जारी हुआ था। इसी वजह से CIS ने इसी समयावधि को तुलना का आधार बनाया है।

OPT कार्यक्रम पर भी पड़ सकता है असर

रिपोर्ट में ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों को डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका में निर्धारित अवधि तक काम करने की अनुमति देता है। IIE के अनुसार, 2024-25 में लगभग 2.94 लाख विदेशी छात्र OPT के तहत कार्यरत थे। इनमें 1.43 लाख से अधिक भारतीय और लगभग 62 हजार चीनी छात्र शामिल थे। कुल OPT प्रतिभागियों में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा इन दोनों देशों का था।

STEM क्षेत्रों में भारतीय छात्रों की मजबूत मौजूदगी

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) से जुड़े क्षेत्रों में भारतीय छात्रों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में STEM OPT कार्यक्रम के तहत काम कर रहे 1.65 लाख से अधिक विदेशी छात्रों में से लगभग 68 प्रतिशत भारत और चीन से थे। इनमें 79,331 भारतीय और 33,807 चीनी छात्र शामिल थे।

यही वजह है कि वीजा जारी होने में आई गिरावट का असर भविष्य में अमेरिकी तकनीकी और शोध क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं की बड़ी भूमिका रही है।

अमेरिकी श्रम बाजार और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस

CIS रिपोर्ट का तर्क है कि यदि भारत और चीन से आने वाले छात्रों की संख्या कम होती है तो OPT के माध्यम से अमेरिकी श्रम बाजार में प्रवेश करने वाले विदेशी पेशेवरों की संख्या भी घट सकती है। इससे स्थानीय छात्रों और श्रमिकों के लिए प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अवसर बढ़ने की संभावना जताई गई है।

रिपोर्ट में चीन से आने वाले कुछ छात्रों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। अमेरिकी नीति निर्माताओं और सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी कुछ संवेदनशील STEM क्षेत्रों में तकनीकी हस्तांतरण, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और जासूसी से जुड़े संभावित जोखिमों पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि अधिकांश चीनी छात्र शिक्षा के उद्देश्य से ही अमेरिका आते हैं और उन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

H-1B वीजा से कैसे जुड़ता है यह मामला?

रिपोर्ट में OPT और H-1B वीजा कार्यक्रम के बीच संबंध का भी विश्लेषण किया गया है। अमेरिका में H-1B वीजा का सामान्य वार्षिक कोटा 65,000 है, जबकि अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उच्च डिग्री प्राप्त करने वालों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध होते हैं।

इसके विपरीत OPT कार्यक्रम पर कोई निश्चित संख्यात्मक सीमा लागू नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक OPT और STEM OPT के तहत काम करने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या 5.05 लाख से अधिक हो चुकी थी, जो कई मामलों में H-1B कार्यक्रम के प्रभाव के बराबर मानी जाती है।

भारतीय छात्रों के लिए क्या मायने रखती है यह रिपोर्ट?

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका अब भी भारतीय छात्रों के लिए सबसे लोकप्रिय विदेशी शिक्षा गंतव्यों में शामिल है। हालांकि F-1 वीजा जारी होने में आई गिरावट कई सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा नीतियों, सुरक्षा जांच, आव्रजन नियमों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर छात्र गतिशीलता पर पड़ सकता है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 2025 में दर्ज की गई यह गिरावट अस्थायी है या आने वाले वर्षों में भी यह रुझान जारी रहेगा। लेकिन इतना तय है कि अमेरिका में पढ़ाई की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को आवेदन प्रक्रिया, वीजा नियमों और विश्वविद्यालयों की प्रवेश नीतियों पर पहले से अधिक ध्यान देना होगा।

भारत और चीन अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में F-1 स्टूडेंट वीजा में दर्ज बड़ी गिरावट केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शिक्षा, कौशल प्रवाह और आव्रजन नीति से जुड़े व्यापक बदलावों का संकेत भी हो सकता है। भारतीय छात्रों के लिए यह रिपोर्ट सतर्क रहने और विदेश शिक्षा की योजना बनाते समय नवीनतम नीतिगत बदलावों पर नजर रखने का संकेत देती है।

 

 

Asmita Sarkar

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