
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG 2026 काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑल इंडिया कोटा के तहत MBBS, BDS और B.Sc Nursing पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवार 12 अगस्त 2026 तक पंजीकरण कर सकते हैं। काउंसलिंग के बाद NEET मेरिट के आधार पर सीट आवंटन किया जाएगा, लेकिन हर साल की तरह इस बार भी लाखों छात्रों को सीमित सीटों के कारण MBBS में प्रवेश नहीं मिल पाएगा।
ऐसे में कई छात्र विदेश में मेडिकल शिक्षा का विकल्प तलाशते हैं। इसकी एक बड़ी वजह भारत के निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस है। कई निजी संस्थानों में MBBS की कुल लागत 30 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय छात्र कम लागत वाले देशों का रुख करते हैं।
हालांकि विदेश में MBBS करने का फैसला लेने से पहले छात्रों को संबंधित देश के मेडिकल नियमों, भाषा, विश्वविद्यालय की मान्यता और भारत के राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
रूस: भारतीय छात्रों की पहली पसंदों में शामिल
रूस लंबे समय से भारतीय मेडिकल छात्रों के बीच लोकप्रिय रहा है। यहां कई सरकारी और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय अपेक्षाकृत कम फीस पर मेडिकल शिक्षा प्रदान करते हैं। अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया सरल होती है और NEET योग्यता के आधार पर आवेदन किया जा सकता है।
रूस में मेडिकल पाठ्यक्रम आमतौर पर छह वर्ष का होता है, जिसमें इंटर्नशिप भी शामिल रहती है। विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुल ट्यूशन फीस लगभग 20 से 30 लाख रुपये के बीच हो सकती है। अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की सुविधा और अपेक्षाकृत कम खर्च इसे भारतीय छात्रों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
बांग्लादेश: भारतीय पाठ्यक्रम से मिलता-जुलता सिस्टम
बांग्लादेश भारतीय छात्रों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बन चुका है। यहां का मेडिकल पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली भारतीय व्यवस्था से काफी हद तक मेल खाती है।
अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में पांच वर्ष का MBBS कार्यक्रम संचालित होता है। ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों को मिलाकर कुल लागत लगभग 35 से 45 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। ढाका और चटगांव जैसे शहरों के कई मेडिकल कॉलेज विदेशी छात्रों को प्रवेश देते हैं।
ईरान: कम लागत वाला उभरता विकल्प
मेडिकल शिक्षा के लिए ईरान भी धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। यहां कुछ विश्वविद्यालय अपेक्षाकृत कम फीस पर चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराते हैं।
विभिन्न संस्थानों में फीस अलग-अलग हो सकती है, लेकिन कई पाठ्यक्रमों की कुल लागत 25 से 30 लाख रुपये के भीतर पूरी हो सकती है। हालांकि आवेदन से पहले छात्रों को विश्वविद्यालय की मान्यता और डिग्री की वैधता की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
नेपाल: नजदीकी और सुविधाजनक विकल्प
भारत का पड़ोसी देश नेपाल भी मेडिकल शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों की पसंद में शामिल है। भौगोलिक निकटता, सांस्कृतिक समानता और आसान आवागमन इसके प्रमुख कारण हैं।
नेपाल के मेडिकल कॉलेजों में कुल MBBS खर्च लगभग 40 से 50 लाख रुपये तक हो सकता है। हालांकि छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों को NMC के लागू नियमों और पात्रता मानदंडों का पालन करना होता है।
यूक्रेन: स्थिति सामान्य होने का इंतजार
यूक्रेन एक समय भारतीय छात्रों के लिए सबसे लोकप्रिय मेडिकल शिक्षा केंद्रों में से एक था। हालांकि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वहां की स्थिति प्रभावित हुई और हजारों भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस लौटना पड़ा।
युद्ध से पहले यूक्रेन में MBBS की कुल लागत लगभग 50 से 60 लाख रुपये के बीच मानी जाती थी। वर्तमान में वहां प्रवेश लेने से पहले सुरक्षा स्थिति, विश्वविद्यालय संचालन और सरकारी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जांच करना आवश्यक है।
भारतीय छात्र विदेश क्यों चुनते हैं?
भारत में MBBS सीटों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 2025-26 तक देश में MBBS सीटें 1.3 लाख से अधिक हो चुकी हैं। इसके बावजूद मेडिकल शिक्षा की मांग सीटों की तुलना में कहीं अधिक है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन सीटें सीमित हैं। वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस कई बार इतनी अधिक होती है कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए उसका खर्च उठाना कठिन हो जाता है। यही वजह है कि छात्र विदेशों में अपेक्षाकृत कम लागत वाले विकल्प तलाशते हैं।
विदेश में MBBS करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कम फीस देखकर किसी भी विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं लेना चाहिए। छात्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विश्वविद्यालय संबंधित देश के नियामक निकाय से मान्यता प्राप्त हो और उसकी डिग्री भारत में लागू NMC नियमों के अनुरूप हो।
साथ ही पाठ्यक्रम की अवधि, इंटर्नशिप, भाषा, रहने का खर्च, सुरक्षा स्थिति और भविष्य में भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की पात्रता जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन करना जरूरी है।
NEET UG 2026 काउंसलिंग के बीच विदेश में MBBS का विकल्प कई छात्रों के लिए अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन सही निर्णय लेने के लिए पूरी जानकारी और सावधानी बेहद जरूरी है।




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