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AI and Data Analytics are transforming management education; digital skills gain importance in business schools 

AI और Data Analytics से बदल रही Management Education, बिजनेस स्कूलों में बढ़ा डिजिटल स्किल्स का महत्व

AI and Data Analytics are transforming management education; digital skills gain importance in business schools 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन अब केवल तकनीकी उपकरण नहीं रह गए हैं। ये तकनीकें आज कंपनियों की कार्यशैली, रोजगार बाजार की मांग और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में मैनेजमेंट एजुकेशन भी बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। बिजनेस स्कूल और विश्वविद्यालय अब पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर ऐसे पाठ्यक्रम तैयार कर रहे हैं, जिनमें AI, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल बिजनेस और उभरती तकनीकों को प्रमुखता दी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल मैनेजमेंट की सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं होगी। उद्योगों को ऐसे पेशेवरों की आवश्यकता होगी जो तकनीक और प्रबंधन दोनों की समझ रखते हों और डेटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम हों।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ बदल रही है शिक्षा

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की गति तेज हुई है और फिनटेक, ई-कॉमर्स, हेल्थटेक, मैन्युफैक्चरिंग तथा सेवा क्षेत्र में AI आधारित समाधान तेजी से अपनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है, जहां बड़ी संख्या में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित हो रहे हैं।

इन केंद्रों को ऐसे पेशेवरों की जरूरत है जो तकनीकी ज्ञान के साथ बिजनेस रणनीति, संचालन प्रबंधन और नवाचार को भी समझते हों। यही कारण है कि मैनेजमेंट शिक्षा में तकनीकी कौशलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

कंपनियां AI कौशल को दे रही हैं प्राथमिकता

उद्योग जगत के हालिया रुझान भी इसी बदलाव की ओर संकेत करते हैं। EY GCC Pulse Survey 2025 के अनुसार, भारत में 83 प्रतिशत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जेनरेटिव AI में निवेश कर रहे हैं। ग्राहक सेवा, वित्तीय संचालन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 58 प्रतिशत संस्थान एजेंटिक AI से जुड़े प्रयोग और निवेश कर रहे हैं।

वहीं, Indeed और NASSCOM से जुड़े उद्योग विश्लेषण बताते हैं कि कंपनियां भर्ती के दौरान AI कौशल को पहले से अधिक महत्व दे रही हैं। कई नियोक्ता अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि उम्मीदवार की वास्तविक तकनीकी क्षमता, प्रमाणपत्र और व्यावहारिक अनुभव को भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि रोजगार बाजार में कौशल आधारित चयन का महत्व बढ़ रहा है।

पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़ रहे हैं बिजनेस स्कूल

मैनेजमेंट शिक्षा में सबसे बड़ा बदलाव शिक्षण पद्धति में देखा जा रहा है। पहले जहां पढ़ाई मुख्य रूप से कक्षा, पाठ्यपुस्तकों और व्याख्यानों तक सीमित रहती थी, वहीं अब संस्थान छात्रों को वास्तविक कारोबारी परिस्थितियों के लिए तैयार करने पर जोर दे रहे हैं।

देश के कई बिजनेस स्कूल अपने पाठ्यक्रमों में डिजिटल मार्केटिंग, बिजनेस एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, जेनरेटिव AI और डेटा आधारित निर्णय प्रबंधन जैसे विषयों को शामिल कर रहे हैं। इसके साथ ही लाइव प्रोजेक्ट, इंडस्ट्री इंटर्नशिप, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, बिजनेस सिमुलेशन और अनुभव आधारित शिक्षण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पढ़ाई छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि उन्हें वास्तविक समस्याओं को समझने और समाधान विकसित करने की क्षमता भी प्रदान करती है।

AI के साथ नैतिक समझ भी जरूरी

तकनीकी बदलावों के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। AI का उपयोग बढ़ने से डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता, एल्गोरिदमिक पक्षपात और रोजगार पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हुई है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजनेस स्कूलों की जिम्मेदारी केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

छात्रों को यह भी समझाया जाना जरूरी है कि AI का उपयोग जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ कैसे किया जाए। भविष्य के प्रबंधकों को तकनीक के सामाजिक प्रभाव, डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार निर्णय लेने के सिद्धांतों की भी जानकारी होनी चाहिए। यही संतुलन उन्हें बदलते कारोबारी माहौल में सफल नेतृत्वकर्ता बना सकता है।

भविष्य के लिए तैयार हो रही नई पीढ़ी

AI और डेटा आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ मैनेजमेंट शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आने वाले वर्षों में वे छात्र अधिक प्रतिस्पर्धी साबित होंगे जो प्रबंधन के साथ-साथ डिजिटल तकनीकों, डेटा विश्लेषण और नवाचार की समझ विकसित करेंगे। यही कारण है कि बिजनेस स्कूल अब ऐसे पाठ्यक्रमों पर जोर दे रहे हैं जो छात्रों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और नेतृत्व की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।

 

 

 

Asmita Sarkar

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