
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को अनिवार्य बनाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह देते हुए याचिका खारिज कर दी।
मामले की सुनवाई जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर वह विचार नहीं करेगा और याचिकाकर्ता को उचित मंच के रूप में हाई कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी जाती है।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम आपको उच्च न्यायालय में जाने की स्वतंत्रता दे रहे हैं।”
डमी स्कूलों और फर्जी दाखिलों पर रोक लगाने की थी मांग
याचिका में देश के सभी स्कूलों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस व्यवस्था से डमी स्कूलों, फर्जी दाखिलों और वास्तविक उपस्थिति से जुड़ी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के बीच डमी स्कूलों का मुद्दा चर्चा में रहा है। कई मामलों में छात्र नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते, लेकिन उनका नामांकन स्कूल में बना रहता है। ऐसे में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को पारदर्शिता बढ़ाने के एक संभावित उपाय के रूप में पेश किया गया था।
कोचिंग संस्थानों के लिए भी मांगे गए थे सख्त नियम
याचिका में केवल बायोमेट्रिक अटेंडेंस की मांग ही नहीं की गई थी, बल्कि कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर भी कई सुझाव दिए गए थे। याचिकाकर्ता ने स्कूली छात्रों के लिए कोचिंग के घंटों की सीमा निर्धारित करने और देशभर के कोचिंग सेंटरों के लिए एक अनिवार्य आचार संहिता (Code of Conduct) लागू करने की मांग की थी।
प्रस्तावित आचार संहिता में भ्रामक विज्ञापनों पर रोक, सफलता के आंकड़ों में हेरफेर रोकने और प्रचार के लिए छात्रों या टॉपर्स की तस्वीरों के अनुचित उपयोग को नियंत्रित करने जैसे प्रावधान शामिल करने की बात कही गई थी।
क्या है अनुच्छेद 32?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के संरक्षण और उन्हें लागू करवाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अधिकार देता है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट कई मामलों में यह मानता है कि यदि किसी मुद्दे पर पहले हाई कोर्ट में सुनवाई संभव है, तो याचिकाकर्ता को वहां जाने की सलाह दी जा सकती है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जारी है बहस
स्कूलों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस, डमी स्कूलों पर नियंत्रण और कोचिंग संस्थानों के नियमन जैसे मुद्दे पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा क्षेत्र में बहस का विषय बने हुए हैं। कई राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों ने अपने स्तर पर बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की है, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य बनाने को लेकर अभी तक कोई एक समान नीति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब यह मामला संबंधित उच्च न्यायालय में उठाया जा सकता है, जहां इन मांगों पर विस्तार से सुनवाई होने की संभावना है।




Add comment