
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) 2027 को दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) के कंसोर्टियम ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि जिन उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होगी, उन्हें इसका उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
यह मामला दिव्यांग अभ्यर्थियों को कानून की पढ़ाई में समान अवसर उपलब्ध कराने और प्रवेश परीक्षा को अधिक समावेशी बनाने से जुड़ा है। सुप्रीम Court ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों को संशोधित दिशानिर्देशों पर चर्चा जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई सितंबर में निर्धारित की गई है, जबकि CLAT 2027 का आयोजन दिसंबर में प्रस्तावित है।
आवेदन फॉर्म में सुविधा का विकल्प नहीं होने पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता अमर जैन ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि वर्तमान CLAT आवेदन प्रक्रिया में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए ऐसा कोई अलग विकल्प उपलब्ध नहीं है, जहां वे स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की आवश्यकता की जानकारी दे सकें।
उन्होंने दलील दी कि आवेदन फॉर्म में यह विकल्प शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उम्मीदवार पहले से अपनी जरूरत दर्ज करा सकें। इससे परीक्षा आयोजन करने वाली संस्था को भी आवश्यक व्यवस्थाएं करने में सुविधा होगी और अभ्यर्थियों को परीक्षा के दिन किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आवेदन प्रक्रिया में ऐसी सुविधाओं का स्पष्ट उल्लेख होने से परीक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी और उम्मीदवारों के अनुकूल बनती है।
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अधिक सुलभ परीक्षा की मांग
यह याचिका यश डोडानी की ओर से दायर की गई है, जिसमें CLAT परीक्षा को दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए अधिक सुलभ बनाने की मांग की गई है। याचिका का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दृष्टिबाधित और अन्य जरूरतमंद अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान तकनीकी सहायता और उचित सुविधाएं उपलब्ध हों।
सुनवाई के दौरान NLUs कंसोर्टियम ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन उम्मीदवारों को स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होगी, उन्हें इसका उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। यह आश्वासन उन हजारों छात्रों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है जो सहायक तकनीकों की मदद से अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
सितंबर में होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ के समक्ष चल रही है। अदालत ने कंसोर्टियम और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे संशोधित दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देने के लिए आपसी चर्चा की प्रक्रिया जल्द पूरी करें।
सुप्रीम कोर्ट अब सितंबर में इस मामले की प्रगति की समीक्षा करेगा। तब तक यह स्पष्ट हो सकता है कि CLAT 2027 के आवेदन फॉर्म और परीक्षा दिशानिर्देशों में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए कौन-कौन से अतिरिक्त प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
कानून की शिक्षा में बढ़ रही समावेशिता
हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा और प्रवेश परीक्षाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए सुविधाओं को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्क्रीन रीडर, स्क्राइब, अतिरिक्त समय और डिजिटल सहायता जैसे उपायों को शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
CLAT 2027 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई यह कार्यवाही इस बात का संकेत है कि देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं में पहुंच और समावेशिता को लेकर अब अधिक गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो यह कानून की पढ़ाई का सपना देखने वाले अनेक दिव्यांग छात्रों के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।




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