
भारतीय सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA) के प्रतिष्ठित प्रोफेसर दीपक धर को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित डिराक मेडल (Dirac Medal) के लिए चुना गया है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में गिना जाता है। इस वर्ष सांख्यिकीय यांत्रिकी (Statistical Mechanics) में असाधारण योगदान के लिए धर समेत चार वैज्ञानिकों को इस सम्मान के लिए चुना गया है।
यह उपलब्धि भारतीय विज्ञान जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण मानी जा रही है। सांख्यिकीय भौतिकी और जटिल प्रणालियों पर दशकों तक किए गए उनके शोध ने उन्हें वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में विशेष पहचान दिलाई है।
सांख्यिकीय यांत्रिकी के क्षेत्र में अहम योगदान
डिराक मेडल उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जिन्होंने भौतिकी के जटिल सिद्धांतों और प्राकृतिक घटनाओं को समझने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। सांख्यिकीय यांत्रिकी भौतिकी की वह शाखा है जो बड़ी संख्या में कणों वाले सिस्टम के सामूहिक व्यवहार का अध्ययन करती है। आज इसके सिद्धांत केवल भौतिकी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जटिल नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, जैविक प्रणालियों और वित्तीय बाजारों के अध्ययन में भी उपयोग किए जा रहे हैं।
दीपक धर का शोध विशेष रूप से जटिल प्रणालियों और सेल्फ-ऑर्गनाइज्ड क्रिटिकलिटी (Self-Organized Criticality) जैसे विषयों पर केंद्रित रहा है। उनके कार्यों ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की है कि किस तरह साधारण नियमों से जटिल व्यवहार उत्पन्न होता है।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
दीपक धर का जन्म 1951 में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उन्हें विज्ञान में रुचि थी। उन्होंने एक पुराने साक्षात्कार में बताया था कि उनके पिता विज्ञान से जुड़ी पत्रिकाएं घर लाते थे, जिनसे उनकी वैज्ञानिक सोच विकसित हुई। विज्ञान के प्रति यही जिज्ञासा आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बन गई।
उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा प्राप्त की और बाद में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) पहुंचे, जहां उन्हें प्रतिष्ठित रिचर्ड फाइनमैन फेलोशिप मिली। कैलटेक में उन्होंने विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी रिचर्ड फाइनमैन के साथ काम किया और उनके शिक्षण सहायक भी रहे। वर्ष 1978 में उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की।
विदेश में अवसर छोड़ भारत लौटने का फैसला
पीएचडी पूरी करने के बाद उनके पास अमेरिका में करियर बनाने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने भारत लौटकर देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। वह मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) से जुड़े और बाद में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) पुणे में भी प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।
भारत में रहते हुए उन्होंने सांख्यिकीय भौतिकी, जटिल नेटवर्क और गैर-संतुलन प्रणालियों पर महत्वपूर्ण शोध किए। उनके कार्यों ने इस क्षेत्र में नई समझ विकसित करने में योगदान दिया।
‘धर बर्निंग एल्गोरिदम’ से मिली वैश्विक पहचान
दीपक धर के सबसे चर्चित वैज्ञानिक योगदानों में ‘धर बर्निंग एल्गोरिदम’ शामिल है। यह सैंडपाइल मॉडल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसने सेल्फ-ऑर्गनाइज्ड क्रिटिकलिटी के अध्ययन को नई दिशा दी। जटिल प्रणालियों के व्यवहार को समझने में इस एल्गोरिदम का व्यापक उपयोग किया जाता है और इसे आधुनिक सांख्यिकीय भौतिकी की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
उनके शोध कार्यों का प्रभाव केवल वैज्ञानिक साहित्य तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बड़ी संख्या में छात्रों, शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन भी दिया है।
पहले भी मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान
डिराक मेडल से पहले भी दीपक धर को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2022 में वह बोल्ट्जमैन मेडल पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बने थे। सांख्यिकीय भौतिकी के क्षेत्र में यह पुरस्कार अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।
इसके बाद भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया। विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सराहा जाता रहा है।
क्या है डिराक मेडल?
डिराक मेडल की स्थापना वर्ष 1985 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) ने महान भौतिक विज्ञानी पॉल ए.एम. डिराक की स्मृति में की थी। यह सम्मान सैद्धांतिक भौतिकी और गणितीय भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले वैज्ञानिकों को दिया जाता है।
इस पुरस्कार की एक विशेष शर्त यह है कि नोबेल पुरस्कार, फील्ड्स मेडल या वुल्फ पुरस्कार प्राप्त कर चुके वैज्ञानिक इसके लिए पात्र नहीं होते। हालांकि, डिराक मेडल प्राप्त करने वाले कई वैज्ञानिक बाद में नोबेल सहित अन्य वैश्विक पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग भी इस सम्मान से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल रहे हैं।
दीपक धर को मिला 2026 का डिराक मेडल न केवल उनके व्यक्तिगत वैज्ञानिक योगदान की पहचान है, बल्कि यह भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और अनुसंधान क्षमता को भी दर्शाता है। यह सम्मान युवा भारतीय शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जा रहा है।




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