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Supreme Court Issues Notice to Centre Over NCAHP Rules for Allied Healthcare Courses, 20,000 Students May Be Affected

Allied Healthcare Courses पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NCAHP नियमों को लेकर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Supreme Court Issues Notice to Centre Over NCAHP Rules for Allied Healthcare Courses, 20,000 Students May Be Affected

एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशनल शिक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मामला 2026-27 शैक्षणिक सत्र से नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स (NCAHP) के नियमों को लागू करने से जुड़ा है। इस फैसले को चुनौती देते हुए फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंसिंग टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस (FSFTI) ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

याचिका में कहा गया है कि यदि संबद्धता और मान्यता की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हुई तो देशभर में हजारों छात्रों की पढ़ाई और उनके करियर पर गंभीर असर पड़ सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और इसे इसी विषय से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।

14 अगस्त की समय सीमा बनी चिंता का कारण

याचिकाकर्ता संस्थानों का कहना है कि एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशन से जुड़े पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों के लिए नियामकीय मान्यता अनिवार्य है। हालांकि कई संस्थानों को अभी तक आवश्यक मंजूरी नहीं मिल पाई है।

याचिका के अनुसार, यदि संबंधित विश्वविद्यालय 14 अगस्त तक इन संस्थानों को मान्यता प्रदान नहीं करते हैं तो लगभग 20 हजार छात्रों के प्रवेश, पढ़ाई और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संस्थानों का तर्क है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रशासनिक और अकादमिक दोनों स्तरों पर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा पक्ष

मामले की सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। अदालत ने FSFTI की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई उन अन्य याचिकाओं के साथ की जाएगी, जिनमें NCAHP नियमों और उनके क्रियान्वयन से जुड़े समान मुद्दे उठाए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि अदालत इस विषय पर व्यापक स्तर पर विचार करना चाहती है।

NCAHP Act 2021 के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

याचिका में नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एक्ट, 2021 के कार्यान्वयन को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून लागू होने के बावजूद लंबे समय तक इसके तहत आवश्यक नियम और प्रक्रियाएं पूरी तरह विकसित नहीं की गईं।

उनका आरोप है कि पिछले वर्षों में यह क्षेत्र मुख्य रूप से विभिन्न प्रशासनिक निर्देशों और कार्यकारी सर्कुलरों के आधार पर संचालित होता रहा। ऐसे में 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के दौरान अचानक नए नियमों को लागू करने से संस्थानों के सामने अनुपालन संबंधी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

छात्रों और संस्थानों की नजर अब केंद्र के जवाब पर

एलाइड हेल्थकेयर शिक्षा क्षेत्र में हजारों छात्र और सैकड़ों संस्थान इस मामले के नतीजे पर नजर बनाए हुए हैं। यदि मान्यता और नियामकीय प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी होती है तो इसका सीधा असर प्रवेश प्रक्रिया और शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

अब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद सभी की निगाहें केंद्र सरकार के जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि NCAHP नियमों को लागू करने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी और छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशनल शिक्षा क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस मामले का असर केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य शिक्षा की दिशा भी इससे प्रभावित हो सकती है। 

 

 

  

Asmita Sarkar

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