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Priyanka Gandhi’s ‘Gomutra Expert’ Remark on IIT Madras Director V. Kamakoti Sparks Controversy 

प्रियंका गांधी के ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ बयान पर विवाद, IIT मद्रास निदेशक वी. कामकोटी के समर्थन में 14,000 लोगों के पत्र

Priyanka Gandhi’s ‘Gomutra Expert’ Remark on IIT Madras Director V. Kamakoti Sparks Controversy 

लोकसभा में IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी पर विवाद बढ़ गया है। उनके खिलाफ शुरू की गई एक ऑनलाइन याचिका में 14 हजार से ज्यादा लोगों ने समर्थन जताया है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले का संज्ञान लेने और प्रियंका गांधी से कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वापस लेने की मांग की गई है।

यह विवाद 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा के दौरान शुरू हुआ। प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार की ओर से गठित शिक्षा और परीक्षा सुधार संबंधी टास्क फोर्स पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ भी शामिल हैं। उन्होंने कामकोटी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनकी टिप्पणी को IIT मद्रास के निदेशक की ओर इशारा माना गया।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद बीजेपी नेताओं और शिक्षाविदों की ओर से आपत्ति जताई गई। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने इसे देश के प्रमुख वैज्ञानिकों में से एक का अपमान बताया और कामकोटी के अकादमिक योगदान का जिक्र किया।

इसके बाद 200 से अधिक शिक्षाविदों ने भी प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए उन्हें पत्र लिखा। शिक्षाविदों का कहना था कि किसी वैज्ञानिक या शिक्षाविद् के विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन बहस उसके काम और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए।

अब Change.org पर शुरू की गई ऑनलाइन याचिका को 14 हजार से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से हस्तक्षेप की मांग की गई है। समर्थकों का कहना है कि टिप्पणी वापस ली जानी चाहिए और इसके लिए खेद भी जताया जाना चाहिए।

अभियान चलाने वालों ने क्या कहा?

ऑनलाइन अभियान से जुड़े लोगों ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी को व्यक्तिगत और अपमानजनक बताया है। उनका तर्क है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल, सरकार या विचारधारा के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है।

अभियान का घोषित उद्देश्य संसद और सार्वजनिक जीवन में सम्मानजनक भाषा और तथ्यों पर आधारित बहस को बढ़ावा देना है। समर्थकों का कहना है कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के काम की आलोचना उनके शोध, विचारों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर की जानी चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत टिप्पणी के जरिए।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने भी प्रियंका गांधी की टिप्पणी को वैज्ञानिक और अकादमिक समुदाय के प्रति असम्मानजनक बताया था। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को राजनीतिक बहस से ऊपर रखा जाना चाहिए।

आखिर कामकोटी के ‘गोमूत्र’ बयान का मामला क्या है?

प्रियंका गांधी की टिप्पणी की पृष्ठभूमि जनवरी 2025 में सामने आए प्रो. वी. कामकोटी के एक बयान से जुड़ी है। उस समय एक कार्यक्रम में कामकोटी ने गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं और उन्होंने इससे जुड़े कुछ स्वास्थ्य लाभों का भी उल्लेख किया था।

कामकोटी ने अपने दावे के समर्थन में जून 2021 में Nature में प्रकाशित एक शोध पत्र का हवाला दिया था। उस शोध में गाय के मूत्र में मौजूद पेप्टाइड्स और उनकी संभावित जैविक गतिविधियों का अध्ययन किया गया था। शोधकर्ताओं ने E. coli और S. aureus के खिलाफ पेप्टाइड-मध्यस्थ एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि के प्रमाण मिलने की बात कही थी, लेकिन साथ ही अन्य संभावित जैविक गतिविधियों की पुष्टि के लिए और शोध की जरूरत भी बताई थी।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी पदार्थ में प्रयोगशाला स्तर पर कुछ जैविक गतिविधि पाए जाने का मतलब यह नहीं है कि वह किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज है। गोमूत्र के जरिए IBS जैसी बीमारी के इलाज के दावे को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण मजबूत नहीं हैं और मानवों पर पर्याप्त क्लिनिकल परीक्षणों के बिना इसे उपचार के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती।

कौन हैं प्रो. वी. कामकोटी?

प्रो. वी. कामकोटी IIT मद्रास के निदेशक हैं और कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनका लंबा अकादमिक और शोध अनुभव है। उन्होंने IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में MS और PhD की है और 2001 में संस्थान के फैकल्टी सदस्य बने थे। जनवरी 2022 में उन्होंने IIT मद्रास के निदेशक का पद संभाला। उनका विशेषज्ञता क्षेत्र कंप्यूटर आर्किटेक्चर, सूचना सुरक्षा और VLSI डिजाइन सहित कंप्यूटर विज्ञान के विभिन्न क्षेत्र हैं।

कामकोटी को केंद्र सरकार की शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़ी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में भी शामिल किया गया है। इस पैनल की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। पैनल का उद्देश्य देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार और उसे अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए सुझाव देना है।

राजनीतिक बयान से आगे वैज्ञानिक बहस की जरूरत

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के बयानों पर किस तरह बहस होनी चाहिए। कामकोटी के गोमूत्र संबंधी दावों पर वैज्ञानिक आधार को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं और उठाए भी गए हैं। दूसरी ओर, किसी वैज्ञानिक के किसी विवादित बयान के आधार पर उसके पूरे अकादमिक काम को खारिज करना भी उचित बहस का तरीका नहीं माना जा सकता।

फिलहाल विवाद का केंद्र प्रियंका गांधी की टिप्पणी और उसके बाद शुरू हुआ विरोध है। ऑनलाइन याचिका के जरिए हजारों लोगों ने लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, यह मामला राजनीति, विज्ञान और सार्वजनिक संवाद में भाषा की मर्यादा को लेकर एक बड़ी बहस में बदलता दिखाई दे रहा है।

 

 

Asmita Sarkar

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