
देश के स्कूलों में डिजिटल और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार लगातार हो रहा है, लेकिन डिजिटल पहुंच के मामले में अभी भी बड़ी कमी बनी हुई है। शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश के 67.4 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है। यानी करीब एक-तिहाई स्कूल अब भी इंटरनेट कनेक्टिविटी से बाहर हैं। हालांकि, पिछले एक साल में इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की हिस्सेदारी में 3.9 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है।
UDISE+ के आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों में कंप्यूटर की उपलब्धता भी बढ़ी है। 2025-26 में 69.9 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा थी, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा 64.7 प्रतिशत था। इससे साफ है कि स्कूलों में डिजिटल उपकरणों की पहुंच बढ़ रही है, लेकिन कंप्यूटर उपलब्ध कराने के बाद उन्हें इंटरनेट से जोड़ना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
तीन साल में इंटरनेट कनेक्टिविटी में 13.5 प्रतिशत अंक का सुधार
स्कूलों में इंटरनेट की पहुंच पिछले तीन वर्षों में लगातार बढ़ी है। 2023-24 में देश के 53.9 प्रतिशत स्कूल इंटरनेट से जुड़े थे। 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 63.5 प्रतिशत और 2025-26 में 67.4 प्रतिशत हो गया।
इस तरह 2023-24 से 2025-26 के बीच इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की हिस्सेदारी में 13.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, 67.4 प्रतिशत का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी करीब 32.6 प्रतिशत स्कूलों को इंटरनेट की सुविधा नहीं मिली है।
डिजिटल शिक्षा के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए यह अंतर महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, डिजिटल क्लासरूम, शैक्षणिक वीडियो और दूसरी इंटरनेट आधारित सेवाओं का फायदा तभी सभी छात्रों तक पहुंच सकता है, जब स्कूलों में स्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध हो।
कंप्यूटर वाले स्कूल 69.9 प्रतिशत तक पहुंचे
कंप्यूटर सुविधा के मामले में भी तस्वीर पहले की तुलना में बेहतर हुई है। UDISE+ के अनुसार 2023-24 में 57.2 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध थे। 2024-25 में यह हिस्सेदारी 64.7 प्रतिशत और 2025-26 में बढ़कर 69.9 प्रतिशत हो गई।
यानी दो वर्षों में कंप्यूटर सुविधा वाले स्कूलों की हिस्सेदारी में 12.7 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई। फिर भी करीब 30 प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जहां कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
यहां एक अहम बात सामने आती है। कंप्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता एक जैसी नहीं है। देश में 69.9 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर हैं, लेकिन इंटरनेट सुविधा केवल 67.4 प्रतिशत स्कूलों में है। इसका मतलब है कि कुछ स्कूलों में डिजिटल उपकरण तो पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें इंटरनेट से जोड़ना अभी बाकी है।
बिजली, पानी और टॉयलेट की सुविधा में भी सुधार
UDISE+ 2025-26 में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में भी सुधार दर्ज किया गया है। देश के 95 प्रतिशत स्कूलों में बिजली उपलब्ध है। लड़कियों के लिए टॉयलेट की सुविधा 98.5 प्रतिशत और लड़कों के लिए 97.2 प्रतिशत स्कूलों में है।
सुरक्षित पेयजल की सुविधा 99.5 प्रतिशत स्कूलों तक पहुंच चुकी है, जबकि 96.9 प्रतिशत स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध है। 2025-26 में 58.2 प्रतिशत स्कूलों में रैंप और हैंडरेल भी उपलब्ध थे, जो दिव्यांग छात्रों के लिए स्कूल तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
हालांकि, सभी सुविधाओं में समान गति से सुधार नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, खेल के मैदान की सुविधा 2024-25 के 83 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 81.9 प्रतिशत स्कूलों तक रह गई। वहीं पुस्तकालय की सुविधा 89.5 प्रतिशत से बढ़कर 90.5 प्रतिशत हुई है।
1 लाख से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक
स्कूलों की बुनियादी जरूरतों के साथ शिक्षक उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। UDISE+ 2025-26 के अनुसार देश में 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक है।
हालांकि पिछले साल की तुलना में इसमें कमी आई है। 2024-25 में ऐसे स्कूलों की संख्या 1,04,125 थी। यानी एक साल में सिंगल-टीचर स्कूलों की संख्या 3,282 कम हुई है।
कुल संख्या में कमी सकारात्मक संकेत है, लेकिन एक लाख से ज्यादा स्कूलों का सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चलना अब भी बड़ी चुनौती है। खासकर ऐसे स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने, विषयवार शिक्षा देने और शिक्षक की अनुपस्थिति की स्थिति में पढ़ाई जारी रखने की समस्या सामने आती है।
देश में 14.67 लाख स्कूल और 1.03 करोड़ शिक्षक
UDISE+ 2025-26 के मुताबिक भारत की स्कूल शिक्षा व्यवस्था का आकार बेहद बड़ा है। देश में करीब 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 24.72 करोड़ छात्र हैं। यह आंकड़े प्री-प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दर्शाते हैं।
शिक्षकों की संख्या पहली बार 1.03 करोड़ के स्तर को पार कर गई है। 2025-26 में देश में कुल 1,02,73,020 शिक्षक दर्ज किए गए। 2022-23 में यह संख्या 94,83,294 थी। यानी तीन वर्षों में शिक्षक संख्या में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
छात्र-शिक्षक अनुपात 24:1
रिपोर्ट के अनुसार देश का कुल प्यूपिल-टीचर रेशियो (PTR) 24:1 है। इसका मतलब औसतन 24 छात्रों पर एक शिक्षक है। यह अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के 30:1 के सुझाए गए स्तर के भीतर है।
हालांकि, राष्ट्रीय औसत की तस्वीर को हर स्कूल पर लागू नहीं किया जा सकता। अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता काफी अलग हो सकती है। सिंगल-टीचर स्कूलों का आंकड़ा इसी अंतर की ओर इशारा करता है।
डिजिटल शिक्षा के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती क्या?
UDISE+ 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि भारत के स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। कंप्यूटर और इंटरनेट दोनों की उपलब्धता पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर हुई है। लेकिन अभी भी लाखों स्कूल इंटरनेट सुविधा से बाहर हैं।
ऐसे में आगे की चुनौती सिर्फ स्कूलों में कंप्यूटर पहुंचाने तक सीमित नहीं है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की लगातार उपलब्धता, डिजिटल उपकरणों का सही इस्तेमाल और शिक्षकों को तकनीक आधारित पढ़ाई के लिए तैयार करना भी जरूरी होगा।
सरकार की समग्र शिक्षा, STARS और PM SHRI जैसी योजनाओं के तहत UDISE+ में सामने आए बुनियादी ढांचे के अंतर के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में ICT, डिजिटल क्लासरूम, बिजली, टॉयलेट, पानी और अन्य सुविधाएं मजबूत करने के लिए सहायता दी जाती है।
कुल मिलाकर UDISE+ 2025-26 की तस्वीर मिश्रित है। स्कूलों में इंटरनेट, कंप्यूटर, बिजली, पानी और टॉयलेट जैसी सुविधाएं बढ़ी हैं और शिक्षकों की संख्या भी एक करोड़ के पार पहुंची है। लेकिन 32.6 प्रतिशत स्कूलों का इंटरनेट से बाहर होना और 1 लाख से ज्यादा स्कूलों का एक शिक्षक के भरोसे चलना बताता है कि देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल और मानव संसाधन से जुड़ी कई चुनौतियां अभी बाकी हैं।




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