
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 11 और 12 की राजनीतिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए अपनी Textbook Development Team का पुनर्गठन किया है। नई टीम को पाठ्यपुस्तकों में भारतीय संदर्भ, भारतीय ज्ञान परंपरा, समावेशिता और नई शिक्षण पद्धतियों से जुड़े पहलुओं को शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। NCERT की मौजूदा पाठ्यचर्या व्यवस्था में भी कक्षा 11 और 12 के लिए इतिहास, भूगोल, राजनीतिक विज्ञान और मनोविज्ञान की नई सामग्री तैयार करने का प्रावधान है।
नई टीम में शिक्षाविदों और अलग-अलग विश्वविद्यालयों से जुड़े विशेषज्ञों के साथ ऐसे कुछ नाम भी शामिल हैं, जिनके RSS, ABVP या उससे जुड़े संगठनों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध बताए जाते हैं। इसे लेकर राजनीतिक शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों की दिशा को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, किसी व्यक्ति के किसी संगठन से पूर्व जुड़ाव का उल्लेख अपने आप में यह साबित नहीं करता कि नई किताबों में किसी खास राजनीतिक विचारधारा को शामिल किया जाएगा।
संदीप शास्त्री करेंगे टीम की अगुवाई
नई Textbook Development Team का नेतृत्व शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री करेंगे। वह कर्नाटक स्थित Nitte Deemed to be University के उपाध्यक्ष हैं।
टीम को कक्षा 11 की राजनीतिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक तैयार करने का काम नवंबर 2026 तक, जबकि कक्षा 12 की किताब तैयार करने का लक्ष्य जुलाई 2027 रखा गया है।
NCERT की ओर से जारी व्यवस्था के अनुसार टीम को सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, पर्यावरण शिक्षा, नवाचार आधारित शिक्षण और शिक्षण-अधिगम सामग्री से जुड़े विशेषज्ञ समूहों से भी मार्गदर्शन लेना होगा।
यदुनाथ देशपांडे से लेकर वंदना मिश्रा तक कई नाम चर्चा में
नई टीम में यदुनाथ देशपांडे, प्रशांत दिवेकर, वंदना मिश्रा और रवि रमेशचंद्र शुक्ला के नाम खास तौर पर चर्चा में हैं।
यदुनाथ देशपांडे NCERT से जुड़े अन्य शैक्षणिक कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। NCERT की हालिया पुस्तकों में उन्हें विभिन्न पाठ्य सामग्री के लिए वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर धन्यवाद दिया गया है। उदाहरण के लिए, कक्षा 8 की ‘Kaushal Bodh’ सामग्री में उनका नाम Senior Consultant के रूप में दर्ज है।
रिपोर्टों में देशपांडे के ABVP से पुराने जुड़ाव और BJP से जुड़े राजनीतिक सलाहकार के रूप में उनके LinkedIn प्रोफाइल का उल्लेख किया गया है। वहीं, प्रशांत दिवेकर का पुणे की ज्ञान प्रबोधिनी से जुड़ाव बताया गया है। उनकी प्रोफाइल में भारतीय शिक्षा दर्शन पर जोर देने और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा से जुड़े काम का उल्लेख मिलता है।
वंदना मिश्रा JNU के Centre for Political Studies से जुड़ी प्रोफेसर हैं और उनके ABVP से पूर्व संबंध का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। इसी तरह JNU के Centre for Comparative Politics and Political Theory से जुड़े रवि रमेशचंद्र शुक्ला का नाम भी टीम में शामिल है। उनके पूर्व शैक्षणिक और संपादकीय कार्यों का संबंध ऐसे संस्थानों से बताया गया है जिन्हें RSS के व्यापक संगठनात्मक नेटवर्क से जोड़ा जाता है।
टीम में कई विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ
नई टीम केवल इन्हीं सदस्यों तक सीमित नहीं है। इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रकाश कंडपाल, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की नीधि गुप्ता, चाणक्य विश्वविद्यालय के चेतन सिंघई, दिल्ली विश्वविद्यालय की सुकांशिका वत्स, IGNOU के सतीश कुमार, राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय के दिवांशु श्रीवास्तव, Jindal Global Law School के प्रणव गुप्ता, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के नंद किशोर और उत्कल विश्वविद्यालय की स्वप्ना प्रभु शामिल हैं।
इसके अलावा NCERT की सविता सागर, बेंगलुरु स्थित सरकारी प्रथम श्रेणी कॉलेज के एमएन सुरेश कुमार, नवी मुंबई महानगरपालिका स्कूल की डायना इसाबेल और SHVNMR Government Girls Pre-University College की एन भारणी भी टीम का हिस्सा हैं।
NCERT के वंथंगपुई खोबुंग और सुभाष सिंह को क्रमशः सदस्य समन्वयक और सह-समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर रहेगा जोर
NCERT पिछले कुछ वर्षों में पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और भारतीय संदर्भ को शामिल करने पर जोर देता रहा है। नई पाठ्यपुस्तक टीम के लिए भी भारतीय ज्ञान प्रणालियों, समावेशिता और नवाचार आधारित शिक्षण जैसे विषयों को ध्यान में रखने की व्यवस्था की गई है।
हालांकि, राजनीतिक विज्ञान की किताबों में बदलाव को लेकर सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि संविधान, लोकतंत्र, राजनीतिक दल, सामाजिक आंदोलन, चुनाव, केंद्र-राज्य संबंध और स्वतंत्रता के बाद भारत की राजनीति जैसे विषयों को किस तरह प्रस्तुत किया जाता है।
NCERT की मौजूदा कक्षा 12 राजनीतिक विज्ञान की किताबें लंबे समय से इन विषयों को पढ़ाने का प्रमुख आधार रही हैं। मौजूदा किताबों में भी संवेदनशील राजनीतिक विषयों पर विशेषज्ञों की समीक्षा और कई स्तरों पर जांच की प्रक्रिया अपनाए जाने का उल्लेख है।
नई किताबों पर रहेगी नजर
नई टीम के गठन के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कक्षा 11 और 12 की राजनीतिक विज्ञान की किताबों में कितना बदलाव किया जाएगा और भारतीय ज्ञान परंपरा तथा सांस्कृतिक संदर्भों को किस रूप में शामिल किया जाएगा।
टीम के सामने एक तरफ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय संदर्भ से जुड़े लक्ष्यों को पाठ्यक्रम में जगह देने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक विज्ञान जैसे संवेदनशील विषय में तथ्यात्मकता, संतुलन और विभिन्न विचारों की उचित प्रस्तुति बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
कक्षा 11 की नई किताब नवंबर 2026 तक और कक्षा 12 की किताब जुलाई 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है। इसलिए आने वाले महीनों में तैयार होने वाले ड्राफ्ट और उसमें शामिल विषयों पर छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों की खास नजर रहेगी।




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