
मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने सभी स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों को तीन दिन के लिए बंद रखने का फैसला किया है। शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थान 20 अगस्त से 22 अगस्त 2026 तक बंद रहेंगे। सरकार ने यह फैसला मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिया है।
यह आदेश सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा। इसमें माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद, CBSE या अन्य बोर्ड से जुड़े स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज और विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।
NRC की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज
मणिपुर में Campaign for Just and Fair Delimitation (JFD) की ओर से 48 घंटे के आम बंद का आह्वान किया गया है। संगठन की मुख्य मांग है कि 2027 की जनगणना से पहले राज्य में NRC को अपडेट किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि NRC के जरिए राज्य में लंबे समय से रह रहे लोगों की नागरिकता और पहचान से जुड़ी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
बुधवार को बंद के दूसरे दिन मणिपुर के घाटी वाले जिलों में कई जगह प्रदर्शन और रैलियां हुईं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक नेताओं के पुतले भी जलाए। रिपोर्टों के मुताबिक इंफाल पूर्व के खुरई लामलोंग इलाके में मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाए गए।
JFD ने गुरुवार से सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का भी आह्वान किया है। इससे राज्य में सामान्य कामकाज प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
‘No NRC, No Census’ की मांग
NRC को लेकर विरोध अब जनगणना से भी जुड़ गया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले NRC अपडेट किया जाए। इसी मांग के तहत प्रदर्शनकारियों ने ‘No NRC, No Census’ का नारा भी दिया है।
14 अगस्त को बिष्णुपुर जिले के मोइरांग कॉलेज में जनगणना कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी प्रदर्शनकारियों ने बाधित किया था। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने के बाद प्रशिक्षण में शामिल कर्मचारियों को परिसर से बाहर जाना पड़ा था।
क्यों हो रही है NRC की मांग?
NRC यानी National Register of Citizens का उद्देश्य किसी राज्य में नागरिकों की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड को तैयार करना है। मणिपुर में NRC की मांग करने वाले समूहों का कहना है कि इससे कथित अवैध प्रवासियों की पहचान करने में मदद मिलेगी और राज्य के मूल निवासियों से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट किया जा सकेगा।
मणिपुर में यह मुद्दा खास तौर पर संवेदनशील है क्योंकि राज्य लंबे समय से जातीय तनाव और हिंसा से प्रभावित रहा है। NRC की मांग को लेकर अलग-अलग समुदायों के बीच मतभेद भी हैं। मेइतेई संगठनों की ओर से अवैध प्रवासियों की पहचान की मांग की जाती रही है, जबकि कुकी संगठनों की ओर से NRC की प्रक्रिया को लेकर अलग चिंताएं और आरोप सामने आते रहे हैं। इसलिए इस मुद्दे को लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक विवाद बना हुआ है।
जनगणना से पहले NRC क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
मणिपुर में NRC और जनगणना को लेकर विवाद का एक बड़ा कारण आबादी और प्रतिनिधित्व से जुड़ा सवाल है। JFD समेत NRC समर्थक समूहों का तर्क है कि अगर राज्य में आबादी का सही रिकॉर्ड तैयार करना है तो पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि कौन राज्य का नागरिक है और कौन नहीं।
वहीं, जनगणना देशभर में आबादी से जुड़ा आधिकारिक आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया है। मणिपुर में इसी प्रक्रिया से पहले NRC अपडेट करने की मांग को लेकर विरोध तेज हुआ है।
असम का NRC मॉडल भी चर्चा में
NRC को लेकर मणिपुर में असम का उदाहरण भी दिया जा रहा है। असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में NRC की प्रक्रिया पूरी की गई थी और अंतिम सूची 2019 में प्रकाशित हुई थी। हालांकि असम का NRC भी विवादों से पूरी तरह मुक्त नहीं रहा और इसके बाद भी कई कानूनी और राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं।
मणिपुर में NRC की मांग को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। फिलहाल राज्य सरकार ने प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए शैक्षणिक संस्थानों को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया है। 20 से 22 अगस्त तक स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद रहने के बाद आगे की स्थिति सरकार के अगले आदेश पर निर्भर करेगी।




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