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Ranchi University PhD Admission 2026: Four-Year Graduates With 75% Can Apply Directly for PhD

Ranchi University में 75% वाले 4-Year Graduation छात्रों को सीधे PhD का मौका, नए नियम लागू

Ranchi University PhD Admission 2026: Four-Year Graduates With 75% Can Apply Directly for PhD

नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को उच्च शिक्षा और रिसर्च से जोड़ने की दिशा में रांची यूनिवर्सिटी ने PhD प्रवेश के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों में चार वर्षीय ग्रेजुएशन में 75 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए मास्टर डिग्री के बिना PhD के लिए आवेदन का रास्ता खुला है।

यूनिवर्सिटी ने करीब डेढ़ दशक बाद PhD से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधान UGC के PhD से जुड़े नियमों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। हालांकि, छात्रों को आवेदन से पहले संबंधित विषय, प्रवेश प्रक्रिया और उस साल जारी होने वाली यूनिवर्सिटी की आधिकारिक अधिसूचना में पात्रता शर्तों की पुष्टि करनी होगी।

चार साल की ग्रेजुएशन के बाद सीधे PhD का विकल्प

नए नियमों का सबसे बड़ा बदलाव चार वर्षीय स्नातक डिग्री वाले विद्यार्थियों से जुड़ा है। जिन छात्रों ने चार वर्षीय ग्रेजुएशन कार्यक्रम में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं, वे मास्टर डिग्री किए बिना PhD के लिए पात्र हो सकते हैं।

यह बदलाव NEP 2020 में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को रिसर्च से जोड़ने की व्यवस्था के अनुरूप है। इसका मतलब यह है कि योग्य छात्र ग्रेजुएशन के बाद सीधे रिसर्च की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

हालांकि, सिर्फ 75 प्रतिशत अंक हासिल करना PhD में सीधे प्रवेश की गारंटी नहीं है। प्रवेश के लिए यूनिवर्सिटी की चयन प्रक्रिया और संबंधित विषय में उपलब्ध सीटों की शर्तें भी लागू होंगी।

पोस्ट ग्रेजुएशन वालों के लिए 55% अंक जरूरी

जिन उम्मीदवारों के पास मास्टर डिग्री है, उनके लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक की पात्रता रखी गई है। MPhil जैसी पुरानी शोध योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए भी नियमों में प्रावधान किया गया है।

आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, यानी संबंधित पात्रता में 55 प्रतिशत की जगह 50 प्रतिशत अंक मान्य होंगे, जहां नियम लागू होते हैं।

इन उम्मीदवारों को PhD प्रवेश के लिए निर्धारित प्रवेश परीक्षा और आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल होना होगा।

NET-JRF उम्मीदवारों को प्रवेश परीक्षा से छूट

नए नियमों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़े उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। NET और JRF योग्य उम्मीदवारों को यूनिवर्सिटी की PhD प्रवेश परीक्षा से छूट दी जाएगी।

ऐसे उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। इससे NET-JRF क्वालिफाई कर चुके अभ्यर्थियों के लिए PhD प्रवेश की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो सकती है।

हालांकि, NET/JRF की किस श्रेणी और किस विषय में योग्यता संबंधित PhD सीट के लिए मान्य होगी, यह प्रवेश अधिसूचना में देखना जरूरी होगा।

PhD प्रवेश परीक्षा में 70:30 का वेटेज

जो उम्मीदवार यूनिवर्सिटी की PhD प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिला लेना चाहते हैं, उनके चयन में प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू का वेटेज 70:30 रखा गया है।

प्रवेश परीक्षा में रिसर्च मेथडोलॉजी और संबंधित विषय दोनों को शामिल किया जाएगा। परीक्षा के 50 प्रतिशत सवाल रिसर्च मेथडोलॉजी और 50 प्रतिशत संबंधित विषय से पूछे जाने का प्रावधान है।

इस व्यवस्था से उम्मीदवार की विषय की समझ के साथ-साथ रिसर्च करने की तैयारी का भी आकलन किया जाएगा।

PhD में दाखिले के बाद 12 क्रेडिट का कोर्सवर्क

PhD में प्रवेश मिलने के बाद शोधार्थियों को 12 क्रेडिट का कोर्सवर्क पूरा करना होगा। PhD के शुरुआती चरण में कोर्सवर्क का उद्देश्य शोधार्थियों को रिसर्च मेथडोलॉजी, अकादमिक लेखन और संबंधित शोध क्षेत्र की जरूरी जानकारी देना है।

कोर्सवर्क पूरा करना PhD की आगे की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

PhD पूरी करने के लिए छह साल की समय सीमा

नए नियमों में PhD पूरी करने की अवधि को भी स्पष्ट किया गया है। सामान्य रूप से शोधार्थी को PhD की डिग्री कम से कम तीन वर्ष में पूरी करनी होगी। अधिकतम अवधि छह वर्ष रखी गई है।

इसके अलावा रि-रजिस्ट्रेशन के प्रावधान के तहत कुछ परिस्थितियों में शोध पूरा करने के लिए कुल अवधि आठ वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।

महिला शोधार्थियों और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों के लिए अतिरिक्त समय का प्रावधान भी किया गया है। ऐसे शोधार्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार दो वर्ष तक अतिरिक्त समय मिल सकता है।

महिला शोधार्थियों के लिए 240 दिन तक मातृत्व या चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान भी नए नियमों में शामिल किया गया है।

NEP 2020 के तहत बदल रही है PhD की राह

रांची यूनिवर्सिटी का यह बदलाव उच्च शिक्षा में हो रहे व्यापक बदलावों से जुड़ा है। NEP 2020 ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को अधिक लचीला बनाने और रिसर्च के अवसरों को मजबूत करने पर जोर दिया है।

UGC के PhD से जुड़े नियमों में भी चार वर्षीय स्नातक डिग्री के बाद निर्धारित अंकों के साथ PhD में प्रवेश का प्रावधान है। इसलिए रांची यूनिवर्सिटी के नए नियमों में चार वर्षीय ग्रेजुएशन वाले छात्रों को सीधे PhD के लिए पात्र बनाने का प्रावधान इसी बदलाव की दिशा में देखा जा रहा है।

छात्रों के लिए क्या बदला?

नए नियमों से चार वर्षीय ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उन्हें हर स्थिति में पहले मास्टर डिग्री करने की जरूरत नहीं होगी। यदि वे निर्धारित अंकों के साथ चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम पूरा करते हैं, तो वे PhD प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं।

वहीं मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवारों के लिए 55 प्रतिशत अंक की पात्रता, आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित छूट, NET-JRF उम्मीदवारों के लिए प्रवेश परीक्षा से छूट और प्रवेश परीक्षा में 70:30 का चयन वेटेज महत्वपूर्ण बदलाव हैं।

इससे रांची यूनिवर्सिटी में PhD प्रवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट और अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए खुली हो सकती है। हालांकि अंतिम पात्रता, विषयवार सीट और प्रवेश की तारीखों के लिए उम्मीदवारों को यूनिवर्सिटी की आधिकारिक अधिसूचना देखनी चाहिए।

 

 

Asmita Sarkar

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