
राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और पात्रता परीक्षाएं कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अपनी परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। परीक्षा प्रक्रिया में लगातार सामने आई कमियों और सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने NTA के पूरे परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और गोपनीय कामकाज की समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
ताजा बदलावों के तहत करीब 600 परीक्षा विशेषज्ञों को मौजूदा पैनल से हटाया गया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को जोड़ा जा रहा है। प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता जांचने के लिए चार स्तर की जांच व्यवस्था भी लागू की जा रही है। इसके अलावा NTA में अगले कुछ हफ्तों में 20 से 25 नए अधिकारियों को शामिल करने की योजना है।
ये बदलाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब NTA को देश की बड़ी परीक्षाओं के संचालन, प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और परीक्षा सुरक्षा को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है।
NTA में स्थायी और विशेषज्ञ टीम मजबूत करने की तैयारी
NTA अब परीक्षा संचालन से जुड़े कामों के लिए ज्यादा मजबूत पेशेवर टीम तैयार करने पर जोर दे रहा है। जुलाई में एजेंसी ने कई वरिष्ठ पदों के लिए भर्ती शुरू की थी। इनमें Assessment, Research & Development and Psychometrics, Test Centre Network & Operations, Information Security और Vigilance, Investigation & Forensics जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं।
NTA ने मई 2026 में भी वरिष्ठ स्तर पर Chief Technology Officer, Chief Finance Officer और General Manager-HR जैसे पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी थी। एजेंसी के अनुसार इसका मकसद परीक्षा संचालन, तकनीक, वित्तीय प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और मानव संसाधन व्यवस्था को मजबूत करना है।
ताजा समीक्षा के बाद करीब 20 से 25 अधिकारियों के अगले दो से तीन सप्ताह में शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। NTA आगे भी अलग-अलग विभागों में विशेषज्ञों की नियुक्ति करने की तैयारी कर रहा है।
600 विशेषज्ञों को हटाया गया, नई टीम होगी तैयार
NTA की परीक्षा टीम में बड़ा बदलाव करते हुए करीब 600 विशेषज्ञों को मौजूदा व्यवस्था से हटाया गया है। उनकी जगह नए विशेषज्ञों को औपचारिक प्रक्रिया के जरिए जोड़ा जा रहा है। इनमें परीक्षा तैयार करने, साइबर सुरक्षा, साइकोमेट्रिक्स और प्रश्नपत्रों की समीक्षा जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल किए जा रहे हैं।
यहां यह समझना जरूरी है कि 600 विशेषज्ञों का आंकड़ा NTA के नियमित सरकारी कर्मचारियों की संख्या नहीं है। ये परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञ और पैनल सदस्य हैं। NTA की नियमित स्वीकृत पदों की व्यवस्था इससे अलग है।
एजेंसी प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह है कि परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और काम किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह पर निर्भर न रहे।
प्रश्नपत्रों की चार स्तर पर होगी जांच
NTA सुधारों में सबसे अहम बदलावों में से एक प्रश्नपत्रों की चार स्तर पर जांच है। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की कई चरणों में समीक्षा की जाएगी, ताकि गलत तथ्य, भाषा, टाइपिंग, सवाल की संरचना या दूसरी कमियां समय रहते पकड़ी जा सकें।
इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि प्रश्नपत्र में एक छोटी गलती भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकती है। खासकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में एक गलत या अस्पष्ट सवाल से उत्तर कुंजी, परिणाम और उम्मीदवारों की रैंकिंग तक पर असर पड़ सकता है।
NTA पहले से ही प्रश्न तैयार करने और उनकी समीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों और परीक्षा विशेषज्ञों की व्यवस्था का इस्तेमाल करता रहा है। अब नई चार-स्तरीय व्यवस्था का उद्देश्य इन जांचों को और स्पष्ट तथा सख्त बनाना है।
शिक्षा मंत्रालय ने पूरे परीक्षा सिस्टम के ऑडिट का दिया निर्देश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने NTA की समीक्षा के दौरान परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने एजेंसी को पूरी परीक्षा प्रक्रिया का विस्तृत ऑडिट करने और किए गए सुधारों की रिपोर्ट देने को कहा है।
इसमें परीक्षा के अलग-अलग चरणों—प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई, लॉजिस्टिक्स, परीक्षा केंद्र और संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा—की समीक्षा शामिल है।
NTA में पहले ही हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी की सिफारिशों के आधार पर संस्थागत सुधारों की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। सरकार ने 2024 में गठित K. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की 101 सिफारिशों को स्वीकार किया था, जिनमें NTA की क्षमता और परीक्षा सुरक्षा मजबूत करने से जुड़े कई सुझाव शामिल थे।
सरकारी परिसर में शिफ्ट होंगे NTA के कार्यालय
NTA के कार्यालयों को नए सरकारी परिसर में स्थानांतरित करने की भी तैयारी चल रही है। नई व्यवस्था में सुरक्षा को पहले से ज्यादा मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्यालयों में सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती की योजना है।
इसके साथ संवेदनशील परीक्षा कार्यों तक पहुंच को सीमित करने के लिए बायोमेट्रिक एक्सेस, CCTV निगरानी और बेहतर डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसका सीधा उद्देश्य परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों और सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच की संभावना को कम करना है।
गोपनीय परीक्षा संचालन में भी बदलाव
शिक्षा मंत्रालय ने NTA के Confidential Operations (CONOPS) की पूरी व्यवस्था में बदलाव के निर्देश दिए हैं। इसके तहत संवेदनशील परीक्षा संबंधी कामों के लिए अलग कमरे, इंटरनेट से अलग यानी air-gapped systems और मोबाइल या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जमा कराने जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य उन जगहों और प्रणालियों पर नियंत्रण बढ़ाना है जहां परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी तैयार या संभाली जाती है।
साइबर सुरक्षा को भी सुधार योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है। NTA ने सूचना सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ पद के लिए General Manager स्तर पर भर्ती शुरू की है, जो एजेंसी में Chief Information Security Officer की भूमिका भी संभालेगा।
उम्मीदवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?
NTA देश की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं आयोजित करता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव सीधे लाखों उम्मीदवारों पर असर डाल सकता है।
चार स्तर की प्रश्नपत्र जांच से सवालों में गलती की संभावना कम करने की कोशिश है। वहीं नई विशेषज्ञ टीम, बेहतर साइबर सुरक्षा और संवेदनशील कामों के लिए अलग सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा की गोपनीयता और विश्वसनीयता बढ़ाना है।
हालांकि, इन सुधारों का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा जब नई व्यवस्था लगातार और समान तरीके से लागू हो। उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि परीक्षा की तारीख, आवेदन, केंद्र, उत्तर कुंजी और परिणाम जैसी प्रक्रियाओं में स्पष्ट और समय पर जानकारी मिलती रहे।
NTA में शुरू किया गया यह बदलाव केवल कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसका मकसद प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा के संचालन तक पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में इन सुधारों को किस तरह लागू किया जाता है और क्या इससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गलतियों और सुरक्षा संबंधी शिकायतों में वास्तविक कमी आती है।




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