
कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में रैगिंग की घटनाओं को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने सभी हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (HEIs) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। UGC ने 19 अगस्त 2026 को जारी पत्र में संस्थानों से UGC Regulations on Curbing the Menace of Ragging in Higher Educational Institutions, 2009 को पूरी तरह लागू करने और रैगिंग के खिलाफ Zero Tolerance Policy अपनाने को कहा है।
UGC का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब देशभर में नए शैक्षणिक सत्र के दौरान बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज और यूनिवर्सिटी में दाखिला लेते हैं। आयोग ने संस्थानों को केवल नियम बनाने तक सीमित रहने के बजाय कैंपस में उनकी प्रभावी निगरानी और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
कॉलेजों को मजबूत करनी होगी Anti-Ragging व्यवस्था
UGC के 2009 के नियम सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, डीम्ड यूनिवर्सिटी और अन्य हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस पर लागू होते हैं। इन नियमों का दायरा केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं है, बल्कि हॉस्टल, कैंटीन, खेल परिसर, दूसरे आवासीय क्षेत्र और संस्थान से जुड़े अन्य परिसरों तक भी है।
संस्थानों को कैंपस में Anti-Ragging Committee और Anti-Ragging Squad जैसी व्यवस्था प्रभावी रूप से संचालित करनी होगी। नए छात्रों और उनके अभिभावकों को रैगिंग से जुड़े नियमों की जानकारी देने के साथ जरूरी जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित करनी होंगी।
रैगिंग की रोकथाम के लिए हॉस्टल और ऐसे स्थानों पर खास निगरानी रखने की जरूरत है, जहां इस तरह की घटनाओं की आशंका अधिक हो सकती है। UGC की Zero Tolerance Policy का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रैगिंग की कोई भी घटना छोटी या बड़ी मानकर नजरअंदाज न की जाए। UGC के अनुसार, रैगिंग का कोई भी रूप स्वीकार्य नहीं है।
छात्रों और अभिभावकों को देनी होगी Anti-Ragging Undertaking
Anti-Ragging व्यवस्था के तहत छात्रों और उनके माता-पिता या अभिभावकों से एंटी-रैगिंग undertaking लेने की व्यवस्था भी है। National Anti-Ragging Portal के अनुसार, यह undertaking ऑनलाइन दर्ज की जाती है और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है।
इसका उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों को रैगिंग से जुड़े नियमों और इसके खिलाफ संस्थान की जिम्मेदारी के बारे में पहले से जानकारी देना है। कॉलेजों को कैंपस में एंटी-रैगिंग नियमों और शिकायत के तरीकों की जानकारी भी आसानी से उपलब्ध करानी चाहिए।
24×7 Anti-Ragging Helpline पर कर सकते हैं शिकायत
अगर किसी छात्र को कॉलेज या यूनिवर्सिटी में रैगिंग का सामना करना पड़ता है, तो वह National Anti-Ragging Helpline 1800-180-5522 पर संपर्क कर सकता है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन 24 घंटे उपलब्ध है। UGC ने भी अपनी वेबसाइट पर इसी हेल्पलाइन नंबर को जारी किया है।
छात्र National Anti-Ragging Portal के जरिए ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने और उसके बाद कार्रवाई की स्थिति से जुड़ी जानकारी रखने की सुविधा उपलब्ध है।
छात्र अपने संस्थान की Anti-Ragging Committee या Anti-Ragging Squad को भी शिकायत दे सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद संस्थान की जिम्मेदारी है कि मामले की जांच करे और नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई करे।
रैगिंग की शिकायत में कौन-सी जानकारी दें?
शिकायत दर्ज करते समय घटना से जुड़ी ज्यादा से ज्यादा स्पष्ट जानकारी देना उपयोगी होता है। छात्र, जहां संभव हो, घटना की तारीख, समय, स्थान, शामिल लोगों की जानकारी और घटना में क्या हुआ जैसी जानकारी दे सकते हैं।
अगर घटना से संबंधित कोई मैसेज, फोटो, वीडियो, ऑडियो, स्क्रीनशॉट या अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो उसे सुरक्षित रखना भी उपयोगी हो सकता है। ऐसी जानकारी जांच के दौरान मामले को समझने में मदद कर सकती है।
हालांकि, सबूत उपलब्ध न होने की स्थिति में भी छात्र शिकायत करने से पीछे न हटें। रैगिंग का सामना करने वाले छात्र को अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संस्थान या एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन से सहायता लेनी चाहिए।
रैगिंग साबित होने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
UGC के एंटी-रैगिंग नियमों का उद्देश्य रैगिंग को रोकना और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है। नियमों में रैगिंग को रोकने के लिए संस्थान की जिम्मेदारियां और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान दिया गया है।
UGC की Zero Tolerance Policy का अर्थ है कि किसी भी रैगिंग की घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आयोग की आधिकारिक FAQ में स्पष्ट किया गया है कि रैगिंग का कोई भी रूप स्वीकार्य नहीं है और संस्थानों को ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई करनी चाहिए।
इसलिए कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए यह केवल नए छात्रों को नियम बताने का मामला नहीं है। संस्थानों को शिकायत की व्यवस्था, निगरानी, जागरूकता और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई—इन सभी स्तरों पर अपनी व्यवस्था सक्रिय रखनी होगी।
छात्रों के लिए जानना जरूरी है ये बातें
रैगिंग को कॉलेज जीवन का सामान्य हिस्सा मानना सही नहीं है। किसी छात्र को डराना, अपमानित करना, परेशान करना या किसी तरह का मानसिक या शारीरिक दबाव बनाना गंभीर मामला हो सकता है। UGC के नियमों का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों को रोकना और छात्रों को सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देना है।
नए शैक्षणिक सत्र में कॉलेज पहुंचने वाले छात्रों को अपने संस्थान की Anti-Ragging Committee और Squad की जानकारी रखनी चाहिए। साथ ही 1800-180-5522 नंबर सेव रखना भी उपयोगी है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता ली जा सके।
UGC का ताजा निर्देश यह भी साफ करता है कि रैगिंग रोकने की जिम्मेदारी केवल छात्र की नहीं, बल्कि पूरे संस्थान की है। कॉलेजों और यूनिवर्सिटी को नियमों का पालन कराने के साथ ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां छात्र बिना डर के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।




Add comment