
भारत का हायर एजुकेशन सिस्टम पिछले एक दशक में तेजी से बड़ा हुआ है। देश में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की संख्या बढ़ी है, ज्यादा छात्र उच्च शिक्षा तक पहुंचे हैं और PhD, इंटीग्रेटेड प्रोग्राम तथा STEM जैसे क्षेत्रों में भी भागीदारी बढ़ी है। लेकिन इस विस्तार के बीच एक अहम सवाल अब भी बना हुआ है—क्या शिक्षकों की संख्या छात्रों की बढ़ती संख्या के हिसाब से बढ़ी है?
ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन (AISHE) 2023-24 के आंकड़ों से पता चलता है कि 2014-15 से 2023-24 के बीच भारत में हायर एजुकेशन में कुल नामांकन 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ हो गया। यानी करीब 1.08 करोड़ छात्रों की बढ़ोतरी हुई और कुल नामांकन में 31.5 फीसदी का इजाफा हुआ। इसी अवधि में देश में उच्च शिक्षा के संस्थानों का नेटवर्क भी काफी बढ़ा।
वहीं, 2023-24 में हायर एजुकेशन संस्थानों में कुल शिक्षकों की संख्या 17.32 लाख रही। यानी शिक्षक संख्या भी बढ़ी है, लेकिन छात्रों की संख्या जिस गति से बढ़ी है, उसके मुकाबले शिक्षकों की बढ़ोतरी कम रही। यही वजह है कि बढ़ती छात्र संख्या के साथ शिक्षक-छात्र अनुपात पर दबाव दिखाई देता है।
10 साल में 529 यूनिवर्सिटी और करीब 9,700 कॉलेज बढ़े
हायर एजुकेशन में छात्रों की बढ़ती संख्या के पीछे देश में संस्थानों के विस्तार की बड़ी भूमिका रही है। AISHE के अनुसार, 2014-15 में यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी स्तर के संस्थानों की संख्या 760 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1,289 हो गई। यानी करीब 10 साल में 529 संस्थान बढ़े और कुल संख्या में 69.6 फीसदी की वृद्धि हुई।
इसी दौरान कॉलेजों की संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई। यानी करीब 9,748 कॉलेज बढ़े और कुल संख्या में 25.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या भी 12,276 से बढ़कर 15,221 हो गई, जो करीब 24 फीसदी की वृद्धि है।
इस विस्तार का मतलब है कि हायर एजुकेशन का नेटवर्क अब पहले से ज्यादा बड़ा हो चुका है। हालांकि, केवल संस्थानों की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है। इन संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक, बेहतर सुविधाएं और अच्छी पढ़ाई उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
3.42 करोड़ से 4.50 करोड़ हुआ हायर एजुकेशन में नामांकन
AISHE 2023-24 के मुताबिक, देश में हायर एजुकेशन में कुल छात्रों की संख्या 2014-15 के 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गई। यह एक दशक में 31.5 फीसदी की वृद्धि है।
इसी अवधि में हायर एजुकेशन का Gross Enrolment Ratio यानी GER भी 23.7 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी हो गया। GER 18 से 23 वर्ष की आयु के युवाओं में हायर एजुकेशन में नामांकन की स्थिति को दर्शाता है। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 2035 तक हायर एजुकेशन का GER 50 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में संस्थानों के विस्तार के साथ शिक्षकों और दूसरी शैक्षणिक सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ेगी।
PhD में करीब तीन गुना बढ़ी छात्रों की संख्या
पिछले 10 साल में हायर एजुकेशन के अलग-अलग स्तरों पर छात्रों की संख्या में भी बड़ा बदलाव आया है। सबसे तेज बढ़ोतरी PhD स्तर पर दर्ज की गई है।
AISHE के अनुसार, 2014-15 में देश में करीब 1.17 लाख छात्र PhD कर रहे थे। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 3.43 लाख हो गई। यानी PhD में नामांकन करीब 193 फीसदी बढ़ा और छात्रों की संख्या लगभग तीन गुना हो गई।
पोस्टग्रेजुएट स्तर पर छात्रों की संख्या 38.53 लाख से बढ़कर 57.85 लाख हुई, जो करीब 50 फीसदी की वृद्धि है। वहीं अंडरग्रेजुएट स्तर पर नामांकन 2.71 करोड़ से बढ़कर 3.45 करोड़ हो गया, यानी करीब 27.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
डिप्लोमा में छात्रों की संख्या 25.08 लाख से बढ़कर 33.15 लाख और सर्टिफिकेट कोर्स में 1.70 लाख से बढ़कर 2.08 लाख हुई।
इंटीग्रेटेड कोर्स में 300 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी
पिछले दशक में इंटीग्रेटेड कोर्स भी छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। 2014-15 में इन प्रोग्राम में करीब 1.41 लाख छात्र नामांकित थे। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 5.69 लाख हो गई। यानी करीब 301 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इंटीग्रेटेड प्रोग्राम छात्रों को एक ही पाठ्यक्रम में UG और PG स्तर की पढ़ाई का रास्ता देते हैं। ऐसे प्रोग्राम खास तौर पर उन छात्रों के लिए आकर्षक हो सकते हैं, जो लंबे समय की पढ़ाई को एक ही डिग्री या प्रोग्राम के जरिए आगे बढ़ाना चाहते हैं।
SC, ST और OBC छात्रों की भागीदारी बढ़ी
हायर एजुकेशन के विस्तार का असर अलग-अलग सामाजिक समूहों की भागीदारी पर भी दिखाई देता है। AISHE के अनुसार, 2014-15 में कुल हायर एजुकेशन नामांकन में SC छात्रों की हिस्सेदारी 13.44 फीसदी थी, जो 2023-24 में बढ़कर 15.5 फीसदी हो गई।
ST छात्रों की हिस्सेदारी 4.8 फीसदी से बढ़कर 6.4 फीसदी हुई। वहीं OBC छात्रों की हिस्सेदारी 32.8 फीसदी से बढ़कर 40.1 फीसदी हो गई। वास्तविक छात्र संख्या देखें तो 2023-24 में SC छात्रों का नामांकन 69.72 लाख, ST छात्रों का 28.83 लाख और OBC छात्रों का 1.80 करोड़ रहा।
GER में भी SC और ST छात्रों की स्थिति बेहतर हुई है। SC छात्रों का GER 2014-15 के 18.9 फीसदी से बढ़कर 2023-24 में 27.8 फीसदी और ST छात्रों का GER 13.5 फीसदी से बढ़कर 22.8 फीसदी हो गया।
हायर एजुकेशन में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी
महिला छात्रों की भागीदारी में भी पिछले दशक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में हायर एजुकेशन में करीब 1.57 करोड़ महिला छात्र थीं। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। यानी महिला नामांकन में 42.2 फीसदी की वृद्धि हुई, जो कुल छात्र नामांकन की वृद्धि से ज्यादा है।
महिलाओं का GER भी 22.9 फीसदी से बढ़कर 31.2 फीसदी हो गया। 2023-24 में महिला GER पुरुषों के 28.9 फीसदी से ज्यादा था। यह लगातार सातवां साल था जब महिला GER पुरुष GER से ऊपर रहा।
Gender Parity Index यानी GPI भी 2014-15 के 0.92 से बढ़कर 2023-24 में 1.08 हो गया। GPI का 1 से ऊपर होना बताता है कि GER के आधार पर उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक है।
STEM में भी बढ़ी भागीदारी
Science, Technology, Engineering और Mathematics यानी STEM विषयों में भी छात्रों की संख्या बढ़ी है। AISHE के अनुसार, STEM में नामांकन 2014-15 के 91.5 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.02 करोड़ हो गया। इसी दौरान STEM में महिला छात्रों की हिस्सेदारी 38.4 फीसदी से बढ़कर 44 फीसदी हो गई।
यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और उच्च शिक्षा में इन विषयों की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ सीटों की नहीं, शिक्षकों की भी
AISHE के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 साल में भारत ने हायर एजुकेशन के विस्तार में काफी प्रगति की है। यूनिवर्सिटी स्तर के संस्थान 760 से बढ़कर 1,289 हुए, कॉलेज 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गए और कुल छात्र नामांकन 3.42 करोड़ से बढ़कर 4.50 करोड़ पहुंच गया। PhD और इंटीग्रेटेड प्रोग्राम जैसे क्षेत्रों में तो वृद्धि और भी तेज रही।
लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू शिक्षक हैं। 2023-24 में देश के हायर एजुकेशन संस्थानों में कुल 17.32 लाख शिक्षक थे। इनमें 55.1 फीसदी पुरुष और 44.9 फीसदी महिला शिक्षक थीं। महिला शिक्षकों की संख्या 2014-15 के 5.69 लाख से बढ़कर 2023-24 में 7.78 लाख हो गई।
इसलिए आने वाले वर्षों में सिर्फ नई यूनिवर्सिटी और कॉलेज खोलना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक, बेहतर क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, रिसर्च सुविधाएं और अच्छी गुणवत्ता की पढ़ाई उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होगी।
खासकर तब, जब सरकार 2035 तक हायर एजुकेशन में GER को 50 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। अगर यह लक्ष्य हासिल करना है, तो आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वाले युवाओं की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में भारत के सामने अगला सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि कितने और छात्र कॉलेज पहुंच रहे हैं, बल्कि यह भी होगा कि उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त और योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं।




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