
इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं JEE और NEET की तैयारी करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए सिक्किम सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर CM-SAATHI (SATHEE) पहल के तहत जरूरतमंद छात्रों को मुफ्त कोचिंग देने की घोषणा की। इस पहल में IIT कानपुर सहयोग कर रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जो छात्र JEE और NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, उन्हें महंगी कोचिंग फीस की वजह से पीछे नहीं रहना पड़ेगा। ऐसे छात्रों के लिए दो महीने का मुफ्त क्रैश कोर्स उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को 4 सितंबर को मंजूरी दी थी।
महंगी कोचिंग फीस से जूझ रहे छात्रों को मिलेगा सहारा
मुख्यमंत्री तमांग ने कहा कि राज्य में कई ऐसे छात्र हैं जिनमें JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की क्षमता और इच्छा है, लेकिन उनके परिवार अच्छे कोचिंग संस्थानों की फीस वहन नहीं कर सकते। CM-SAATHI का उद्देश्य ऐसे छात्रों को बेहतर तैयारी का अवसर देना है।
यह पहल केवल पारंपरिक कोचिंग तक सीमित नहीं है। जुलाई में शुरू की गई CM-SAATHI पहल के तहत छात्रों को विशेषज्ञ वीडियो लेक्चर, अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट, प्रैक्टिस प्रश्न और डाउट सॉल्विंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण तैयारी की सुविधा छात्रों के घर और स्कूल तक पहुंचाना है, ताकि आर्थिक स्थिति उनकी पढ़ाई में बाधा न बने।
सिक्किम में शिक्षा पर सरकार का जोर
शिक्षक दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के योगदान की भी सराहना की। राजनीति में आने से पहले तमांग स्वयं शिक्षक रह चुके हैं। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण, सेवा और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के प्रति उनका विश्वास और योगदान समाज को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
सिक्किम सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी कई पहल शुरू की हैं। राज्य में पहले से Chief Minister’s Mentorship Programme और Mission Lakshya जैसी योजनाओं के जरिए विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और IIT-JEE तथा NEET की तैयारी में मदद देने पर जोर दिया गया है।
सिक्किम को 27 मई 2026 को ULLAS-Nav Bharat Saaksharta Karyakram के तहत पूरी तरह साक्षर राज्य घोषित किया गया था। उस समय राज्य की आधिकारिक साक्षरता दर 99.82 प्रतिशत बताई गई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में यह घोषणा की गई थी।
शिक्षा बजट और नई योजनाओं पर फोकस
राज्य सरकार शिक्षा को विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। हालांकि, 2025-26 के लिए शिक्षा पर राज्य के कुल खर्च का करीब 14.5 प्रतिशत आवंटित किया गया था, यानी इसे करीब 15 प्रतिशत कहना उचित होगा। 2026-27 में शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति के लिए करीब 2,236 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि छात्रों को भविष्य की पढ़ाई, रोजगार और रोजमर्रा की चुनौतियों के लिए भी तैयार करना है।
इसी दिशा में Sikkim Life Skills Curriculum पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत छात्रों को CPR, प्राथमिक चिकित्सा, आग से बचाव और आपदा के समय जरूरी कदम उठाने जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाने की योजना है। इसमें भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी भी शामिल है।
सिक्किम में आपदा सुरक्षा को लेकर स्कूल स्तर पर Friday Safety Five पहल भी आगे बढ़ाई जा रही है, जिसमें हर शुक्रवार सुबह की सभा के दौरान पांच मिनट छात्रों को आपदा और सुरक्षा से जुड़े जरूरी कौशल सिखाने के लिए निर्धारित किए जाते हैं।
गरीब छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का रास्ता आसान
JEE और NEET की तैयारी में कोचिंग की लागत लंबे समय से छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में CM-SAATHI का फोकस आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण तैयारी पहुंचाने पर है।
IIT कानपुर के सहयोग से चल रही इस पहल में डिजिटल अध्ययन सामग्री और विशेषज्ञ मार्गदर्शन को शामिल किया गया है। इससे सिक्किम के उन छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिल सकता है, जो आर्थिक कारणों से निजी कोचिंग संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।
सिक्किम सरकार की इन पहलों को राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक समान अवसर, प्रतियोगी परीक्षा की बेहतर तैयारी और व्यावहारिक जीवन कौशल से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। खासतौर पर JEE और NEET जैसी परीक्षाओं में मुफ्त तैयारी की सुविधा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।




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