
जम्मू-कश्मीर प्रशासन और मेडिकल क्षेत्र के बीच गतिरोध बढ़ता जा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न संस्थानों में काम कर रहे MBBS और BDS इंटर्न ने अपनी चल रही हड़ताल को जारी रखने का फैसला किया है। यह निर्णय 4 सितंबर 2026 को हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया, जिसमें सरकार ने लंबे समय से लंबित इंटर्नशिप स्टाइपेंड में संशोधन के लिए 30 दिनों की प्रशासनिक समयसीमा प्रस्तावित की थी।
हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। GMC Srinagar, GMC Baramulla और Sher-i-Kashmir Institute of Medical Sciences (SKIMS), Bemina समेत कई संस्थानों के इंटर्न डॉक्टरों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “समान काम, समान वेतन” के नारे लगाए और अपने मासिक स्टाइपेंड को मौजूदा 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग की।
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और पिछले करीब सात वर्षों से स्टाइपेंड में बदलाव नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ी है। मौजूदा स्टाइपेंड करीब 400 रुपये प्रतिदिन के बराबर है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समान क्लीनिकल जिम्मेदारियां निभाने वाले इंटर्न को करीब 25,000 से 45,000 रुपये प्रति माह तक स्टाइपेंड मिलता है।
इंटर्न डॉक्टरों के मुताबिक उनकी ड्यूटी में सप्ताह में 80 से 90 घंटे तक काम, 24 घंटे की शिफ्ट और अनिवार्य ग्रामीण पोस्टिंग शामिल है। हड़ताल के कारण कई बड़े अस्पतालों में नियमित ओपीडी (OPD) सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
मामले का समाधान निकालने के लिए 12 छात्र और इंटर्न प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सलाहकार और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के साथ अलग-अलग दौर में बातचीत की। करीब दो घंटे चली बैठक में सरकार की ओर से बताया गया कि स्टाइपेंड बढ़ाने से जुड़ी प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए इंटर्न की मांगों को जायज माना। उन्होंने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब इसके वित्तीय प्रभाव का आकलन करने के लिए वित्त विभाग के पास है।
सरकार की ओर से मांग पूरी करने के लिए 3 अक्टूबर 2026 की संभावित समयसीमा बताई गई। साथ ही इंटर्न की पढ़ाई के दिनों के नुकसान और मरीजों की देखभाल से जुड़ी चिंताओं को भी स्वीकार किया गया।
हालांकि, सरकारी आश्वासन और एक महीने की प्रस्तावित समयसीमा के बावजूद इंटर्न प्रतिनिधियों ने अपना रुख नहीं बदला। Intern Representatives Committee की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि मौखिक आश्वासन और बैठक की आधिकारिक कार्यवाही किसी औपचारिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी सरकारी आदेश का विकल्प नहीं हो सकते।
प्रतिनिधियों ने पिछली देरी का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि करीब सात महीने पहले विधानसभा को दी गई स्टाइपेंड बढ़ाने की जानकारी और प्रस्ताव के बावजूद मांग पूरी नहीं हुई। इसलिए जब तक सरकार की ओर से अधिकृत लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक उनकी मुख्य मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इसी के चलते जम्मू-कश्मीर के मेडिकल और डेंटल इंटर्न ने सभी संबंधित संस्थानों में अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वे सकारात्मक और रचनात्मक बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बातचीत के नाम पर आंदोलन को कमजोर नहीं किया जाएगा।
अब सभी की नजर 3 अक्टूबर 2026 की प्रस्तावित समयसीमा पर है। तब तक सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर हड़ताल के असर को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रहेगी और प्रशासन पर इंटर्न डॉक्टरों की मांग को लेकर ठोस फैसला लेने का दबाव बना रहेगा।




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